सत्ता के गलियारे से…रवि अवस्थी
** पचौरी,क्या फिर बनेंगे सांसद?
बीजेपी अपने दल में आने वाले बाहरी दिग्गजों को नवाजने में कभी पीछे नहीं रही। अब 72 वर्षीय पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी के मामले को ही लीजिए। बीजेपी में आमद देते ही पार्टी प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा ने उन्हें मप्र की राजनीति के दूसरे संत की उपाधि दे डाली। इधर,पचौरी के हृदय परिवर्तन पर पीसीसी चीफ को आशंका है कि जरूर कोई डील रही होगी। वर्ना,एक पार्टी में 50 साल गुजारने वाले की विचारधारा यूं ही नहीं बदलती। तो क्या यह डील मप्र में राज्यसभा की वह सीट है,जिसके लोकसभा चुनाव बाद रिक्त होने की संभावना बढ़ गई है।
** पीसीसी चीफ की चिंता
आमतौर पर चुनाव के मौके पर राजनीतिक दल अपने भूले-बिसरे नेताओं व कार्यकर्ताओं को एकजुट कर उनमें जोश पैदा करने का काम करते हैं,लेकिन इसके इतर मप्र कांग्रेस अपनी पार्टी से विदा होने वालों की सूची बनाने में व्यस्त है। इसका खुलासा स्वयं मप्र पीसीसी चीफ ने उस वक्त किया जब पार्टी के कुछ और दिग्गजों ने बीजेपी की दामन थाम लिया। पीसीसी चीफ को पलायन रोकने व नई कार्यसमिति बनाने से ज्यादा चिंता इस बात की है कि जो जा रहे हैं वे कहीं ‘कमल क्षीर’ में गुम न हो जाएं। जो भी हो,पटवारी अपने कार्यकाल में संगठन में बढ़ते पलायन के लिए तो पहचाने ही जाएंगे।
** दूबरे और दो आषाढ़
राज्य मंत्रालय में आग लगी या आगजनी हुई। यह जांच का विषय है। पर यह तय है कि जांच की आंच किसी पर नहीं आना। वैसे भी ऐसे मामलों में ‘आंच’की परवाह करता कौन है? सतपुड़ा की अमिट कालिख अब भी मुंह चिढ़ा रही है। बहरहाल,नए हादसे से अपना कक्ष गंवा बैठे पांच राज्य मंत्री बेहद आहत बताए जाते हैं। जिनके पास विभागीय कामकाज का बंटवारा नहीं होने से काम पहले ही नहीं है। मंत्रालय में कुछ वक्त गुजारने एक बैठक व्यवस्था थी। फिलहाल,वह भी उजड़ गई।
**’मैं हूं मोदी परिवार’
भारतीय लोकतंत्र में इंदिरा जी के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ऐसी दूसरी शख्सियत हैं जो अपने दौर में भारतीय राजनीति का केंद्र बिंदु बन गए। क्या पक्ष और क्या विपक्ष। पीएम की हर एक एक्शन उनके लिए राजनीति का हिस्सा है। आरजेडी नेता लालू यादव ने मोदी के परिवार को लेकर तंज कसा तो पीएम ने समूचे देश को अपना परिवार बता दिया। देखते ही देखते बीजेपी के तमाम नेताओं ने एक्स पर अपना बायो बदल लिखा-‘मैं हूं मोदी परिवार’। पिछले चुनाव में बीजेपी ने ‘चौकीदार चोर’स्लोगन से विपक्ष को घेरा था। इस बार एक और नया स्लोगन विपक्ष ने उसे थमा दिया।
** जांच जल्द पूरी करने,बहस पूरी
यह शीर्षक भले ही कुछ अटपटा लगे,लेकिन बहुचर्चित हनी ट्रैप मामले की स्थिति कुछ ऐसी ही है। हाइकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में एक दिन पहले यह बहस पूरी हुई कि इस मामले की जांच जल्द पूरी की जाए। हैरत की बात यह कि जांच जल्द पूरी हो,इस पर सरकारी वकील को आपत्ति है। उनका तर्क रहा कि किसी भी जांच को समय—सीमा में नहीं बांधा जा सकता। जाहिर है! जांच जल्द पूरी हुई तो बहुत कुछ बेपर्दा हो जाएगा।अब हमाम में सामूहिक स्नान के दृश्य वाली कहावत यूं ही तो नहीं बनी। यही हाल इस कांड का भी है।अब ऐसे में जांच’बीरबल की खिचड़ी’की तर्ज पर पकाई जा रही है।
