न बड़ा तालाब फुल, न भदभदा के गेट खुले, न कलियासोत फुल….फिर भी कलियासोत के गेट खोले…क्यों???

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एक बात कही……
न बड़ा तालाब फुल, न भदभदा के गेट खुले, न कलियासोत फुल….फिर भी कलियासोत के गेट खोले…क्यों???
यह सोलह आना सच है कि चेहरा बदलने से सिस्टम का चरित्र नहीं बदला करता…कल तक शिवराज सिंह चौहान मप्र का चेहरा थे, आज डॉ. मोहन यादव हैं…लेकिन इससे क्या फर्क पड़ता है??? सिस्टम जैसे कल काम कर रहा था, वैसे ही आज भी कर रहा है…!! भोपाल का मशहूर बड़ा तालाब भरे न भरे, भदभदा डैम के गेट खुलें न खुलें ; लेकिन कलियासोत डैम के गेट एडवांस में खुलेंगे ही खुलेंगे…बड़ा तालाब जब पूरा भर जाता है तो भदभदा के गेट खुलते हैं…बड़ा तालाब एफटीएल से 1 फुट खाली है, कलियासोत 9 फुट खाली है, बावजूद इसके आज मंगलवार को लगभग 3 घंटे पहले (3.30 pm) कलियासोत के 2 गेट खोल दिए गए…!! आप पूछेंगे कि ऐसा क्यों??? तो कई लोग कहते हैं, बल्कि यह एक अवधारणा (परसेप्शन) है कि भैंसाखेड़ी में बने चिरायु अस्पताल को एक्सपोज होने से बचाने के लिए यह किया जाता है…ताकि सरकार और अस्पताल की थू थू न हो!!! क्योंकि एक दो बार एडवांस में गेट खोलने में चूक होने से अस्पताल के भीतर तक पानी भर गया था…जाहिर है, पानी भरेगा तो कई सारे सवाल खड़े होंगे??? लिहाजा पहले ही गेट खोल दो, न पानी भरेगा न सवाल उठेंगे!!! कलियासोत के किनारे बसे लोग जाएं भाड़ में, उनकी क्या और कितनी तैयारी है, क्या फर्क पड़ता है??? सब बढ़िया तो चल रहा है, बस, भारत माता की जय तो ही बोलना है!!! तो बोलिए, भारत माता की जय!!! # डॉ. मोहन यादव # शिवराज सिंह चौहान # भोपाल

Rajesh chaturvedi

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