धीरेंद्र शास्त्री की 120 लोगों की टीम बनाती है प्रसादी

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बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सनातन हिंदू एकता पदयात्रा में रोज एक लाख से ज्यादा भक्त शामिल होते हैं। इनके ठहरने और खाने का इंतजाम धीरेंद्र शास्त्री की टीम पहले से ही करती है।

9 दिन की इस पदयात्रा के हर पड़ाव पर टीम दो दिन पहले ही पहुंच जाती है। टीम यहां खाने और ठहरने की व्यवस्थाएं देखती है। हर पड़ाव पर 120 से 150 कारीगर खाना बनाने के लिए जुटे रहते हैं। शाम छह बजे से देर रात 3 बजे तक भोजन चलता है।

मंगलवार को सनातन हिंदू एकता पदयात्रा ने यूपी के मऊरानीपुर से निवाड़ी जिले के घुघसी गांव में एंट्री ली। धीरेंद्र शास्त्री शारदा कॉलेज में रात्रि विश्राम के लिए रुके हैं। यात्रा में चल रहे एक लाख से ज्यादा भक्तों के ठहरने और खाने का इंतजाम भी किया गया है।

बता दें कि हिंदुओं को जोड़ने के उद्देश्य से पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री 160 किलोमीटर लंबी ‘सनातन हिंदू एकता’ पदयात्रा निकाल रहे हैं। 21 नवंबर को यह पदयात्रा बागेश्वर धाम से शुरू हुई थी। जो 29 नवंबर को मध्यप्रदेश के ओरछा धाम पहुंचेगी। यहां पर यात्रा का समापन हो जाएगा।

पदयात्रा निवाड़ी के घुघसी के कॉलेज ग्राउंड पहुंची। यहां ठहरने की व्यवस्था की गई है।
पदयात्रा निवाड़ी के घुघसी के कॉलेज ग्राउंड पहुंची। यहां ठहरने की व्यवस्था की गई है।

पदयात्रा में साधु संतों के अलावा रोजाना देशभर के हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। बुधवार को पदयात्रा घुघसी से निवाड़ी के लिए रवाना होगी। 17 किमी का सफर तय करने के बाद रेस्ट हाउस एरिया में रात्रि विश्राम होगा।

घुघसी में बनाया डेढ़ लाख क्षमता वाला पंडाल धीरेंद्र शास्त्री के लिए कॉलेज ग्राउंड में एक बड़ा हॉल तैयार किया गया है। यहां वे रातभर आराम करेंगे। ग्राउंड में भक्तों के लिए डेढ़ लाख लोगों की क्षमता वाला पंडाल बनाया है। यहां वे ठहरे हैं। शाम सांस्कृतिक कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों ने प्रस्तुति दी।

कॉलेज में भक्तों के ठहरने के लिए पंडाल बनाए गए हैं। यहां भजनों की प्रस्तुति भी दी गई।
कॉलेज में भक्तों के ठहरने के लिए पंडाल बनाए गए हैं। यहां भजनों की प्रस्तुति भी दी गई।

20 हलवाई और 100 सहायकों ने बनाया खाना यात्रा में शामिल सभी भक्तों के खाने के लिए कॉलेज मैदान में 20 हलवाई और 100 सहायकों पूरी-सब्जी और खिचड़ी का प्रसाद बनाने में जुटे रहे। धीरेंद्र शास्त्री के लिए खाना बनाने वाले सुनील दाऊ ने बताया कि यहां 15 भटि्ठयों पर भोजन बनाने के लिए लगाई गई। धीरेंद्र शास्त्री के लिए दाल, चावल, रोटी व चटनी का इंतजाम किया गया है। उन्हें चाय बेहद पसंद है जो उन्हें पड़ाव पर आने के बाद सबसे पहले दी जाती है। सुबह वह अंकुरित नाश्ता करते हैं।

पदयात्रा में चल रहे भक्तों के लिए दोपहर से ही खाना बनाने की शुरुआत हो गई थी।
पदयात्रा में चल रहे भक्तों के लिए दोपहर से ही खाना बनाने की शुरुआत हो गई थी।

फूड इंस्पेक्टर ने खुद रखी नजर एक से डेढ़ लाख लोगों के लिए बनाए जा रहे भोजन पर फूड इंस्पेक्टर सरिता अग्रवाल ने खुद नजर बनाए रखी। उन्होंने बताया कि भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित सैंपलिंग की जा रही है। यात्रा में लाखों भक्त शामिल हो रहे हैं। इसलिए प्रशासन भी अलर्ट मोड पर है।

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