भूरीबाई को मिलीं तीन गुना खुशियां

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अभावों में जीवन जीना किसी चुनौती से कम नहीं होता। ऐसे ही लंबे दौर से गुजरी हैं विदिशा जिले की श्रीमती भूरीबाई अहिरवार। एक समय था जब भूरीबाई के पास रहने के लिए पक्की छत नहीं थी। चूल्हे पर खाना बनाते हुए आंखों से आंसू रूकने का नाम ही लेते थे और स्वास्थ्य की चिंता उन्हें हमेशा सताती। लेकिन अब भूरीबाई को ये सारी चिंता नहीं रही। केन्द्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलते ही भूरीबाई को मानों खुशियों को पिटारा मिल गया। भूरीबाई चूल्हे पर खाना पकाने और धुएं के कारण आंखों से निकलने वाले आंसुओं से मुक्ति दिलाने के लिये बनाई गई उज्जवला योजना के लिये प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का बार-बार आभार मानती हैं। उल्लेखनीय है कि इस योजना में अब तक देश के 10 करोड़ 22 लाख 28 हजार से अधिक परिवारों को उज्जवला गैस कनेक्शन का लाभ मिला है। योजना को विस्तार देते हुए ‘उज्जवला योजना 2.0’ भी शुरू की गई। इसमें अब तक दो करोड़ 23 लाख 71 हजार से अधिक महिलाओं को उज्जवला गैस कनेक्शन दिये जा चुके हैं।

परेशानी से मिली मुक्ति

विदिशा जिले के टीलाखेड़ी गांव की भूरीबाई कहती हैं कि उसने कभी नहीं सोचा था कि जीवन में कभी इतनी खुशियों के दिन भी आयेंगे। वह हमेशा यही सोचती थीं कि पूरा जीवन कच्चे घर और टपकती हुई छत के नीचे ही गुजारना पड़ेगा। अगर बीमार पडीं, तो इलाज कैसे करा पाऊंगी? तभी उसे मालूम हुआ कि जिन लोगों के पास खुद का घर नहीं है, सरकार उन्हें पक्का घर बनाकर दे रही है। आयुष्मान भारत कार्ड बनाकर पांच लाख रूपये तक का इलाज भी करा रही है और तो और चूल्हे पर खाना पकाने और धुएं की परेशानी से मुक्ति दिलाने ‘उज्जवला योजना’ का लाभ भी दे रही है। बस फिर क्या था, उन्हें भी एक के बाद एक इन सभी योजनाओं का लाभ मिला और उसका जीवन खुशियों से भर गया। अब बारिश में न तो उनकी छत से पानी टपकता है और न ही बीमारी के खर्च की उन्हे कोई चिंता है। अब भूरीबाई खाना भी गैस पर बनाती हैं। धुएं से भी छुटकारा मिल गया है। इन तीन गुना खुशियों से भूरीबाई अब बेहद प्रसन्न हैं।

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