बेचारे नहीं होते थे पत्रकार
लोकसभा में पत्रकारों के साथ जो सोमवार को हुआ,वो वर्षों पहले ग्वालियर में हम पत्रकारों के साथ हवाई अड्डे पर हो चुका है।
एक बार एक उपराष्ट्रपति जी ग्वालियर आ रहे थे। परंपरानुसार समय पत्रकारों को भी महामहिम के स्वागत और परिचय के लिए हवाई अड्डे ले जाया गया। जिला प्रशासन को पता नहीं क्या सूझा पत्रकारों को उप राष्ट्रपति से मिलवाने का कार्यक्रम रद्द कर पत्रकारों को शीशा लगे दरवाजे वाले लाउंज में कैद कर दिया गया। पत्रकार भड़कें न सो नाश्ता और कोल्डड्रिंक की शीशियां भेज दी गई।
चूंकि हम पत्रकार बेचारे नहीं थे इसलिए हमने उपराष्ट्रपति के विमान से बाहर आते ही कोल्डड्रिंक की शीशियां कांच के दरवाजे पर दे मारी। शीशा टूट गया, हमने दरवाजा खोल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।शोर सुनकर उप राष्ट्रपति जी ने प्रशासन से जबाब तलब किया और जब उन्हें हकीकत का पता चला तो वे खुद चलकर पत्रकारों के पास आ गये। प्रशासन बहुत शर्मिंदा हुआ। हमारे पास कोई राहुल गांधी नहीं था।
