कैलाश विजयवर्गीय ने उमंग सिंघार से कहा – ”औकात में रहो…” बाद में बोले – ”मेरे सब्र का बांध अब टूट चुका है…”

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कैलाश विजयवर्गीय ने उमंग सिंघार से कहा – ”औकात में रहो…” बाद में बोले – ”मेरे सब्र का बांध अब टूट चुका है…”

मुख्यमंत्री तक को मांगनी पड़ी माफी…

नरेन्द्रसिंह तोमर को भी बोलना पड़ा… ”मुझे आज पटवा जी याद आ गए…”

हमेशा सुर्खियों में रहने वाले काबिना मंत्री कैलाश विजयवर्गीय एक बार फिर चर्चा में आ गए… इस बार उन्होंने विधानसभा में बजट सत्र के चौथे दिन तीखी बहस के दौरान उमंग सिंघार को यहां तक कह डाला कि ”औकात में रहो…” विजयवर्गीय के इतना कहते ही विपक्ष उन पर बरस पड़ा… खबर है कि यह बहस सिंघार ने आदाणी समूह और सरकार के बीच हुए समझौतों को लेकर शुरू की थी, जिस पर विजयवर्गीय ने कहा – प्रमाण पेश किए जाएं… इस पर सिंघार ने कहा कि उनके पास दस्तावेज हैं और वे सदन में प्रस्तुत भी कर देंगे… इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हो गई और गुस्से-गुस्से में कैलाश विजयवर्गीय ने उमंग सिंघार को कह दिया – ”औकात में रहो…” बाद में मामला बिगड़ता देख विजयवर्गीय ने दुःख भी जताया और कहा कि ”आज मैं अपने आप से ही संतुष्ट नहीं हूं… मेरे सब्र का बांध भी टूट चुका है… हम इस विधानसभा में पांच-दस सदस्य होंगे जो वरिष्ठ होंगे, लेकिन आज का दुःख है… मुझे पहली बार सदन में गुस्सा आया है… आज पता नहीं कैसे यह हो गया… उमंग की बॉडी लैंग्वेज सही नहीं थी, लेकिन उन्होंने ऐसा किया कि मुझे गुस्सा आ गया…” इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भी आगे आना पड़ा और उन्होंने भी कहा कि ”मैं सभी की तरफ से मांफी मांगता हूं…” इस पर नेता प्रतिपक्ष सिंघार के भी सुर नरम पड़े और कहा – ”हम आपके साथ हैं… विकास के लिए हम हमेशा तत्पर रहेंगे…” उधर, विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्रसिंह तोमर भी मामले को देखते हुए बोले – ”आज दुर्भाग्य से असहज स्थिति बन गई… दोनों पक्षों ने सदा अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन आज मुझे पटवा जी की वो बात याद आती है कि गुस्सा दिखे, लेकिन गुस्सा शब्दों में दिखाई ना दे…”

विजयवर्गीय को लेकर सियासी चर्चा फिर हो गई तेज…

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के सब्र का बांध टूटना… मुख्यमंत्री मोहन यादव का माफी मांगना और विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्रसिंह तोमर को पटवा जी की बात याद आना… इन सब बातों से इंदौर सहित प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर फिर शुरू हो गया… दबे स्वर में यह भी पूछा जा रहा है कि आखिर ऐसी कौन-सी कसक है जिसे विजयवर्गीय पचा नहीं पा रहे और अनेक मौकों पर वह बार-बार शब्दों के जरिए निकलकर सामने आ रही..?

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