सागर विश्वविद्यालय के पथरिया स्थित वैली कैम्पस में गौर संग्रहालय का उद्घाटन

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संस्कृति, परंपराओं और शौर्य की भावना को आत्मसात करने के लिए प्रेरित करेगा गौर संग्रहालय : उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल

सागर विश्वविद्यालय के पथरिया स्थित वैली कैम्पस में गौर संग्रहालय का उद्घाटन
भोपाल/ 26 नवम्बर 2024

उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि गौर संग्रहालय कला, संस्कृति और शौर्य का अद्वितीय समन्वय है। उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय न केवल डॉ. हरीसिंह गौर के जीवन, उनके विचारों और उनके द्वारा किए गए योगदान को प्रदर्शित करता है, बल्कि बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश की समृद्ध विरासत को को संजोए हुए है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर में शौर्य, संस्कृति एवं कला संग्रहालय का शुभारंभ किया।

उप मुख्यमंत्री ने इसे क्षेत्र के लिए गर्व का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह संग्रहालय नई पीढ़ी को न केवल अतीत से परिचित कराएगा, बल्कि उन्हें अपनी संस्कृति, परंपराओं और शौर्य की भावना को आत्मसात करने के लिए प्रेरित करेगा। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने सभी को गौर संग्रहालय का भ्रमण करने और इसे व्यापक स्तर पर प्रचारित करने का आह्वान किया। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत, विधायक सागर श्री शैलेन्द्र जैन, कुलाधिपति श्री कन्हैया लाल बेरवाल, और कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता भी उपस्थित रहे।

संग्रहालय की विशेषताएं

डॉ. गौर से संबंधित सामग्री: संग्रहालय में डॉ. हरीसिंह गौर से संबंधित साहित्य, उनके जीवन से जुड़ी दुर्लभ जानकारियां और सामग्री प्रदर्शित की गई है।
जनजातीय संस्कृति: जनजातीय समाज की अनूठी संस्कृति, उनकी परंपराओं और उनके संघर्षों से संबंधित सामग्री प्रदर्शित है।
शौर्य गाथाएं: बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश के वीर सेनानियों के पोर्ट्रेट और उनकी वीरगाथाएं संग्रहालय का हिस्सा हैं।
जैव विविधता और भूगर्भशास्त्र: मध्य प्रदेश की जैव विविधता और भूगर्भशास्त्रीय जानकारियां भी संग्रहालय में स्थान पाई हैं।
एनसीसी प्रदर्शनियां: राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) से संबंधित सामग्री और जानकारी भी संग्रहालय में प्रदर्शित की गई है।
लोक कला और परंपराएं: बुंदेलखंड की लोक कला, पारंपरिक वाद्य यंत्र, और देशज परंपराओं को संग्रहालय में प्रमुखता से स्थान दिया गया है।
आजादी के नायक: भारत की आजादी में बुंदेलखंड के योगदान को रेखांकित करते हुए स्थानीय जननायकों की कहानियां और गाथाएं भी संग्रहालय में प्रदर्शित की गई हैं।

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