दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय के राज सदन में हरिशंकर परसाई जन्मशती समारोह के अवसर पर आयोजित व्यंग्य गोष्ठी में रचनाकारों ने अपनी व्यंग्य रचनाओं से श्रोताओं को गुदगुदाया

देश को हलवे से ज़्यादा रोटी की दरकार
आदमी को समय के प्रति ईमानदार होना चाहिए
जीवन का आखरी पडा़व आनंद होना चाहिए
दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय के राज सदन में हरिशंकर परसाई जन्मशती समारोह के अवसर पर आयोजित व्यंग्य गोष्ठी में रचनाकारों ने अपनी व्यंग्य रचनाओं से श्रोताओं को गुदगुदाया। इस गोष्ठी की अध्यक्ष श्री प्रियदर्शी खैरा जी थे, मुख्य अतिथि के रूप में श्री मलय जैन और सारस्वत अतिथि डॉक्टर साधना बलबटे थी। इस व्यंग्य गोष्ठी में श्री सुदर्शन सोनी ने साधने की कला, कमल किशोर दुबे ने शालीनता का अपहरण,यशवंत गोरे ने जूता एक काम अनेक
,विवेक रंजन श्रीवास्तव ने बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना और जयजीत अकलेचा ने हलवा सेरेमनी व्यंग्य रचना का पाठ किया।कार्यक्रम का बीज वक्तव्य श्री सुरेश पटवा ने दिया जिसमें उन्होंने परसाई जी के व्यक्तित्व – कृतित्व पर प्रकाश डाला। श्री राजेंद्र गट्टानी
के कुशल संचालन में यह व्यंग्य गोष्ठी सम्पन्न हुई। स्वागत वक्तव्य दुष्यंत संग्रहालय की सचिव करुणा राजुरकर ने दिया एवं आभार संग्रहालय ने अध्यक्ष श्री रामरावकर जी ने व्यक्त किया।
इस अवसर पर जयजीत अकलेचा ने हलवा सेरेमनी का पाठ करते हुए कहा कि देश को हलवे से ज़्यादा रोटी की जरूरत है।
कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि साधना सलवटें ने गुरू ,गूगल दोऊ खड़े का पाठ किया।मलय जैन ने दिल थाम लो भाई साहब सितंबर 2024 आने वाला है पढ़कर श्रोताओं की वाहवाही लूटी। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रियदर्शी खैरा ने आयोजन की समीक्षा करते हुए सभी व्यंग्य रचनाओं को सराहा।सुरेश पटवा ने अपने बीज वक्तव्य में बताया कि परसाई जी जड़वादी विचारों का समर्थन नहीं करते थे ।वे कहते थे आदमी को समय के प्रति ईमानदार होना चाहिए और जीवन के आखरी पड़ाव में आनंद और सिर्फ आनंद में जीना चाहिए।
