क्या MP-हरियाणा का बदला UP में ले रहे अखिलेश
दो तारीखें… 7 सितंबर, 2024: हरियाणा में विधानसभा चुनाव थे। सीट शेयरिंग पर बातें हो रही थीं। UP में कांग्रेस के साथ लोकसभा चुनाव लड़ने वाली समाजवादी पार्टी 5 सीटों पर दावेदारी कर रही थी। कांग्रेस लीडर दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने 7 सितंबर को कहा, ‘समाजवादी पार्टी का हरियाणा में कोई जनाधार नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस और सपा साथ हैं, लेकिन हरियाणा में सपा के साथ कांग्रेस का कोई गठबंधन नहीं है।’
एक महीने बाद
9 अक्टूबर, 2024: उत्तर प्रदेश में 10 सीटों पर होने वाले उपचुनाव में समाजवादी पार्टी ने 6 कैंडिडेट्स के टिकट फाइनल कर दिए। कांग्रेस उपचुनाव में 5 सीटों पर कैंडिडेट्स उतारना चाहती थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
अब सिर्फ 4 सीटें मीरापुर, कुंदरकी, खैर और गाजियाबाद सदर पर टिकट फाइनल होना था। गुरुवार को मीरापुर से सपा ने कैंडिडेट का ऐलान कर दिया। कांग्रेस 5 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती थी, लेकिन आखिर में उसे सिर्फ 2 सीटें खैर और गाजियाबाद सदर ही मिलीं। UP में कांग्रेस की दावेदारी को किनारे करना दीपेंद्र हुड्डा के बयान का जवाब माना जा रहा है।
उपचुनाव के लिए 9 सीटों पर 13 नवंबर को वोटिंग होगी। अयोध्या की मिल्कीपुर सीट पर अभी चुनाव नहीं होगा। मिल्कीपुर से जुड़ी एक याचिका हाईकोर्ट में है, जो पूर्व विधायक बाबा गोरखनाथ ने दाखिल की थी।

वोटिंग से पहले सीटों का बंटवारा क्या कांग्रेस-सपा के बीच तनातनी की वजह बनेगा, क्या UP में सपा-कांग्रेस गठबंधन कमजोर पड़ रहा है, राहुल-अखिलेश की जोड़ी का फ्यूचर क्या है, दैनिक भास्कर ने ये सवाल एक्सपर्ट्स और पॉलिटिकल पार्टियों से पूछे।
कांग्रेस की 5 सीटों की डिमांड क्या 2 सीटों पर सिमटी UP में होने वाले उपचुनाव 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सबसे बड़ी लड़ाई हैं। सपा और BJP के बीच सीधा मुकाबला है। सपा ने 7 सीटों पर कैंडिडेट उतार दिए हैं। अब सिर्फ कुंदरकी सीट से कैंडिडेट का ऐलान होना बाकी है। यहां से सपा के पूर्व विधायक हाजी रिजवान चुनाव लड़ सकते हैं। इसी भरोसे पर वे BSP छोड़कर सपा में आए थे। वे उपचुनाव लड़ने के लिए तैयारी भी कर रहे हैं।
मीरापुर सीट से सपा ने सुंबुल राणा को टिकट दिया है। सुंबुल पूर्व सांसद कादिर राणा की बहू हैं। कादिर राणा भी यहां से टिकट के दावेदार थे। वे 2022 में BSP छोड़कर सपा में आए थे। उन्होंने बिजनौर लोकसभा सीट से टिकट मांगा था, लेकिन सपा ने उन्हें चुनाव नहीं लड़ाया।
2022 के विधानसभा चुनाव में मीरापुर से RLD के चंदन चौहान जीते थे। BJP दूसरे और BSP तीसरे नंबर पर थी। 5वें नंबर पर रही कांग्रेस को सिर्फ 1258 वोट मिले थे। फिलहाल, यहां सपा और कांग्रेस दोनों का दबदबा नहीं है।
खैर और गाजियाबाद सदर सीट पर BJP मजबूत है। पिछले चुनाव में यहां उसे बड़े अंतर से जीत मिली थी। सपा पहले ही यहां अपने कैंडिडेट्स नहीं उतारना चाहती थी, ऐसे में उसने दोनों सीटें कांग्रेस को दे दी हैं।

7 में से 4 सीटें सांसदों के परिवार वालों को मिलीं सपा के 7 कैंडिडेट्स में 4 सीट छोड़ने वाले नेताओं के परिवार से ही हैं। फैजाबाद से अवधेश प्रसाद के सांसद बनने के बाद मिल्कीपुर सीट खाली हुई थी। सपा ने यहां अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद को टिकट दिया है। करहल सीट अखिलेश के सांसद बनने के बाद खाली हुई थी। यहां से अखिलेश के परिवार से ही तेज प्रताप यादव को टिकट दिया गया है।
सीसामऊ सीट पर सपा विधायक इरफान सोलंकी की पत्नी नसीम को टिकट दिया गया है। इरफान को मकान कब्जाने और आगजनी के मामले में सजा मिली है। इसके बाद यह सीट खाली हुई थी।
इसी तरह कटेहरी सीट विधायक लालजी वर्मा के सांसद बनने के बाद खाली हुई थी। यहां से लालजी वर्मा की पत्नी शोभावती वर्मा को टिकट दिया गया है। सिर्फ फूलपुर और मझवां ही ऐसी सीटें हैं, जहां परिवार वाला फैक्टर नहीं है।
2022 में कटेहरी, करहल, मिल्कीपुर, सीसामऊ और कुंदरकी सीट पर सपा को जीत मिली थी। फूलपुर, गाजियाबाद, खैर और मझंवा में BJP की सहयोगी निषाद पार्टी जीती थी। मीरापुर सीट राष्ट्रीय लोकदल के खाते में गई थी, जो उस समय सपा की सहयोगी थी। कांग्रेस इन 10 सीटों पर मुकाबले में भी नहीं थी।
एक्सपर्ट बोले- कांग्रेस ने 5 सीटें मांगीं, ताकि 2-3 सीट तो मिल ही जाएं सपा-कांग्रेस में सीट बंटवारे पर सीनियर जर्नलिस्ट गौरव अवस्थी कहते हैं, ‘उत्तर प्रदेश में एक कहावत बहुत प्रचलित है कि तोप का लाइसेंस मांगोगे तो बंदूक का आसानी से मिल जाएगा। उसी तरह कांग्रेस ने जानबूझकर सपा से 5 सीटें मांगीं, ताकि उसे दो-तीन सीटें आसानी से मिल जाएं। इतना भी हो गया तो कांग्रेस खुश ही होगी।’
‘लोकसभा के नतीजों के बाद कांग्रेस UP में पहले से ज्यादा कॉन्फिडेंट है। इसी वजह से उसने सपा के सामने 50% सीटों की डिमांड की। इस डिमांड से पहले उसे सोचना चाहिए था कि लोकसभा में सपा को मिले वोट कांग्रेस से बहुत ज्यादा हैं। UP में फिलहाल सपा उससे ज्यादा स्टेबल दिखती है। ’

क्या कांग्रेस से MP और हरियाणा का बदला ले रही सपा 7 अक्टूबर को लंदन से लौटते ही अखिलेश यादव उपचुनाव के लिए एक्टिव हो गए। वे पार्टी ऑफिस में पदाधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं। उनका फोकस बूथ मैनेजमेंट पर है। सीटों के बंटवारे पर पार्टी अलर्ट है।
सपा के एक सीनियर लीडर कहते हैं, ‘सब जानते हैं कि UP में सपा के बिना कांग्रेस की दाल नहीं गलने वाली है। लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस के कैंडिडेट इसी वजह से अच्छे मार्जिन से जीते। अगर हम उनके लिए सीटें न छोड़ते, तो शायद उन्हें आधे वोट भी न मिलते।’
‘UP में कांग्रेस का जनाधार बहुत सिमट गया था, लेकिन अब उसने बढ़त बनाई है। इसकी वजह सपा के साथ गठबंधन ही है। हालांकि, राज्यों के चुनावों में चाहे वह मध्य प्रदेश हो या हरियाणा, कांग्रेस ने गठबंधन धर्म नहीं निभाया।’
सपा हरियाणा विधानसभा चुनाव में सीटें न दिए जाने से भी नाराज है। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस लीडर कमलनाथ ने सपा को सीट देने से इनकार कर दिया था। दोनों राज्यों में कांग्रेस को हार झेलनी पड़ी। यही कारण था कि हरियाणा का रिजल्ट आते-आते सपा ने अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया। इसे MP और हरियाणा का बदला माना जा रहा है।

अखिलेश के लिए साथ होने से ज्यादा साथ दिखना जरूरी 10, 11 और 12 अक्टूबर, तीन दिन में तीसरी बार अखिलेश यादव ने एक ही बात दोहराई। सबसे पहले अपने पैतृक गांव सैफई में, फिर पार्टी के ऑफिस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान और फिर लखनऊ के लोहिया पार्क में अखिलेश ने कहा कि गठबंधन पहले जैसा ही है। सपा और कांग्रेस साथ है। हमारा गठबंधन PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यकों के साथ खड़ा है।
सपा के इस रुख से 3 सवाल खड़े होते हैं…
1. अखिलेश को बार-बार ये सफाई आखिर क्यों देनी पड़ रही है? 2. क्या UP में सपा और कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं है? 3. अगर ठीक है तो फिर अखिलेश को एक ही बात बार-बार कहने की क्या जरूरत है?
इन सवालों पर पॉलिटिकल एनालिस्ट डॉ. भारती पांडेय कहती हैं, ‘अखिलेश यादव लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के शानदार प्रदर्शन से बने माहौल को 2 साल तक और खींचना चाहते हैं। कांग्रेस से गठबंधन बनाए रखने का भरोसा दिखाकर वे मुस्लिम और दलितों को साधे रखने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।’
‘अखिलेश लगातार कांग्रेस से गठबंधन की बात कह रहे हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस नेता उन पर आरोप लगा रहे हैं कि सपा ने उन्हें बिना बताए 6 सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए। सपा और कांग्रेस की कमजोर पड़ती अंडरस्टैंडिंग उपचुनाव में गठबंधन को नुकसान पहुंचा सकती है।’

कांग्रेस-सपा में टकराव का फायदा BJP को लखनऊ के सीनियर जर्नलिस्ट प्रमोद गोस्वामी मानते हैं कि कांग्रेस और सपा के गठबंधन का मकसद BJP को हराना है, तो दोनों के बीच सीटों पर मतभेद नहीं होना चाहिए। इस टकराव से दोनों को नुकसान और BJP को फायदा होगा।
प्रमोद लोकसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए समझाते हैं, ‘लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने ज्यादा सीटें मांगी थीं। तब उसे 17 सीटें देकर चुनाव लड़ा गया। इसका नतीजा गठबंधन के हक में गया। उसने BJP से ज्यादा सीटें जीतीं।’

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का अलायंस था। इसकी बदौलत सपा ने 37 और कांग्रेस ने UP में 6 सीटें जीतीं। राहुल गांधी रायबरेली सीट से 3.9 लाख वोटों से जीते। ये मार्जिन उनकी दूसरी सीट वायनाड से ज्यादा है। वहां राहुल 3.64 लाख वोट से जीते थे। 2019 में कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ी थी। पार्टी को सिर्फ रायबरेली में जीत मिली। 2014 में कांग्रेस ने सिर्फ दो सीटें अमेठी और रायबरेली जीती थीं।
3 सीटें जहां सपा ने अब तक कैंडिडेट नहीं उतारे कुंदरकी: 2022 में इस सीट से सपा के जियाउर्रहमान बर्क जीते थे। उनके सांसद बनने के बाद इस सीट पर सपा का दावा बना हुआ है।
गाजियाबाद सदर सीट: 2022 में यहां से BJP के अतुल गर्ग जीते थे। उन्हें 1,50,205 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर सपा, तीसरे पर BSP और चौथे पर कांग्रेस रही थी। सपा कैंडिडेट को 44,668 वोट और कांग्रेस उम्मीदवार को 11,818 वोट मिले थे। गाजियाबाद BJP की कोर सीट रही है। यहां उसे हराना मुश्किल है।
खैर सीट: अलीगढ़ जिले में आने वाली खैर विधानसभा सीट पर BJP के अनूप वाल्मीकि को 1,39,643 मिले थे। BSP दूसरे, RLD तीसरे और कांग्रेस चौथे नंबर पर थी। कांग्रेस कैंडिडेट को सिर्फ 1,514 वोट मिले थे। इस सीट पर BJP स्ट्रॉन्ग है।
पॉलिटिकल पार्टियां क्या कह रही हैं
BJP: स्वार्थ पर टिका INDIA ब्लॉक, उपचुनाव में फुस्स होगा BJP प्रवक्ता मनीष शुक्ला कहते हैं, ‘पूरा INDIA ब्लॉक स्वार्थ पर टिका है। स्वार्थ किसी गठबंधन का आधार हो, तो दोस्ती बहुत दिन टिक नहीं पाती। अखिलेश कांग्रेस के नेताओं को चिरकुट बोलते हैं। हुड्डा हरियाणा में सपा को बिना हैसियत वाली पार्टी बताते हैं। किसी तरह चुनाव में इज्जत बच जाए, इसलिए कांग्रेस-सपा का गठबंधन हुआ है। ये उपचुनाव में फुस्स होने वाला है।’

कांग्रेस: हमारे कार्यकर्ता नाराज नहीं, गठबंधन बना रहेगा कांग्रेस के UP चीफ अजय राय कहते हैं, ’उपचुनाव में टिकट बंटवारा कोई मुद्दा नहीं है। सपा की लिस्ट आने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता नाराज नहीं हैं, क्योंकि दोनों पार्टियों का लक्ष्य है BJP के जंगलराज को खत्म करना। हम लोग मिलकर चुनाव लड़ेंगे।’

सपा: BJP अपने गठबंधन के साथियों के बीच फूट मिटाए सपा के नेशनल स्पोक्सपर्सन अनुराग भदौरिया कहते हैं, ‘हमारे गठबंधन में उपचुनाव को लेकर कोई कंफ्यूजन नहीं है। BJP से ये सवाल होना चाहिए कि क्या वो अपनी सहयोगी निषाद पार्टी को उपचुनाव में 2 सीटें देगी। निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद दो सीटों की मांग कर रहे हैं। अगर BJP उन्हें सीटें नहीं देती है तो उनका जीतना मुश्किल हो जाएगा।’

अनुराग भदौरिया आगे कहते हैं, ‘BJP की पुरानी आदत है, जब उन पर सवाल खड़े किए जाते हैं, तो वे दूसरों पर इल्जाम मढ़ने लगते हैं।’
