संभल में हिंसा, दूसरी तरफ जय श्रीराम, किसने लगाए नारे
उत्तर प्रदेश के संभल में जामा मस्जिद के सर्वे के बाद हुए बवाल के बाद एक वीडियो वायरल हुआ। इसमें हिंदू पक्ष के वकील और याचिकाकर्ता विष्णु शंकर जैन दिख रहे हैं। पीछे कुछ लोग हैं, जो जय श्री राम का नारा लगा रहे हैं।
वीडियो मस्जिद से करीब आधा किमी दूर सरथल चौक का है और 24 नवंबर सुबह 10.30 बजे का बताया जा रहा है। उसी वक्त मस्जिद के बाहर हिंसा चल रही थी। विष्णु शंकर जैन सर्वे खत्म होने के बाद मस्जिद से कोतवाली लौट रहे थे। SP केके बिश्नोई और DM राजेंद्र पेंसिया इसकी पुष्टि कर चुके हैं।
दैनिक भास्कर ने इस वीडियो की पड़ताल की। इसमें चार किरदार सामने आए, जो वीडियो में दिख रहे हैं। इनमें मस्जिद से कुछ दूर बने शिव मंदिर के पुजारी सुंदरलाल तिवारी, भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला मंत्री हिमांशु कश्यप, जिला कार्यकारिणी सदस्य सजन श्रीमाली और BJP के सभासद गगन वार्ष्णेय हैं। हमने उनका पक्ष जाना। इसके अलावा पुलिस सोर्स से भी बात की, जो हिंसा वाले दिन मौके पर मौजूद थे।

पहले जानिए वीडियो में कौन-कौन है 24 नवंबर को DM राजेंद्र पेंसिया और SP केके बिश्नोई की अगुआई में सर्वे टीम सुबह 6:30 बजे जामा मस्जिद पहुंची थी। वीडियो में विष्णु शंकर जैन के साथ सरथल चौकी इंचार्ज दीपक राठी दिखाई दे रहे हैं। एडवोकेट कमिश्नर रमेश कुमार राघव, हिंदू पक्ष के वकील गोपाल शर्मा, सरकारी वकील प्रिंस शर्मा और विष्णु शर्मा थे। उनके पीछे 20 से 30 लोग और थे, जो धार्मिक नारे लगा रहे थे।
हिंसा भड़क गई थी, इसलिए टीम को सुरक्षित रास्ते से ले गए: पुलिस सोर्स जामा मस्जिद के बाहर सुबह करीब 9:30 बजे हिंसा शुरू हुई। भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया। फायरिंग हो रही थी। इस बीच सर्वे का काम खत्म हो चुका था। विष्णु शंकर जैन समेत दूसरे वकील मस्जिद से बाहर निकले। वे जिस गेट से बाहर निकले, वहां हिंसा नहीं हो रही थी। इस गेट के सामने हिंदू आबादी रहती है। इसे कोट पूर्वी कहते हैं।
पुलिस में हमारे सोर्स बताते हैं, ‘पुलिस माहौल शांत करने की कोशिश कर रही थी। विष्णु शंकर जैन और टीम के बाकी मेंबर्स को मस्जिद में खतरा महसूस हो रहा था। इसलिए DM ने आदेश दिया कि सर्वे टीम को लेकर हम सुरक्षित रास्ते से कोतवाली चले जाएं।’
‘सरथल पुलिस चौकी के इंचार्ज दीपक राठी भी वहीं थे। उन्हें रास्ते पता हैं, इसलिए टीम को उनके साथ भेज दिया गया। DM राजेंद्र पेंसिया के कहने पर हम विष्णु शंकर जैन और बाकी लोगों को मस्जिद के सामने कोट पूर्वी से ले गए। उस वक्त वहां भीड़ नहीं थी।’

अब वीडियो में दिखे चारों किरदारों की बात
किरदार 1: सुंदरलाल तिवारी, शिव मंदिर के पुजारी वायरल वीडियो में विष्णु शंकर जैन के बाईं ओर चल रहे शख्स शिव मंदिर के पुजारी सुंदरलाल तिवारी हैं। हम दोपहर डेढ़ बजे उनके पास पहुंचे। सुंदरलाल तिवारी मंदिर के कपाट बंद करने की तैयारी कर रहे थे। हमने उनसे पूछा कि क्या वीडियो में विष्णु शंकर जैन के साथ हरे कुर्ते और नीली जैकेट में आप ही हैं? सुंदरलाल तिवारी ने जवाब दिया- हां।

वे कैमरे पर कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं हुए। उन्होंने बिना कैमरे पर आए हमसे बात की। सुंदरलाल तिवारी बताते हैं, ‘सरथल चौक काफी चहल-पहल वाला इलाका है। उस दिन सुबह के 10:30 बजे थे। मुझे पता चला कि मस्जिद के पास कहीं आग लग गई है। फिर किसी ने बताया कि उधर हिंसा भड़की है। वहां से धुआं भी उठ रहा था।’
‘मैं चौक पर पहुंचा। वहां बहुत लोग पहले से खड़े थे। मैंने पूछा तो उन्होंने बताया कि मस्जिद के पास लड़ाई हो रही है। पुलिस पर पथराव हो रहा है। सामने से विष्णु शंकर जैन आते दिखे। वे कुछ नहीं बोल रहे थे। वे कोतवाली जा रहे थे। चौक से कोतवाली तक जाने में 10 मिनट लगते है।’
विष्णु शंकर जैन हमारी गली से गुजर रहे थे। हमारे इलाके में किसी की भी सुरक्षा की जिम्मेदारी तो हमारी ही है। हम ‘जय श्री राम’ का नारा लगा रहे थे। भगवान का नाम लेने में कौन सी गलत बात है।


किरदार 2: हिमांशु कश्यप, जिला मंत्री, भारतीय जनता युवा मोर्चा विष्णु शंकर जैन के साथ टीम के बाकी मेंबर मस्जिद से निकलकर पंजाबी मंदिर रोड, सरथल चौकी, सूरजकुंड मंदिर, शंकर कॉलेज, श्री राम मंदिर और पुरानी तहसील होते हुए 20 मिनट में सरथल चौकी पहुंचे थे। इसी रास्ते में भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला मंत्री हिमांशु कश्यप का घर पड़ता है। वे भी टीम के साथ चल रहे लोगों में शामिल थे।
हिमांशु ने दैनिक भास्कर को बताया, ‘विष्णु शंकर जैन मेरे घर के सामने से गुजरते हुए चौक पर पहुंचे। उस वक्त मस्जिद के बाहर आंसू गैस के गोले छोड़े गए थे। उसका असर हवा में था। हमारी आंखों से भी आंसू आ रहे थे। बाहर क्या हो रहा है, ये जानने के लिए सभी लोग चौक पर इकट्ठा थे। विष्णु शंकर जैन को देखकर लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। हम उन्हें कोतवाली तक छोड़ने गए।’

हिमांशु आगे बताते हैं, ‘भीड़ किसी को उकसाने की कोशिश नहीं कर रही थी। नारे हरिहर मंदिर (जामा मस्जिद) से बहुत दूर लगाए गए थे। उस वक्त विष्णु शंकर जैन वापस आ रहे थे। इससे एक घंटा पहले ही हिंसा शुरू हो गई थी। हमने जय श्री राम और हर हर महादेव का नारा लगाया। कोई विवादित नारा नहीं लगाया। हमारा हिंदू आबादी वाला एरिया है। वहां कोई मुसलमान नहीं था।’
किरदार 3: गगन वार्ष्णेय, BJP के सभासद गगन वार्ष्णेय 24 नवंबर को सरथल चौक पर मौजूद थे। दैनिक भास्कर ने उनसे बात की। वे कैमरे पर नहीं आना चाहते। उन्हें डर है कि इससे पुलिस की कार्रवाई पर असर पड़ सकता है। बिना कैमरे पर आए उन्होंने बताया कि मैं उस दिन भीड़ के आगे चल रहा था, ताकि टीम के लिए रास्ता साफ रहे।

गगन बताते हैं, ‘सुबह 9 बजे हिंसा शुरू हुई थी। 11 बजे सब शांत हो गया। करीब 10 बजे विष्णु शंकर जैन मस्जिद से बाहर निकले। उनके चेहरे पर पसीना था। चौकी इंचाई दीपक राठी उन्हें प्रोटेक्ट करते हुए हमारे इलाके में लेकर आ रहे थे। विष्णु शंकर जैन को देखकर लोग घरों-दुकानों से बाहर आने लगे। वे भी टीम के पीछे चलने लगे। मैं रास्ते से लोगों को हटा रहा था, ताकि टीम आराम से कोतवाली तक पहुंच जाए।’
गगन आगे कहते हैं, ‘मस्जिद में दूसरी बार सर्वे होने वाला है, हमें इसकी जानकारी नहीं थी। ये बात सिर्फ मुस्लिम पक्ष को पता थी। हम नारेबाजी कर रहे थे। सभी को अपना धर्म निभाने का अधिकार है, लेकिन किसी को भी कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं है।’

किरदार 4: सजन श्रीमाली, जिला कार्यकारिणी सदस्य, भारतीय जनता युवा मोर्चा सजन श्रीमाली कहते हैं, ‘हम सरथल चौक पर जुड़े थे। हरिहर के नारे लगा रहे थे। माहौल बहुत गर्म था। मुसलमानों ने प्रशासन पर पत्थरबाजी कर दी थी। हमें विष्णु शंकर जी को कोतवाली तक सही सलामत पहुंचाना था। हम सब चौक पर माहौल के बारे में बात कर रहे थे। सामने से विष्णु जी आ रहे थे, तो हम सब उनके साथ चल दिए।’
‘हम जय श्री राम और हर हर महादेव के नारे लगा रहे थे। हिंदू हैं, नारे ही लगा सकते हैं। पत्थर तो मारेंगे नहीं। हम विष्णु शंकर जी का मनोबल बढ़ाना चाहते थे कि हम आपके साथ हैं। वे अकेले सड़क पर चलते, तो हमें अच्छा नहीं लगता। वे हमारे लिए लड़ रहे हैं।’
‘हम बहुत समय से चाहते थे कोई मंदिर का मुद्दा उठाए। हमारे पूर्वज कहते आए हैं ये हरिहर मंदिर है। मुसलमानों ने इस पर कब्जा कर लिया था। आने वाले समय में हम वहां जाकर दर्शन करेंगे।’

विष्णु शंकर बोले- कोई नारेबाजी कर रहा है, तो मैं क्या कर सकता हूं इस पर हमने याचिकाकर्ता विष्णु शंकर जैन से भी बात की। उनसे पूछा कि क्या नारे लगा रहे लोगों को रोका जाना चाहिए था? वे जवाब देते हैं, ‘कोई नारेबाजी कर रहा है तो मैं क्या कर सकता हूं। मैंने तो नारे नहीं लगाए। बताया ये जा रहा है कि मैं उन लोगों को लेकर गया था और उस वजह से दंगा हो गया। इससे बड़ा झूठ क्या होगा।’
माहौल बिगड़ने का खतरा नहीं था, इसलिए नारेबाजी से नहीं रोका: पुलिस सोर्स संभल में हिंसा हो रही थी, फिर भी पुलिस ने नारेबाजी रोकने की कोशिश क्यों नहीं की। इस पर पुलिस में हमारे सोर्स बताते हैं, ‘वीडियो में दिख रही भीड़ में 7 या 8 लोग विष्णु शंकर जैन के साथ सर्वे के लिए आए थे। DM के आदेश पर सभी को सुरक्षित कोतवाली ले जाया जा रहा था। चौक पर पहली बार लोग जुड़े। वहां से रास्तेभर लोग हटते और जुड़ते गए। सभी स्थानीय थे। उन्होंने कोतवाली तक नारे लगाए।
‘कोतवाली तक सिर्फ 4 या 5 लोग ही हमारे साथ पहुंचे। गगन वार्ष्णेय और पंडित जी आखिर तक साथ थे। हम लोगों से हटने के लिए कह रहे थे, लेकिन कोई बात नहीं सुन रहा था। हमारे बोलने से कोई नहीं रुकता। वहां मौजूद पुलिस अधिकारी मानते हैं कि नारेबाजी से हिंसा भड़क सकती थी, लेकिन वो हिंदू इलाका था, इसलिए उन्हें फिक्र नहीं थी। इस मामले में कोई FIR या शिकायत दर्ज नहीं हुई है।’

FIR में दावा: सांसद बिना परमिशन मस्जिद गए, वॉट्सएप ग्रुप पर लोगों को भड़काया संभल में हिंसा भड़काने के आरोप में सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल पर FIR दर्ज की गई है। ये FIR सरथल चौकी के इंचार्ज दीपक राठी ने दर्ज कराई है। इसमें बर्क को ‘आरोपी नंबर 1’ और सुहैल इकबाल को ‘आरोपी नंबर 2’ बताया गया है। दोनों के अलावा छह नामजद और 700-800 अज्ञात को आरोपी बनाया गया है।
FIR में लिखा है कि बर्क हिंसा से पहले 22 नवंबर को बिना परमिशन के मस्जिद गए थे। वहां उन्होंने भड़काऊ भाषण दिए। वहीं, सुहैल इकबाल पर आरोप है कि उन्होंने भीड़ से कहा कि बर्क हमारे साथ हैं। अपने मंसूबे पूरे करो। दोनों के नाम से वॉट्सएप ग्रुप पर मैसेज भेजे गए। इनके जरिए लोगों को उकसाया गया।
FIR में लिखा है कि भीड़ ने पुलिस पर डंडों, हॉकी स्टिक और बंदूकों से हमला किया। उनकी पिस्टल, आंसू गैस के गोले और मैगजीन लूट ली। लगातार फायरिंग की। इलाके में लगे CCTV कैमरे भी तोड़ दिए। हमलावर भीड़ सर्वे को रोकना और अफसरों को नुकसान पहुंचाना चाहती थी।
CCTV तोड़ने का वीडियो…
FIR में मस्जिद कमेटी के मेंबर जफर अली पर भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने दूसरी बार सर्वे के बारे में जानकारी लीक की। इससे उन्हें विरोध के लिए तैयारी करने में मदद मिली।

इस बीच सुहैल इकबाल ने कहा है कि उन्होंने कभी ऐसा कुछ नहीं किया, जिससे संभल में शांति भंग हो। जो हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है, ऐसा नहीं होना चाहिए था। उनका नाम इसमें खींचा गया है। उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है और न ही उन्होंने हेट स्पीच दी है।
हिंसा करने वालों की फोटो वाले पोस्टर लगाएगी पुलिस संभल पुलिस हिंसा में शामिल लोगों की फोटो वाले पोस्टर लगवाने की तैयारी में है। ये लोग 24 नवंबर को हुए पथराव और फायरिंग में शामिल थे। पुलिस ने भीड़ की CCTV फुटेज भी जारी की है।



संभल के SP कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा, ‘किसी निर्दोष को सताया नहीं जाएगा, लेकिन हमने ड्रोन कैमरों की फुटेज और CCTV फुटेज के जरिए पहचान की है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।’
‘हमने घटना में शामिल लोगों की पहचान करने के लिए साइबर सेल के अधिकारियों से मदद मांगी है। तस्वीरों वाले उनके पोस्टर चौराहों पर लगाए जाएंगे। आरोपियों की पहचान के लिए स्थानीय लोगों से भी मदद मांगी गई है।’
