भोपाल मेट्रो के अंडरग्राउंड रूट पर सुनवाई आज
भोपाल में कब्रिस्तान के नीचे से मेट्रो के गुजरने को लेकर गुरुवार को वक्फ ट्रूब्नल में सुनवाई है। स्टे पर बहस के लिए आज की तारीख तय की गई है। इसमें मेट्रो प्रबंधन अपना पक्ष रखेगा।
बता दें कि मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर वक्फ संपत्तियों पर विवाद अब कानूनी हो गया है। भोपाल टॉकीज स्थित प्राचीन कब्रिस्तान के नीचे प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन और नारियलखेड़ा की वक्फ जमीन पर निर्माण के खिलाफ कमेटी इंतेजामियां औकाफ-ए-अम्मा ने मध्यप्रदेश राज्य वक्फ अधिकरण में दो अलग-अलग प्रकरण दायर किए हैं।
कमेटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अंसार उल हक और अधिवक्ता इब्राहिम सरवत शरीफ खान पैरवी कर रहे हैं। अधिवक्ता खान ने बताया कि दोनों मामलों में मेट्रो निर्माण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है। इसे लेकर दो सुनवाई हो चुकी है। अगली सुनवाई गुरुवार को होगी।
अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन पर यह विवाद
पहले प्रकरण में हमीदिया रोड स्थित मासूमा तकिया अम्मनशाह, मस्जिद नूरानी, मुल्लाशाह और अन्य पंजीकृत वक्फ कब्रिस्तान क्षेत्रों के नीचे से अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन निकालने की योजना पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई गई है। याचिका में कहा गया है कि यह कब्रिस्तान न केवल ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि शहर के सबसे पुराने और बड़े कब्रिस्तानों में शुमार है, जहां हजारों की संख्या में कब्रें मौजूद हैं।

कमेटी का दावा है कि प्रस्तावित मेट्रो लाइन से करीब एक एकड़ क्षेत्र सीधे प्रभावित हो सकता है, जिससे बड़ी संख्या में कब्रों के अस्तित्व और संरचना पर खतरा उत्पन्न होगा। यह भी आरोप लगाया गया है कि मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों ने अब तक इस क्षेत्र का विस्तृत नक्शा, तकनीकी रिपोर्ट या सुरक्षा आकलन सार्वजनिक नहीं किया है, जिससे आशंकाएं और बढ़ गई हैं।
अधिवक्ता खान का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट और अलग-अलग हाईकोर्ट के कई फैसलों में स्पष्ट किया गया है कि कब्रिस्तान की मूल प्रकृति (नयत) को किसी भी हालत में बदला नहीं जा सकता। उन्होंने दलील दी कि भले ही मेट्रो लाइन को अंडरग्राउंड बताया जा रहा हो, लेकिन कब्रिस्तान के नीचे खुदाई, सुरंग निर्माण और कंपन से वहां मौजूद कब्रों और धार्मिक ढांचों को नुकसान पहुंच सकता है।
नारियलखेड़ा: वक्फ जमीन पर ‘बिना अनुमति’ निर्माण का आरोप

दूसरा मामला नारियलखेड़ा स्थित वक्फ निशात अफजा (वाके बाग) की जमीन से जुड़ा है, जहां मेट्रो निर्माण कार्य को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। याचिका के अनुसार खसरा नंबर 88 की लगभग 11.93 हेक्टेयर भूमि वक्फ संपत्ति के रूप में विधिवत दर्ज हैं, जिसका पंजीयन वक्फ रजिस्टर में मौजूद है और राजपत्र में भी प्रकाशित किया जा चुका है।
कमेटी का दावा है कि इस जमीन का एक हिस्सा उनके प्रबंधन और नियंत्रण में है, बावजूद इसके मेट्रो कंपनी ने बिना अनुमति निर्माण कार्य शुरू कर दिया। वादी पक्ष ने आरोप लगाया है कि करीब 1.40 एकड़ वक्फ भूमि पर गड्ढे खोदकर पिलर निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
मौके पर भारी मशीनरी लगाकर सरिया डाला जा रहा है और बड़े पैमाने पर मिट्टी व निर्माण सामग्री का मलबा जमा किया गया है। कमेटी का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई न केवल वक्फ संपत्ति पर अतिक्रमण है, बल्कि इससे भूमि की मूल स्थिति को भी नुकसान पहुंच रहा है।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि मेट्रो कंपनी को कई बार लिखित रूप से नोटिस देकर निर्माण कार्य से संबंधित नक्शा, स्वीकृति और अधिग्रहण की जानकारी मांगी गई, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।

वक्फ अधिकरण से हस्तक्षेप की मांग दोनों मामलों में वक्फ अधिकरण से मांग की गई है कि विवादित स्थलों पर मेट्रो निर्माण कार्य तत्काल रोका जाए, अवैध निर्माण को हटाया जाए और वक्फ संपत्तियों की यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए जाएं। इसी पर शुक्रवार को सुनवाई हुई।

