? अलविदा प्यारे दोस्त ?

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? अलविदा प्यारे दोस्त ?

 

” उदास न होना,

क्योंकि मैं साथ हूं ;

सामने न सही,

पर आसपास हूं ;

पलकें बंद कर जब भी दिल में देखोगे,

मैं हर पल तुम्हारे साथ हूं ”

 

यह एहसास दिलाते हुए चले गए अभिन्न मित्र नारायण बारेठ।

कोटा से जयपुर तक बरसों साथ निभाने वाले नारायण जी ने नियति के आगे विवश हो आखिरकार साथ छोड़ दिया।

फकत 68 बरस की उम्र में उन जैसे नेक और जिंदादिल इंसान का दुनिया से विदा हो जाना हम सबको भीतर तक हिला गया !

भाई नारायण जी ने कोटा में वकालत करते हुए स्थानीय दैनिक ‘जननायक’ में कोर्ट की रिपोर्टिंग करने के साथ करियर का श्रीगणेश किया। राष्ट्रदूत, पत्रिका और पायनियर के लिए भी रिपोर्टिंग की।‌

तब बहुत तंगहाली झेलने के बावजूद कभी किसी से कोई अनुचित लाभ नहीं लिया।

फिर कोटा व जोधपुर में नवभारत टाइम्स के कार्यालय संवाददाता और जयपुर में बीबीसी के संवाददाता के रूप में उनने जन सरोकारों से जुड़ी बेबाक पत्रकारिता की। साथ में राजस्थान पत्रकार संघ (जार) के नेता के रूप में भी उन्होंने पत्रकारों के कल्याण और पत्रकारिता के उन्नयन की दिशा में अग्रणी भूमिका निभाई।

इसके बाद हरदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में प्राध्यापक के रूप में सार्थक किरदार निभाया।

फिर राजस्थान के राज्य सूचना आयुक्त के तौर पर भी उनने सार्वजनिक क्रियाकलाप में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में योगदान दिया।

इस खुद्दार शख्स की लेखनी जितनी पैनी थी,

अंदाज ए बयां भी उतना ही दिलचस्प था।

हमेशा सबको गुदगुदाते, हंसाते और सटीक संदेश के तीर छोड़ते रहते थे।

 

‘जीवन कितना लंबा हो,

यह हमारे हाथ में नहीं है। लेकिन जीवन कैसा हो,

यह हमारे हाथ में है।’

इसे नारायणजी ने जी कर दिखाया।

1 महीने से अधिक समय तक जयपुर के अस्पताल में मौत से जूझने के बाद, 7 मार्च 2026 को वे हम सबको अलविदा कह गए।

 

बेहतरीन पत्रकार, अध्येता, साफगो, पारदर्शी और आदर्श इंसान के रूप में नारायण जी हम सबके लिए हमेशा अविस्मरणीय रहेंगे।

उन्हें भावपूरित श्रद्धांजलि?

Attamdeep

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