गैर भाजपा शासित राज्यों में शिवराज की ‘मामा’ वाली इमेज से महिला वोटर्स पर टारगेट

मध्यप्रदेश की 29 लोकसभा सीटों पर चार चरणों में हुए मतदान के बाद सीएम डॉ. मोहन यादव दूसरे राज्यों की सीटों पर प्रचार के लिए गए। डॉ. मोहन यादव ने 14 दिनों में 7 राज्यों की 25 लोकसभा सीटों पर प्रचार किया।
दैनिक भास्कर जब पड़ताल की तो पाया कि 25 लोकसभा सीटों में से 10 लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां यादव वोटर्स चुनाव नतीजे को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। ये सभी सीटें यूपी की है। सीएम यादव ने अपनी सभाओं में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर परिवारवाद के बहाने हमला बोला।
ये भी कहा कि साधारण परिवार से आने वाले व्यक्ति को बीजेपी ने मुख्यमंत्री बनाया है। दूसरी तरफ बीजेपी ने पूर्व सीएम शिवराज की मामा वाली छवि को महिला वोटर्स के बीच भुनाने की पूरी कोशिश की है। जानिए बीजेपी ने किस तरह से सीएम और पूर्व सीएम का इस चुनाव प्रचार में इस्तेमाल किया है…

अब जानिए सीएम यादव के चुनावी दौरे के सियासी समीकरण
सीएम डॉ. मोहन यादव ने सबसे ज्यादा यूपी की 10 सीटों पर प्रचार किया। इनमें समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के परिवार की परंपरागत सीट आजमगढ़ से लेकर एमपी से सटे बुंदेलखंड की दो यादव बहुल सीटें हमीरपुर और झांसी भी शामिल रही।
इनके अलावा वे सीटें जहां यादव वोटर्स चुनाव पर असर डालते हैं, उनमें गाजीपुर, बलिया, कुशीनगर, जौनपुर, महाराजगंज और श्रावस्ती में भी प्रचार किया। सीएम ने बिहार की यादव बहुल पाटलीपुत्र लोकसभा में प्रचार किया। अंतिम चरण के चुनाव प्रचार के आखिरी दिन झारखंड और पंजाब में प्रचार करने पहुंचे।

समझिए हर सीट की समीकरण
1. हमीरपुर: एमपी के बुंदेलखंड से सटे हमीरपुर में लोधी वोटर्स निर्णायक हैं। इसी लोकसभा क्षेत्र में आने वाली चरखारी विधानसभा से पूर्व सीएम उमा भारती 2012 में विधायक चुनी जा चुकी हैं। बीजेपी से ठाकुर, सपा-कांग्रेस गठबंधन ने लोधी और बसपा ने ब्राह्मण को उतारा है। ऐसे में यादव वोटर्स इस सीट पर निर्णायक हैं।
2. झांसी: एमपी के बुंदेलखंड और चंबल के इलाके से सटी इस सीट पर बीजेपी का कब्जा है, लेकिन यहां यादव वोटर्स निर्णायक हैं। सपा नेता डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव झांसी से सांसद रह चुके हैं। इस सीट पर सपा-कांग्रेस गठबंधन की ओर से पूर्व सांसद प्रदीप जैन उम्मीदवार हैं। भाजपा ने मौजूदा सांसद अनुराग शर्मा और बसपा ने कुशवाहा को उतारा है।
3. गाजीपुर: यादव वोटर्स के प्रभाव वाले गाजीपुर लोकसभा क्षेत्र में कुल पांच विधानसभा क्षेत्र हैं। इनमें से चार विधानसभा सीटें समाजवादी पार्टी के कब्जे में हैं। एक पर बसपा का कब्जा है। इस सीट पर बसपा के अफजाल अंसारी सांसद हैं।
4. बलिया: यहां सबसे बड़ी आबादी ब्राह्मणों की है। यहां करीब तीन लाख ब्राह्मण हैं। इसके बाद करीब ढाई लाख यादव हैं। बीजेपी ने मौजूदा सांसद वीरेंद्र सिंह का टिकट काटकर राजपूत वर्ग के नीरज शेखर पर दांव खेला है। बसपा से लल्लन सिंह यादव और सपा से सनातन पांडे चुनाव लड़ रहे हैं।
5. कुशीनगर: जातीय समीकरण की बात करें तो यह क्षेत्र ब्राह्मण, यादव, मुस्लिम और कुशवाहा बहुल माना जाता है। यहां 8 फीसदी यादव वोटर हैं। भाजपा से विजय कुमार दुबे दूसरी बार उम्मीदवार हैं। INDIA गठबंधन की ओर से अजय प्रताप सिंह पिंटू को प्रत्याशी बनाया गया है। राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी से पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या ताल ठोक रहे हैं।

6. जौनपुर: यहां के जातीय समीकरण देखें तो दलित, मुस्लिम, यादव, ठाकुर और ब्राह्मण वोटर निर्णायक हैं। इनमें सबसे ज्यादा तीन लाख दलित वोटर हैं, दूसरे नंबर पर ब्राह्मण, मुस्लिम और यादव आते हैं जो करीब ढाई-ढाई लाख हैं। भाजपा ने महाराष्ट्र के गृह राज्यमंत्री रह चुके कृपाशंकर सिंह को उतारा है। बीएसपी से श्याम सिंह यादव और सपा के टिकट पर बाबू सिंह कुशवाहा मैदान में हैं।
7. आजमगढ़: पिछले 20 लोकसभा चुनावों में से 17 इलेक्शन में M-Y यानी मुस्लिम -यादव की जुगलबंदी से सांसद चुने गए। इस सीट पर यादव आबादी 21 फीसदी और मुस्लिम 17 फीसदी है। यहां भाजपा ने पारसनाथ राय को उतारा है। 2022 उपचुनाव के दो प्रतिद्वंद्वी दिनेश लाल यादव निरहुआ और सपा से धर्मेंद्र यादव इस बार फिर आमने-सामने हैं।
8. महाराजगंज: यूपी की महाराजगंज लोकसभा सीट पर सबसे ज्यादा 18 फीसदी एससी आबादी है। इस सीट पर नौ प्रतिशत यादव हैं। महाराजगंज ये केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी भाजपा के प्रत्याशी हैं। वहीं INDIA गठबंधन से वीरेंद्र चौधरी उम्मीदवार हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की बरगदवा कस्बे में सभा के जरिए यादव मतदाताओं को भाजपा के पक्ष में लाने की कोशिश की गई है।
9. श्रावस्ती: यूपी की श्रावस्ती लोकसभा सीट से बीजेपी ने अयोध्या रामजन्म भूमि निर्माण समिति के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व प्रधान सचिव नृपेन्द्र मिश्रा के बेटे साकेत मिश्रा को उम्मीदवार बनाया है। ब्राह्मण बहुल श्रावस्ती लोकसभा बौद्ध और जैन तीर्थों के लिए प्रसिद्ध है। इस सीट पर 20 फीसदी मुस्लिम और 15 प्रतिशत यादव वोटर हैं।
10. वाराणसी: CM डॉ. मोहन यादव ने वाराणसी लोकसभा क्षेत्र के सीर गोवर्धनपुर रोहनिया में जनसभा को संबोधित किया। शाम को मालवीय रमन गांव के मथगरवां घाट में स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल हुए। काशी के श्री कालभैरव मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर और गोवर्धन धाम मंदिर घाट पहुंचे। रात को वाराणसी लोकसभा के केन्द्रीय चुनाव कार्यालय में पहुंचकर भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ चर्चा की। वाराणसी से पीएम नरेंद्र मोदी लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं।

बिहार : यहां भी यादव फैक्टर पर असर डालने की कोशिश
सीएम डॉ. मोहन यादव ने अंतिम दौर के चुनाव प्रचार में बिहार की दो लोकसभा सीटों पाटलिपुत्र और पटना साहिब में प्रचार किया। पाटलिपुत्र में जनसभा के दौरान रामकृपाल यादव और पटना साहिब सीट पर रविशंकर प्रसाद के लिए वोट मांगे।
हरियाणा : गैर जाट वोटर्स को साधने की जिम्मेदारी
डॉ. मोहन यादव ने हरियाणा की रोहतक सीट पर भी प्रचार किया। 1962 में जनसंघ की जीत के बाद साल 2019 में भाजपा ने पहली बार जाट बहुल यह सीट जीती थी। हुड्डा परिवार और जाटों के प्रभाव वाली इस सीट पर गैर जाट वोटरों को साधने मुख्यमंत्री डॉ. यादव की चुनावी सभाएं हुईं। हरियाणा के सीएम रहे भूपेंदर सिंह हुड्डा इस सीट से चार बार सांसद रह चुके हैं।
महाराष्ट्र : 3 सीटों के लिए प्रचार, शोभायात्रा में शामिल हुए
सीएम ने महाराष्ट में तीन लोकसभा सीटों मुंबई साउथ, साउथ सेंट्रल और मुंबई साउथ में प्रचार किया। सीएम ने मुंबई साउथ लोकसभा क्षेत्र में महाराष्ट्र प्रदेश भाजपा कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
मुंबई साउथ सेंट्रल लोकसभा सीट पर आयोजित शोभा यात्रा में शामिल हुए। मुंबई साउथ लोकसभा क्षेत्र में आयोजित समरूप सभा को संबोधित किया।
गैर भाजपा शासित राज्य दिल्ली, झारखंड, पंजाब में भी उपयोग
डॉ. मोहन यादव ने गैर भाजपा शासित राज्यों दिल्ली, झारखंड और पंजाब में सभाएं कीं। दिल्ली में पश्चिमी दिल्ली, उत्तर पश्चिम दिल्ली, नई दिल्ली, नॉर्थ ईस्ट दिल्ली, साउथ दिल्ली के अलावा झारखंड की दो लोकसभा सीट हजारीबाग, कोड़रमा में बीजेपी प्रत्याशियों के लिए वोट मांगने पहुंचे। प्रचार के अंतिम दिन झारखंड की राजमहल और दुमका लोकसभा क्षेत्र में जनसभाएं कीं। पंजाब की जालंधर लोकसभा सीट पर प्रचार किया।

अंतिम चरण में दक्षिण भारत में एंट्री
लोकसभा चुनाव के आखिरी 7वें चरण के चुनाव प्रचार डॉ. मोहन यादव दक्षिण भारत के राज्यों में प्रचार के लिए पहुंचे। 24 मई को उन्होंने तेलंगाना के हनुमाकोंडा जिले के डी कनवेंशन हॉल हंटर रोड में जनसभा को संबोधित किया।

अब सीएम के भाषणों से समझिए कैसे यादव वोटर्स को साधने की कोशिश की
बिहार की पाटलिपुत्र लोकसभा में भाजपा प्रत्याशी रामकृपाल यादव के समर्थन में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम डॉ. यादव ने कहा कि अपने देश के सभी राज्यों की अपनी-अपनी पहचान है, एक मात्र राज्य बिहार है, जिसका नाम भगवान श्रीकृष्ण के नाम पर है, वृंदावन बिहारी लाल की जय। कांग्रेस सहित जितने परिवारवादी लोग हैं, इन्हें जब कहीं भी कोई बड़ा पद मिलेगा तो इनके परिवार के सदस्य को मिलेगा।

एक्सपर्ट बोले- SP-RJD के MY फैक्टर की काट की कोशिश
वरिष्ठ पत्रकार रंजन श्रीवास्तव कहते हैं- “मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपनी पार्टी के प्रचार के लिए लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश और बिहार के उन क्षेत्रों में गए, जहां यादव मतदाता निर्णायक फैक्टर हैं।
जब मोहन यादव को भाजपा ने मुख्यमंत्री के लिए चुना था तभी यह बात आई थी कि उन्हें यादव मतदाताओं को रिझाने के लिए उत्तर प्रदेश और बिहार की सीटों पर भेजा जा सकता है। इसके जरिए बीजेपी की कोशिश समाजवादी पार्टी, आरजेडी के M-Y फैक्टर को मात देना है। भाजपा कहां तक कामयाब होंगे ये देखने वाली बात होगी।

मामा वाली इमेज से कनेक्ट करने की कोशिश
शिवराज सिंह चौहान को पार्टी ने गैर भाजपा शासित राज्य पश्चिम बंगाल, झारखंड, दिल्ली में प्रचार के लिए भेजा। शिवराज ने पश्चिम बंगाल की सभाओं में महिला उत्पीड़न और करप्शन के मुद्दे पर ममता बनर्जी पर हमला बोला।
पश्चिम बंगाल की सभाओं में शिवराज महिलाओं और बच्चों से मिले। यानी बीजेपी ने शिवराज की मप्र में मामा वाली इमेज को बंगाल में भुनाने की कोशिश की है। शिवराज ने 6 दिनों में 3 राज्यों पश्चिम बंगाल, दिल्ली और झारखंड की 18 सीटों पर प्रचार किया।
दिल्ली में आठ लोकसभा क्षेत्रों में वे पहुंचे, जहां शिवराज ने युवा सम्मेलन, दलित सम्मेलनों को संबोधित कर भाजपा सरकार में हुए विकास और आम आदमी पार्टी की सरकार में हुए करप्शन को मुद्दा बनाया।

एक्सपर्ट ने कहा- शिवराज को वहां भेजा जहां बीजेपी नहीं
वरिष्ठ पत्रकार रंजन श्रीवास्तव कहते हैं कि शिवराज सिंह चौहान को पार्टी ने उन क्षेत्रों में भेजा जहां भाजपा सरकार में नहीं हैं। वहां शिवराज सिंह चौहान पहले भी दौरे करते रहे हैं उनका एक जनाधार भी है। पार्टी ने दोनों लीडर्स को अलग-अलग क्षेत्रों में भेजकर इस बात की कोशिश की है कि दस साल बाद यदि कहीं कोई नाराजगी है कोई खास वर्ग रुठ रहा है, तो उसे मनाया जा सके।

