मिट्‌टी के गणेश का घर में विसर्जन

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आज अनंत चतुर्दशी है। गणेश उत्सव का आखिरी दिन होने से गणपति विसर्जन किया जाएगा। इसके लिए दिनभर में 2 मुहूर्त हैं। इनमें आप अपनी सुविधा के मुताबिक विसर्जन कर सकते हैं, लेकिन इस बात का ध्यान रखें की ये काम सूर्यास्त के पहले ही कर लें। ग्रंथों के हिसाब से सूरज डूबने के बाद मूर्तियों का विसर्जन नहीं किया जाता।

घर में ही मूर्ति विसर्जन करना ठीक है। इस बारे में ब्रह्मपुराण और महाभारत में कहा गया है कि नदियों को गंदा करने से दोष लगता है, इसलिए किसी गमले या नए बड़े बर्तन में पानी भरकर उसी में गणेश जी को विसर्जित करना चाहिए।

गणेश जलतत्व के स्वामी इसलिए करना चाहिए विसर्जन जल पंच तत्वों में एक है। इसमें घुलकर प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति अपने मूल तत्व में मिल जाती है। गणेश पंच तत्वों में जलतत्व के स्वामी माने जाते हैं। पानी के जरिये ही भगवान गणेश का साकार रूप निराकार हो जाता है। ये परमात्मा के एकाकार होने का प्रतीक भी है। इसलिए पानी में विसर्जन करने का महत्व है।

नई शुरुआत है विसर्जन काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी का कहना है कि इस साल गणेश स्थापना के साथ अच्छे काम करने और बुराई छोड़ने का जो संकल्प लिया था, गणपति विसर्जन के बाद इसी के साथ नई शुरुआत करनी चाहिए। गणपति आते हैं तो अच्छा भाग्य और समृद्धि लाते हैं। जिसको पाने के लिए पूरे साल कड़ी मेहनत करने के लिए नई शुरुआत का समय विसर्जन से शुरू हो जाता है। जो अगले साल गणेश स्थापना तक रहता है।

त्याग का भाव है गणपति विसर्जन में गणेश विसर्जन का अर्थ केवल मूर्ति को जल में मिलाना नहीं है। मूर्ति विसर्जन की ये प्रक्रिया समझाती है कि इस भौतिक दुनिया में हमने जो कुछ भी बनाया है, वो अस्थायी है और आखिरी में विलीन हो जाएगा, इसलिए संसार की माया में फंसने की बजाय अपनी अंदरूनी बुद्धि को जगाना चाहिए। विसर्जन को समझते हुए हम अपनी बुद्धि का सही इस्तेमाल कर संसार के मोह से मुक्त होकर इसे त्याग सकते हैं।

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