नर्मदा के सहारे पर्यटन विकास रवि अवस्थी

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नर्मदा समग्र विकास को लेकर मप्र सरकार ने अब कमर कस ली है..इसके चलते नर्मदा जी के तटों को संवारने के साथ ही रोजगार के अवसर बढ़ाने इसके चहुं ओर समग्र विकास की अवधारणा पर काम किया जा रहा है..योजना के तहत पूर्व में जबलपुर से प्रयागराज तक पर्यटन कॉरिडोर व पश्चिम में धार के मेघनाद घाट से केवड़िया गुजरात तक नर्मदा में जलमार्ग बनाने की तैयारी है..
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नर्मदा को मप्र की जीवनदायिनी माना गया है..जो मप्र में 1077 किमी के अपने सफर में 16 जिलों से होकर गुजरती है…जो इन जिलों को नहीं बल्कि आसपास के अंचल को भी समृद्धि प्रदान करती हैं…नर्मदा जी का धार्मिक,आध्यात्मिक महत्व भी है…इसके चलते पवित्र नदी बनी मां नर्मदा की पूजा देवी स्वरूप में होती रही…लाखों की संख्या में श्रद्धालु प्रतिवर्ष नर्मदा स्नान करने पहुंचते हैं..
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नर्मदा मप्र की जीवनदायिनी नदी
मप्र में है 1077 किमी का सफर
16 जिलों का रहा है सीधा जुड़ाव

रेवा का धार्मिक,आध्यात्मिक महत्व
नर्मदा को माना गया है पवित्र नदी
हर साल लाखों श्रद्धालु करते स्नान
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श्रद्धालुओं के दिल में जो श्रद्धा मां नर्मदा को लेकर है..वही उत्तर भारत की मां गंगा को लेकर भी है..राज्य सरकार अब देश की दो पवित्र नदियों गंगा और नर्मदा को पर्यटन कॉरिडोर के माध्यम से जोड़ने की तैयारी कर रही है। इसके लिए प्रयागराज से रीवा होते हुए जबलपुर तक पर्यटन कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। प्रयागराज आने वाले पर्यटक नर्मदा स्नान के लिए जबलपुर आसानी से आ सकेंगे। इसके लिए कॉरिडोर में पर्यटकों के लिए सुविधाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही उत्तरप्रदेश में पर्यटन के गोल्डन ट्रायंगल प्रयागराज,अयोध्या व काशी को भी मप्र से जोड़ा जाएगा। इससे दोनों ही राज्यों में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा…
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बनेगा प्रयागराज-रीवा-जबलपुर कॉरिडोर
कॉरिडोर बनने से बढ़ेंगे जॉब के अवसर
उप्र गोल्डन ट्रायंगल से भी बढ़ेगा संपर्क

प्रयागराज-काशी-अयोध्या गोल्डन ट्रायंगल
पर्यटकों के लिए बढ़ेगी परिवहन सुविधा
प्रयागराज से जबलपुर की दूरी 366 KM.
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प्रयागराज और जबलपुर के बीच सड़क मार्ग से दूरी लगभग 366 किलोमीटर है। इसे तय करने में लगभग छह घंटे लगते हैं। दोनों शहर राष्ट्रीय राजमार्ग 30 से जुड़े हैं। इसके लिए पर्यटन कॉरिडोर बनाने के किसी फिजीकल तैयारी की जरूरत नहीं है। केवल पर्यटकों को एक जगह से दूसरी जगह डायवर्ट करने की जरूरत है। इसके लिए प्रयास किए जाएंगे। कॉरिडोर बनाने के लिए पर्यटन विभाग यूपी-एमपी के निवेशकों को आमंत्रित करेगा। सुविधाएं व इंसेंटिव देकर कॉरिडोर में पर्यटकों के लिए सुविधाएं विकसित की जाएंगी। होटल, रिसॉर्ट, रेस्टोरेंट बनाए जाएंगे। धार्मिक महत्त्व बताते हुए ब्राडिंग की जाएगी। टूर ऑपरेटर्स के जरिए पैकेज शुरू कराए जाएंगे। कॉरिडोर से विंध्य में भी पर्यटन को बढ़ाया जा सकेगा..
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जबलपुर,प्रयागराज एक ही एनएच पर
​पर्यटकों को डायवर्ट करने होंगे जतन
सुविधाएं विकसित करने मिलेगा इंसेटिव

कॉरिडोर में होंगे होटल,रिसॉर्ट,रेस्तरां
धार्मिक महत्व संग की जाएगी ब्रांडिंग
कॉरिडोर से विंध्य में भी बढ़ेगा टूरिज्म
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एक ओर पूर्वी मप्र में इस पर्यटन कॉरिडोर के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ही रोजगार के अवसर सृजित करने की तैयारी है तो दूसरी ओर पश्चिमी मप्र में धार जिले के चंदनखेड़ी मेघनाद घाट से गुजरात के केवड़िया में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक नर्मदा में जल मार्ग विकसित होगा…इसकी दूरी 120 किमी होगी..यह मध्य प्रदेश का पहला अंतरप्रांतीय जलमार्ग बनेगा। क्रूज संचालन के लिए मध्यप्रदेश टूरिज्म और गुजरात सरकार में एमओयू पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। जल मार्ग पर मध्यप्रदेश और गुजरात सरकार को दो-दो फ्लोटिंग जेटी (पोंटून) क्रूज के टर्मिनल के रूप में कार्य करेगी। इसके लिए मध्यप्रदेश को दो पोंटून मिल चुके हैं…
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पश्चिचमी मप्र में भी पर्यटन कॉरिडोर
धार से केवड़िया तक होगा जलमार्ग
जलमार्ग पर क्रूज से हो सकेगी यात्रा

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी जाना होगा आसान
धार से केवड़िया की दूरी है 120 KM.
मप्र,गुजरात के बीच हो चुका अनुबंध
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मप्र में राजस्व बढ़ाने सरकार का फोकस टूरिज्म विकास पर है..वहीं दूसरी ओर नर्मदा समग्र योजना में नर्मदा के संरक्षण व संवर्धन की दिशा में भी सतत काम किया जा रहा है..इसी क्रम में नर्मदांचल में पर्यटन को बढ़ावा एक पंथ दो काज वाला साबित होगा…इससे न केवल राजस्व बल्कि रोजगार के नए अवसर भी बढ़ेंगे..विकास के लिए मोहन सरकार के प्रयास सराहनीय कहे जा सकते हैं।

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