मुनि संभव सागर महाराज का 28वां दीक्षा दिवस

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भोपाल में निर्यापक मुनि श्री संभव सागर महाराज का 28वां दीक्षा दिवस “गुरु उपकार दिवस” के रूप में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान, पिच्छिका परिवर्तन और नवनिर्मित छात्रावास के लोकार्पण जैसे कार्यक्रम आयोजित हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत आचार्य श्री विद्यासागर महाराज और आचार्य श्री समय सागर महाराज के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुई। इसमें समाज के वरिष्ठजन और मुनि श्री के गृहस्थ अवस्था के परिजनों ने सहभागिता करते हुए आचार्य परंपरा को नमन किया। पूरे आयोजन स्थल पर जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

पिच्छिका परिवर्तन और नवनिर्मित छात्रावास का लोकार्पण।
पिच्छिका परिवर्तन और नवनिर्मित छात्रावास का लोकार्पण।

नवीन छात्रावास का लोकार्पण, शिक्षा को मिलेगा संबल इस अवसर पर डॉ. श्रीकांत-आभा जैन परिवार द्वारा नवनिर्मित छात्रावास का लोकार्पण किया गया। समाज के विद्यार्थियों के लिए यह छात्रावास भविष्य में शिक्षा और संस्कार का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। शाहपुरा स्थित श्री पार्श्वनाथ जिनालय में भगवान पार्श्वनाथ का अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ विधिवत पूजन-अर्चन किया गया। मंदिर समिति अध्यक्ष दीप जैन, सचिव अमित मोदी और अन्य पदाधिकारियों ने पुण्यार्जक परिवारों का सम्मान कर उनके योगदान की सराहना की।

पिच्छिका परिवर्तन बना आस्था का केंद्र दीक्षा दिवस के अवसर पर मुनि संभव सागर महाराज का पिच्छिका परिवर्तन भी संपन्न हुआ। नवीन पिच्छिका अन्य मुनियों द्वारा भेंट की गई, जबकि पुरानी पिच्छिका संयम व्रत धारण करने वाले श्रावक को प्रदान की गई।

ब्रह्मचारी भाई-बहनों और त्यागी-व्रती जनों ने भी श्रद्धापूर्वक अपनी सहभागिता निभाई। अपने प्रवचन में मुनि संभव सागर महाराज ने कहा कि केवल वस्त्र त्यागना ही दीक्षा नहीं है, बल्कि भीतर के राग, द्वेष, मान और कषायों का पूर्ण त्याग ही सच्ची दीक्षा है। उन्होंने दिगंबर जीवन शैली को आत्मसंयम और वैराग्य का सर्वोच्च रूप बताया।

प्रदेशभर से पहुंचे श्रद्धालु, गणमान्य रहे उपस्थित इस आयोजन में प्रदेश के विभिन्न शहरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पूर्व आईपीएस ऋषभ दिवाकर, डिप्टी कलेक्टर सुधीर जैन, एआईजी मलय जैन, सेवानिवृत्त आईएफएस अतुल जैन सहित समाज के अनेक गणमान्य नागरिक और महिला मंडल की सदस्याएं भी कार्यक्रम में शामिल रहीं।

संयम और आध्यात्मिकता का दिया संदेश पूरे आयोजन में श्रद्धा, भक्ति और संयम का संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया। दीक्षा दिवस के अवसर पर कई श्रद्धालुओं ने अपने जीवन को संयममय बनाने का संकल्प भी लिया, जिससे कार्यक्रम ने सामाजिक और आध्यात्मिक दोनों स्तरों पर गहरा प्रभाव छोड़ा।

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