मराठा आंदोलन वाले मनोज जरांगे बोले- फडणवीस जातिवादी

0
Spread the love

‘मुझे फर्क नहीं पड़ता कि कौन जीतता है और कौन हारता है। हमारे ऊपर जो अन्याय हुआ, ये लोग जानते हैं। हमें आरक्षण नहीं दिया गया। इस सरकार ने मराठाओं को सम्मान नहीं दिया, मराठा अब इसे गिराएंगे। हमारे बच्चों के साथ गलत करने वालों को छोड़ना नहीं है।’

मराठा आरक्षण के लिए बीते सितंबर में 9 दिन की भूख हड़ताल करने वाले मनोज जरांगे पाटिल अब भी सरकार से नाराज हैं। उन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कैंडिडेट उतारने का फैसला लिया, लेकिन फिर नॉमिनेशन वापस करवा दिए। वे कहते हैं कि एक जाति के भरोसे चुनाव नहीं जीते जाते, इसलिए हाथ पीछे खींच लिए। आगे भी राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं है।

मनोज पाटिल के मुताबिक, आरक्षण की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, चुनाव के बाद फिर से आंदोलन शुरू करेंगे। उनका मानना है कि मराठाओं के बिना कोई सत्ता पर काबिज नहीं हो सकता। डिप्टी CM फडणवीस को वे जातिवादी बता देते हैं। शरद पवार को स्वार्थी कहते हैं।

दैनिक भास्कर ने जालना जिले के अंतरवाली सराटी में मनोज जरांगे पाटिल से बात की। इसी गांव से शुरू हुआ उनका मराठा आरक्षण आंदोलन पूरे राज्य में फैल गया था। पढ़िए और देखिए पूरा इंटरव्यू…

सवाल: आपने चुनाव में कैंडिडेट उतारे, फिर नॉमिनेशन वापस करवा लिया, क्यों? जवाब: मैंने पहले ही लोगों से कहा था कि अगर समीकरण बनते दिखेंगे, तभी हमें चुनाव लड़ना है। अगर हमारे मुताबिक समीकरण नहीं बने, तो हम नामांकन वापस ले लेंगे। ये पहले से तय था। एक जाति के दम पर पूरे राज्य में चुनाव नहीं जीता जा सकता।

सवाल: आपने मुस्लिम-दलित-मराठा गठजोड़ साधने की कोशिश की थी। इस पर काम करके कैंडिडेट उतारे होते, तो कुछ सीटें तो निकल सकती थीं? जवाब: मराठवाड़ा में आज भी हमारे वोट हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव में पूरे राज्य के बारे में सोचना होता है। हम राजनीति से दूर महाराष्ट्र के मराठा, मुस्लिम और दलितों को जोड़कर सामाजिक एकजुटता के लिए कोशिश कर रहे थे। ये ऐसे समुदाय हैं, जिन पर अन्याय हुआ है। सारे समुदायों के सवाल एक जैसे हैं। हम अपनी सामाजिक लड़ाइयां लड़ेंगे।

सवाल: लोग आपके बारे में कम जानते हैं, मराठा लीडर बनने की यात्रा कैसी रही? जवाब: मैं बीड़ जिले के देवरा तालुका के मातोरी गांव से हूं। 12वीं तक पढ़ाई वहीं हुई। महाराष्ट्र में मराठा समुदाय 50-55% तक है। पूरे समुदाय में गुस्सा है। इतना बड़ा समुदाय होने के बावजूद हमारी दिक्कतों का समाधान क्यों नहीं हो रहा। हमारे सवालों के जवाब क्यों नहीं दिए जा रहे।

हम अपने सवालों को लेकर लड़ाई लड़ने आए थे। हम राजनीति करने नहीं आए थे। OBC को मंडल कमीशन ने आरक्षण दिया है, हमारे पास तो ये 1884 से था। हमने पूरी ईमानदारी से इस मुद्दे को उठाया और आम लोगों तक लेकर गए। समाज ने चुनाव लड़ने के लिए कहा, तो हमने चुनाव लड़ने का फैसला लिया। समाज ने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया, तो हमने नॉमिनेशन वापस ले लिए।

समाज के लोगों को जिंदगीभर के लिए राहत देना हमारी जवाबदारी है। समाज का अपमान करने से अच्छा है, चुनाव नहीं लड़ना। अगर हम 50-100 उम्मीदवार खड़े कर देते और वे हार जाते, तो ये पूरे समाज के लिए तमाचा होता।

सवाल: राज्य में 32% मराठा आबादी है। राजनीति में भागीदारी करीब 50% है। दूसरे क्षेत्रों में भी मराठाओं की मौजूदगी आबादी के मुकाबले ज्यादा है। फिर आरक्षण की जरूरत क्यों हैं? जवाब: आरक्षण की मांग आर्थिक पैमाने पर नहीं, सामाजिक और शैक्षणिक आधार पर होनी चाहिए। अगर आर्थिक पैमाने पर देखा जाए, तो जितने OBC नेता है, उनके पास भी सब कुछ है। पैसा है, जमीन है, स्कूल हैं, बड़े-बड़े कारखाने हैं।

मराठा समाज के 98% लोग गरीब हैं, सिर्फ 2% ही अमीर हैं। क्या आप 2% लोगों की वजह से 98% लोगों को मारना पसंद करेंगे। आप कह रहे हैं कि मराठा 32% हैं, लेकिन अब मराठा 55-60% तक हैं। जनगणना होगी, तब तो पता चलेगा। OBC की जितनी आबादी है, उसके अनुपात में उन्हें अच्छा आरक्षण मिला है।

सवाल: मराठा आरक्षण के लिए आपने अनशन किए, भूख हड़ताल की। ये सब कब तक करते रहेंगे? जवाब: हमारे पीछे छत्रपति शिवाजी महाराज की शक्ति है। उनके विचारों के दम पर हम कुछ भी हासिल कर सकते हैं। पूरा मराठा समाज हमारे पीछे खड़ा है। हम असंभव को संभव करके दिखाने की क्षमता रखते हैं।

हर कोई कहता था कि मराठा समाज कभी एक साथ नहीं आएगा, लेकिन हम पूरे समाज को साथ लेकर आए। मैं दिन-रात अपनी जान की बाजी लगाकर लड़ता हूं। ये पहली बार हुआ है कि मेरे पीछे करोड़ों की तादाद में मराठा समाज एकजुट हुआ है। एक बार चुनाव खत्म हो जाएं, इसके बाद फिर से हमारा आंदोलन शुरू होगा।

सवाल: मराठवाड़ा में मराठा बनाम OBC का माहौल बन रहा है। आप इसे कैसे देखते हैं? जवाब: जो लोग जातिवादी होते हैं, उन्हें जातिवाद ही दिखता है। वे गरीबों को एकजुट नहीं देख सकते हैं। मराठाओं ने कभी जातिवाद नहीं किया। उन्होंने समाज के लिए जो बन सकता है, वो किया है। दूसरों के लिए खुद की बलि दी है। ये लोग मराठाओं पर जातिवाद का आरोप लगाते हैं।

इससे पहले ये लोग माधव यानी माली, धनगर और वंजारी समीकरण लेकर आए थे। क्या ये जातिवादी नहीं था। प्रशासन में खुद के लोगों की भर्ती करवाना, जगहों के नाम जाति के आधार पर बदलना, हमने ये कभी नहीं किया। सिर्फ नेता जातिवाद का जहर फैलाते हैं।

QuoteImage

आम मराठा और आम OBC में कोई जातिवाद नहीं है। मैं 15 महीने से आंदोलन कर रहा हूं। आपको पता चला कि कहीं जातिगत हिंसा हुई है।

QuoteImage

सवाल: लेकिन बीड में मराठा आंदोलन के दौरान चुन-चुनकर घर जलाए गए थे? जवाब: उन्होंने ही एक-दूसरे के घर जलाए थे और आरोप गरीब मराठाओं पर मढ़ दिया।

सवाल: एक्सपर्ट्स का मानना है कि आपके चुनाव से पीछे हटने से महाविकास अघाड़ी को फायदा होगा। आपको क्या लगता है? जवाब: मराठा समाज एकजुट है और 100% मतदान करेगा। हमने किसी से नहीं कहा कि किस कैंडिडेट को वोट देना है। लोकसभा चुनाव में भी हमने मराठा समुदाय के कैंडिडेट्स को सम्मान दिया था। इस बार भी वैसा ही होगा। किसी की भी सरकार आने दो, मैं उस सरकार के खिलाफ लड़ूंगा और मराठा आरक्षण लेकर रहूंगा।

सवाल: BJP और डिप्टी CM देवेंद्र फडणवीस के बयानों से लगता है कि वे OBC समुदाय को एकजुट कर रहे हैं। क्या इससे भी मराठा बनाम OBC हो रहा है? जवाब: वे बहुत ही द्वेषपूर्ण व्यक्ति हैं। उनके मन में मराठा समाज के लिए चिढ़ है। वे जातिवादी हैं। मैंने इतना द्वेषपूर्ण नेता नहीं देखा। उनकी वजह से पूरी BJP और RSS धोखे में है।

ऐसा नहीं है कि BJP के सारे लोग बुरे हैं, लेकिन कुछ लोगों की वजह से पूरी BJP का विरोध करना पड़ रहा है। वे मैदान में आकर आमने-सामने नहीं लड़ सकते। वे दिल्ली में BJP हाईकमान से झूठ बोलते हैं कि हमने मैनेज कर लिया, उनसे कुछ नहीं हो रहा है। विधायकों को डराकर वे लोगों को अपने पक्ष में कर रहे हैं।

सवाल: अनशन के दौरान CM एकनाथ शिंदे आपसे मिले थे। तब आपने आंदोलन वापस ले लिया था। शिंदे मराठा हैं, अगर वे दोबारा CM बनते हैं, तो आपको लगता है कि कुछ होगा? जवाब: कोई भी CM बने, हमारी लड़ाई उनके खिलाफ भी जारी रहेगी। हम किसी को चैन से नहीं सोने देंगे। मेरी और शिंदे की करीबी को लेकर कौन क्या कहता है, मैं इसकी परवाह नहीं करता। राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप होते ही हैं, लोग झूठ भी बोलते हैं। मराठाओं के लिए मेरी लड़ाई जारी रहेगी। मराठाओं के बिना कोई भी सत्ता पर काबिज नहीं हो सकता।

सवाल: पश्चिम महाराष्ट्र में NCP की अच्छी पकड़ रही है। अब पार्टी दो धड़े में बंट गई है। शरद पवार भी मराठा हैं। उनके बारे में आपका क्या सोचना है? जवाब: मैं उनके बारे में सोचने वाला कौन होता हूं। वे राजनीति में किसी के नहीं हुए। वो अपने स्वार्थ और संपत्ति के बारे में ही सोचते रहे। हमेशा सत्ता में कैसे बने रहना है, यही सोचते रहते हैं। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि NCP और BJP साथ आएंगे, शिवसेना और कांग्रेस साथ आएंगे, लेकिन ये सब हो रहा है। इसे ही स्वार्थ की राजनीति कहते हैं।

पहली बार महाराष्ट्र में ऐसा हो रहा है कि सभी पार्टियां सत्ता में रही हैं। लोग इन नेताओं को समझ गए हैं कि ये न गरीबों के हैं, न किसानों के। इन्हें सिर्फ सत्ता चाहिए। मराठा इन्हें सत्ता तक नहीं पहुंचने देंगे।

सवाल: छगन भुजबल OBC नेता हैं, आपको बीच-बीच में चैलेंज देते रहते हैं? जवाब: उनका कुछ भी सही नहीं है। उन्होंने अपने परिवार को खत्म कर दिया। भ्रष्टाचार से जो पैसा कमाया, वो भी खत्म कर दिया। पहले उन्होंने शिवसेना की, फिर NCP की लंका लगाई। मराठा उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे। वे मराठाओं के आरक्षण के खिलाफ हैं।

सवाल: समीकरण फिट नहीं बैठे, तो हाथ पीछे खींच लिए। आप तो ऐसी राजनीति से दूर रहने की बात कहते हैं, आपने भी तो वही राजनीति करने की कोशिश की? जवाब: इन नेताओं के पास गरीबों-किसानों के लिए काम करने का कोई विजन नहीं है। अगर कुछ जातियां साथ मिलकर लड़ती हैं, तो हम गरीबों को न्याय दे सकते हैं। किसानों की मांगें पूरी कर सकते हैं। राजनीति में जीतने के लिए समीकरण जमाना पड़ता है, हम अपने समाज के लिए काम करने वाले लोग हैं।

हमें हमारे ऊपर हुए सामाजिक अन्याय का बदला लेना है। पता नहीं, हमारी एकजुटता को किसकी नजर लगी। हम नहीं जुड़ पाए, कोई बात नहीं। कई बार चीजें नहीं हो पाती हैं। मीडिया इसका इश्यू बनाए, इसकी कोई जरूरत नहीं है। चुनाव लड़ने का जो हुआ, वो हुआ, अब हम फिर से एकजुट होने की कोशिश कर रहे हैं।

सवाल: इस चुनाव में दो गठबंधन और 6 बड़ी पार्टियां हैं। मराठा आरक्षण के मुद्दे को कौन हल कर सकता है? जवाब: कोई भी इसका समाधान नहीं कर सकता। वे सब एक जैसे हैं। मैं महाराष्ट्र के मराठाओं को बताना चाहूंगा कि इन पर भरोसा मत करो।

सवाल: आप कभी एक्टिव पॉलिटिक्स में आएंगे? जवाब: मैं कभी राजनीति में नहीं आऊंगा। गरीबों के समर्थन का इस्तेमाल मैं अपने स्वार्थ के लिए नहीं करना चाहता। लोगों का समर्थन और संगठन लोगों के लिए ही काम आना चाहिए।

सवाल: चुनाव के बाद आपके आंदोलन की क्या प्लानिंग है? जवाब: मैंने अपने समाज के लोगों को यही बताया है कि यहां भीड़ मत लगाओ। चुनाव के बाद मैं तुरंत आंदोलन शुरू करूंगा। मराठाओं को 100% आरक्षण मिलने के बाद अगर कुछ बचा तो देखेंगे कि क्या करना है। मेरी पूरी जिंदगी आरक्षण के लिए है, एक बार मिल जाएगा, फिर हम कुछ और के बारे में सोचेंगे।

सवाल: महाराष्ट्र के बाहर रहने वालों को आंदोलन के बारे में क्या मैसेज देंगे? जवाब: देश के सभी मराठाओं को एकजुट रहना चाहिए। किसानों को भी एकजुट रहना चाहिए, तभी न्याय मिलेगा। पूरे देश के नागरिकों, जाट, पटेल, राजपूत, यादवों से विनती है कि हमें एकजुट रहना है। छोटी-छोटी जातियां एक साथ आकर बड़ी जातियों को खत्म करने का षड्यंत्र रच रही हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


Notice: ob_end_flush(): failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home2/lokvarta/public_html/wp-includes/functions.php on line 5481