कर्म करते समय कर्ता भाव हटाऐ ‼️

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?एक पुरानी कहानी है कि एक पण्डित जी ने अपनी पत्नी की आदत बना दी थी कि घर में रोटी खाने से पहले कहना है कि “विष्णु अर्पण”।
? अगर पानी पीना हो तो पहले कहना है कि”विष्णु अर्पण”।उस औरत की इतनी आदत पक्की हो गई की जो भी काम करती पहले मन में यह कहती कि “विष्णु अर्पण” “विष्णुअर्पण”। फिर वह काम करती।
? एक दिन उसने घर का कूड़ा इकट्ठा किया और फेंकते हुए कहा कि “विष्णु अर्पण””विष्णु अर्पण”।

? वहीँ पास से नारद मुनि जा रहे थे। नारद मुनि ने जब यह सुना तो उस औरत को थप्पड़ मारा कि विष्णु जी को कूड़ा अर्पण कर रही है।
? फेंक कूड़ा रही है और कह रही है कि “विष्णु अर्पण”। वह औरत विष्णु जी के प्रेम में रंगी हुई थी। कहने लगी नारद मुनि तुमने जो थप्पड़ मारा ह वो थप्पड़ भी “विष्णु अर्पण”।
? अब नारद जी ने दूसरे गाल पर थप्पड़ मारते हुए कहा कि बेवकूफ़ औरत तू थप्पड़ को भी विष्णु अर्पण कह रही है।उस औरत फिर यही कहा आपका मारा यह थप्पड़ भी “विष्णु अर्पण”।
? इसके बाद जब नारद मुनि विष्णु पुरी में गए तो क्या देखते है कि विष्णु जी के दोनों गालों पर उँगलियों के निशान बने हुए थे। नारद पूछने लगे कि “भगवन यह क्या हो गया”?आप के चेहरे पर यह निशान कैसे पड़े”?

? विष्णु जी कहने लगे कि “नारद मुनि थप्पड़ मारे भी तू और पूछे भी तू” , नारद जी कहने लगे कि “मैं आपको थप्पड़ कैसे मार सकता हूँ”?,
? विष्णु जी कहने लगे, “नारद मुनि जिस औरत ने कूड़ा फेंकते हुए यह कहा था कि विष्णु अर्पण और तूने उसको थप्पड़ मारा था तो वह थप्पड़ सीधे मेरे को ही लगा था, क्योकि वह मुझे अर्पण था”।

? जब आप कर्म करते समय कर्ता का भाव निकाल लेते हैं और अपने हर काम में मैं, मेरी, मेरा की भावना हटा कर अपने इष्ट को आगे रखते हैं तो कर्मों का बोझ भी नहीं बढ़ता और वो काम आप से भी अच्छे तरीके से होता है।
संकलन
अनुराग अग्रवाल
Astrologer, Numerologist & Vastu Expert
जय श्रीकृष्ण smareka

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