अनाथालय में पिटाई, केयरटेकर ने सोती बच्चियों के फोटो लिए
‘सिस्टर हमें बहुत मारती-पीटती हैं। कुछ मांगते हैं, तो कहती हैं कि तेरी जिस मां ने सड़क पर छोड़ा है न, वही लाकर देगी। मुंह पर गरम पानी फेंकने की धमकी देती हैं। हम सो रहे होते हैं, तो हमारी फोटो लेकर फादर को भेजती हैं। रात में फोन करके उन्हें बुला लेती हैं।’
ये उन बच्चियों के बयान हैं, जो हरियाणा के चांदपुर में एक अनाथालय में रहती हैं। ये चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूट फरीदाबाद जिले से करीब 20 किमी दूर है। इसे सेंट जोसेफ सर्विस सोसाइटी करीब 28 साल से चला रही है।
टॉर्चर से परेशान होकर यहां रहने वाली दो बच्चियां भाग निकली थीं। उनके जरिए मामला सामने आया, तो डिस्ट्रिक्ट लेवल इंस्पेक्शन कमेटी अनाथालय पहुंची। बच्चियों ने उनके सामने अनाथालय के फादर जोमेन, फादर अरुण और केयरटेकर सिस्टर लूसी पर गंभीर आरोप लगाए।
पुलिस ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और पॉक्सो एक्ट के तहत उनके खिलाफ केस दर्ज किया है। हालांकि तीनों में से किसी से न पूछताछ की गई, न ही अरेस्ट किया गया। फिलहाल सभी फरार हैं।

हरियाणा के राज्य बाल संरक्षण आयोग और राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन अनाथालय में बच्चियों से मिलने आई थीं। उनसे मुलाकात के दौरान और जांच कमेटी के सामने बच्चियों ने मारपीट के अलावा ये आरोप भी लगाए हैं।
1. उन्हें ईसाई धर्म के अनुसार पूजा करने के लिए कहा जाता है, अनाथालय में दूसरे धर्मों के मुताबिक पूजा करने की व्यवस्था नहीं है।
2. बच्चियों को खाने में नॉनवेज ही दिया जाता है। नॉनवेज न खाने वाली बच्चियों को अचार के साथ चावल या रोटी दी जाती है।
3. 18 साल उम्र होने के बाद करीब 100 लड़कियों को केरल भेजा गया है। कुछ लड़कियों की वहीं शादी भी करा दी गई।
आरोप ये भी है कि सेंसिटिव मामला होने के बावजूद पुलिस समय से एक्टिव नहीं हुई। अब तक आरोपियों से पूछताछ तक नहीं की गई है। 19 जुलाई को मामला सामने आया, लेकिन FIR 29 जुलाई को दर्ज की गई। डेटा रिकवर करने के लिए मोबाइल फोन भेजने में भी देरी की गई।

दैनिक भास्कर की पड़ताल में ये भी पता चला कि अनाथालय बिना मान्यता के चल रहा था, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। यहां कुल 70 बच्चियों के रहने की जगह है, लेकिन अभी सिर्फ 29 बच्चियां ही रह रही हैं। अब पढ़िए मामला कैसे सामने आया और उसके बाद क्या हुआ।
तारीख: 19 जुलाई, 2024
जगह: सेनजो पुरम, चांदपुर
अनाथालय से भागी दो बच्चियों के आरोपों और कुछ दूसरी शिकायतों के आधार पर एक जांच टीम चांदपुर पहुंची। टीम में फरीदाबाद की जिला बाल संरक्षण अधिकारी गरिमा सिंह, बाल कल्याण समिति के मेंबर सुनील यादव, मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रदीप कुमार और जिला बाल कल्याण अधिकारी के प्रतिनिधि शामिल थे।
जांच टीम पहुंची, उस वक्त अनाथालय में कोई महिला स्टाफ नहीं था। टीम ने बच्चियों से बात की, ज्यादातर ने अनाथालय की केयरटेकर लूसी के खिलाफ मारपीट और बदसलूकी की शिकायत की। आरोप लगाया कि हम सो रहे होते हैं, तब सिस्टर लूसी हमारी फोटो लेकर फादर को भेजती हैं। टीम को लूसी के मोबाइल में एक बच्ची की सोते हुए फोटो भी मिली। ये फोटो फादर जोमेन को भेजी गई थी।
टीम को लीड कर रहीं गरिमा सिंह ने बताया कि विजिट के दौरान इंस्टीट्यूट के लोगों का व्यवहार अग्रेसिव था। उन्होंने टीम के साथ बदतमीजी की। इसके बाद हमने पुलिस को बुलाया। हो सकता है कि केयरटेकर ने मोबाइल से और फोटो डिलीट किए हों, इसलिए हमने पुलिस को फोन का डेटा रिकवर करने के लिए कहा है।
गरिमा सिंह बताती हैं, ‘हमने केयरटेकर पर कार्रवाई और सारी बच्चियों को CWC भेजने का निर्देश दिया है। हम लगातार फॉलोअप लेते रहे, लेकिन पुलिस आनाकानी करती रही।’

अनाथालय से मैनेजमेंट गायब, गार्ड बोले- किसी बच्चे से जबरदस्ती नहीं होती
चांदपुर गांव में सेनजो पुरम का कैंपस कई एकड़ में फैला है। इसी कैंपस में स्कूल और अनाथालय हैं। हम पहुंचे तब मेन गेट पर अंदर से ताला लगा था। यहां हमें गार्ड अजय सिंह मिले। 12 साल से काम कर रहे अजय सिंह ने बताया कि मैनेजमेंट से कोई भी मौजूद नहीं है। सभी मीटिंग के लिए दिल्ली गए हैं।
बच्चियों के आरोपों पर अजय सिंह कहते हैं, ‘किसी के साथ जबरदस्ती नहीं की जाती कि वो प्रेयर में जाए या न जाए। ये उनकी मर्जी है। हम दो सब्जी बनाते हैं। अगर किसी को नॉनवेज नहीं खाना है, तो दूसरी सब्जी ले लो, कोई जबरदस्ती नहीं है।
इस बारे में हमने इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर फादर जोमेन से फोन और मैसेज के जरिए उनका पक्ष जानने की कोशिश की, लेकिन उनकी तरफ से जवाब नहीं आया।
जिस लड़की को केरल भेजा, बहन बोली- उसका ब्रेनवॉश किया
बातचीत के दौरान गार्ड अजय सिंह ने बताया कि यहां एक लड़की थी। 18 साल की हो गई थी। उसकी बहन उसे साथ ले जाना चाहती थी। लड़की ने जाने से मना कर दिया। बहन की शिकायत पर पुलिस आई थी। तभी से ये मामला चल रहा है।
अजय सिंह जिस लड़की की बात कर रहे थे, वो बिहार के नालंदा की रहने वाली है। उसे 2009 में 4 साल की उम्र में अनाथालय भेजा गया था। बच्ची के माता-पिता नहीं हैं। बड़ी बहन है, जो दिल्ली के एक अस्पताल में गार्ड की नौकरी करती है।
12वीं पास करने के बाद लड़की को इसी साल केरल भेज दिया गया। दैनिक भास्कर ने उसकी बहन से बात की। वे बताती हैं, ‘मैं मार्च में बहन से मिली थी। अप्रैल में दोबारा मिलने गई, तो फादर और उनके लोगों ने मेरे साथ मारपीट की। उन लोगों ने मेरी बहन का ब्रेनवॉश कर दिया है। अनाथालय वाले जो कहते हैं, वो वही बोलती है।’
‘वो बहुत कम बात करती थी। बताती थी कि फादर और सिस्टर अच्छे नहीं हैं, बात नहीं करने देते। मैं कॉल करती थी, तो पीछे से फादर उसे सिखाते थे कि क्या बोलना है। मई में भी बहन से बात हुई थी। तब उसने अच्छे से बात की थी, लेकिन उसके बाद कोई बात नहीं हुई। मैंने CWC के चेयरमैन और DCP से शिकायत भी की थी।’

लड़की की बहन आगे बताती हैं, ‘मैं 22 मार्च को उससे मिलने अनाथालय गई थी। उसका 12वीं का एग्जाम खत्म हुआ था। 1 अप्रैल को वहां कोई पार्टी थी। बहन ने मुझसे कहा कि आप 3 अप्रैल को आ जाना, मैं घर चलूंगी।’
‘मैंने फादर को कॉल किया। उन्होंने कहा कि अभी नहीं, 15 दिन बाद जाएगी। उन्होंने बच्ची को कुछ कहा। इसके बाद वो बोली कि मुझे नहीं आना। 12 अप्रैल को मैं चाइल्ड वेलफेयर कमेटी से परमिशन लेकर अनाथालय गई थी। मैंने देखा कि फादर जोमेन टेबल पर बैठकर खाना खा रहे थे। बहन चम्मच से खाना चला रही थी। मैंने इस पर आपत्ति की, तो मेरे साथ मारपीट की गई।’
‘ये मामला चाइल्ड वेलफेयर कमेटी तक पहुंचा। कमीशन के मेंबर सुनील यादव ने लड़की की 10 दिन काउंसिलिंग के लिए कहा। वहां मैं अपनी बहन से मिली थी। उसी दौरान CWC चेयरपर्सन श्रीपाल करहाना ने मुझे कॉल करके कहा था कि फादर ठीक नहीं लग रहा है। हालांकि बहन को 10 दिन काउंसिलिंग में रखने की जगह 2 दिन में ही बिना बताए फादर के साथ वापस भेज दिया गया।’
लड़की की बहन के आरोपों पर फरीदाबाद के चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के चेयरपर्सन श्रीपाल करहाना कहते हैं- ‘बच्ची हाल में बालिग हुई थी। वो हमारे ऑफिस आई थी। बच्ची की बहन भी साथ में थी। बच्ची ने बहन के साथ जाने से इनकार कर दिया था। हमने उसे रिलीव कर दिया था।’
‘इसके बाद उन्होंने बच्ची को केरल भेज दिया। ये पता चला है कि उन्होंने 3-4 और लड़कियां केरल भेजी हैं। अब तो ये जांच का विषय है कि वो उन बच्चियों से क्या करा रहे हैं।’

राज्य महिला आयोग ने केरल भेजी लड़कियों की जानकारी मांगी
लड़कियों को केरल भेजने के आरोपों की जांच करने राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया अनाथालय पहुंची थीं। वे बताती हैं, ‘हमें इन्फॉर्मेशन मिली थी कि 18 साल उम्र होते ही यहां की लड़कियों को केरल भेज दिया जाता है। अगर परिवार उनके बारे में पूछता है, तो उन्हें तवज्जो नहीं दी जाती।’
रेणु भाटिया दावा करती हैं कि यहां से 100 लड़कियों को केरल भेजा गया है। कुछ की शादी करा दी गई है। वे कहती हैं, ‘ये कैसे डिसाइड करते हैं कि एक हिंदू लड़की की ईसाई लड़के से शादी कर दें। ऐसे इन्होंने कितनी बच्चियों की शादी कराई है, किससे शादी कराई है, कहां कराई है, अनाथालय से सारी जानकारी मांगी है।’
‘हमने अनाथालय के रिकॉर्ड्स चेक किए हैं। केरल भेजी गई लड़की और कॉलेज की डिटेल लेकर उसे वापस बुलाने की बात कही है।’
रेणु भाटिया आगे कहती हैं, ‘मैंने उनसे पूछा कि बच्चियों की 12वीं तक की पढ़ाई फरीदाबाद में होती है, तो आगे की पढ़ाई हरियाणा में क्यों नहीं कराते। उन्होंने कहा कि हमें केरल के स्पॉन्सर मिल जाते हैं। मुझे ये डाउटफुल लगा। मैंने 4 बच्चियों को रुकवा दिया है, दो 17 साल की हैं, एक 18 की और एक 19 साल की है।’

दैनिक भास्कर से बातचीत में रेणु भाटिया ने संस्था पर बच्चियों का ब्रेनवॉश करने का आरोप लगाया। वे कहती हैं, ‘बच्चियों को ऐसा क्या सिखाया जाता है कि वे कहती हैं, हम केरल या पंजाब में पढ़ेंगे। पंजाब में भी इनकी संस्था है। दो बच्चियों के साथ फिजिकल असॉल्ट की बात सामने आई थी। उन दोनों को दूसरी जगह भेजा गया है।’
‘CWC फरीदाबाद के चेयरपर्सन हमारी बात नहीं सुन रहे थे। फोन काट रहे थे और फिर स्विच ऑफ कर दिया। मैंने बाल अधिकार संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन प्रवीन जोशी से शिकायत की थी। वे वहां गई थीं, लेकिन उन्हें पता नहीं चला कि वहां बड़ी बच्चियां भी हैं।’
रेणु भाटिया ने गांव के सरपंच सूरजपाल भूरा और एक वकील को जिम्मेदारी दी है कि वे समय-समय पर जाकर अनाथालय की चेकिंग करेंगे।
FIR में बच्चियों से मारपीट का जिक्र है, आरोपियों पर पॉक्सो एक्ट भी लगा है, इसलिए हमने केस के इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर और चांदपुर चौकी इंचार्ज श्री कृष्ण से बात की।
उनके मुताबिक, जो आरोप लगाए गए हैं, उनसे जुड़े पुख्ता सबूत नहीं हैं। बच्चियों के शोषण की तो कोई बात ही नहीं है। अगर कोई बच्चा बात न माने, तो हम भी तो कुछ न कुछ कहेंगे ही। शिकायत है केयरटेकर ने लड़कियों के फोटो भेजे। कैसे फोटो भेजे, उन्होंने अश्लील तो लिखा नहीं है। अगर पीटी पर जाना हो और 4 बच्चे वहीं सो रहे हों, और मैं केयरटेकर हूं, मैंने फोटो खींचकर सीनियर को भेज दिया कि देखिए बच्चे ऐसा कर रहे हैं, तो इसमें कौन सा गुनाह है। अगर फोटो में अश्लीलता है तो हम कार्रवाई करेंगे।
जांच अधिकारी श्री कृष्ण बताते हैं कि फादर का ट्रांसफर कर दिया है, वो वहां नहीं हैं। मिल ही नहीं रहे हैं। उन्होंने तो पहले भी मना किया था। इस केस में आरोपों की पुष्टि किए बिना हम कैसे किसी को उठाएं। जिन बच्चियों ने बयान दिया है, वे जा चुकी हैं। इसमें जो लड़की है, उसे तो पहले ही केरल भेज रखा है।

मामले की FIR छांयसा थाने में दर्ज है। FIR दर्ज करने में देरी होने पर प्रभारी रणवीर सिंह ने कहा कि हमने CWC चेयरमैन को बताया कि उनकी ओर से शिकायत नहीं मिली है। शिकायत भी वॉट्सएप पर भेजी गई है, तो इसमें उनका क्या कहना है। उन्होंने कहा कि मैं अपने लेटर हेड पर सिग्नेचर करके शिकायत भेजूंगा। उनकी ओर से शिकायत मिलने के बाद ही हमने FIR दर्ज की है।
‘शिकायत में जिन बच्चियों का जिक्र है, वे अभी बाहर पढ़ने गई हैं। उनके बारे में पता लगेगा, तो उनका स्टेटमेंट भी रिकॉर्ड किया जाएगा। FIR में केयरटेकर लूसी पर फादर को फोटो भेजने का आरोप है, अभी हम उसी पर फोकस कर रहे हैं।’

2 लड़कियों को छोड़कर सभी बयान से पलटीं
19 जुलाई को जांच टीम के सामने बयान देने वाली ज्यादातर लड़कियां बयान से पलट गई हैं। जिला बाल संरक्षण अधिकारी गरिमा सिंह ने बताया कि विजिट के 2-3 दिन बाद बच्चियों को CWC के ऑफिस में बुलाकर बात की गई तो 2 बच्चियों को छोड़कर बाकी सभी बयानों से मुकर गईं। शायद उनके ऊपर दबाव था। हमने उन 2 बच्चियों को दूसरे बाल संरक्षण केंद्र में रखा है, ताकि अगर बच्चों या स्टाफ को कोई निर्देश दिया जा रहा हो, तो उन पर उसका असर न हो।
अनाथालय की मान्यता 20 महीने पहले खत्म
दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया है कि इस अनाथालय की मान्यता 18 दिसंबर, 2022 को खत्म हो चुकी है। फिर भी जिला बाल कल्याण समिति ने इसे योग्य बताया। अब राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन प्रवीन जोशी ने जांच शुरू कराई है।

उन्होंने सभी बच्चियों को तुरंत दूसरे बाल संरक्षण केंद्र में भेजने का आदेश दिया है। साथ ही बाल कल्याण समिति से अब तक लिए गए एक्शन की रिपोर्ट मांगी है। प्रवीन जोशी ने 12 अगस्त को बच्चियों को दूसरे सेंटर भेजने का आदेश दिया था, लेकिन अब तब सभी बच्चियां उसी अनाथालय में रह रही हैं।
