चुनाव का सियासी मुद्दा बना ओबीसी आरक्षण
24 के चुनावी संग्राम में आरक्षण भी एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है..विपक्ष जहां बीजेपी पर आरक्षण खत्म करने का आरोप लगा रहा है तो बीजेपी धर्म के आधार पर दिए जा रहे आरक्षण का विरोध कर रही है..उसके इस आरोप को पश्चिम बंगाल हाईकोर्ट के उस आदेश से बल मिला ,जिसमें वहां साल 2010 के बाद बनाए गए 5 लाख ओबीसी प्रमाण पत्रों को अमान्य कर दिया..बीजेपी एक बार फिर कांग्रेस व उसके सहयोगी दलों के फैसलों को लेकर हमलावर हैं..कितना सही है धर्म के आधार पर आरक्षण..?
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव उत्तरप्रदेश के चुनावी दौरे पर हैं..डॉ यादव ने वहां एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस व उसके गठबंधन वाले सहयोगी दलों पर निशाना साधते हुए धर्म के आधार पर आरक्षण दिए जाने का आरोप लगाया..डॉ यादव ने कर्नाटक की कांग्रेस नीति सरकार के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि वहां गरीबों,आदिवासियों के आरक्षण में कटौती कर एक वर्ग विशेष के लोगों का आरक्षण का लाभ दे दिया गया..सीएम ने कहा कि आरक्षण को खत्म करने का काम तो कांग्रेस कर रही है..उनके इस आरोप को तब बल मिला जब गुरुवार को ही पश्चिम बंगाल हाईकोर्ट ने वहां की ममता सरकार के उसे फैसले को पलट दिया,जिसके तहत साल 2011 के बाद करीब पांच लाख लोगों को ओबीसी के प्रमाण पत्र दिए गए..न्यायालय ने कहा कि यह प्रमाण पत्र बिना नियम जारी किए गए जो असंवैधानिक हैं..
कोर्ट के बाद इंडी गठबंधन की प्रमुख सहयोगी टीएमसी चीफ ममता बनर्जी बीजेपी पर हमलावर है व कोर्ट के फैसले को मानने से इंकार कर रही है..ममता के इस बयान पर मप्र बीजेपी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है..यानी धर्म के आधार पर आरक्षण दिए जाने का मामला सरगर्म है..चुनाव 4 जून को नतीजे आने के साथ खत्म होंगे..लेकिन धर्म के आधार पर आरक्षण का यह फैसला ओबीसी वर्ग के मूल लोगों को आगे भी सालता रहेगा..आरक्षण की यह सियासत क्या गुल खिलाएगी..यह भविष्य के गर्त में है..
क्या है धर्म आधारित आरक्षण
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार व पश्चिम बंगाल की ममता सरकार ने मुस्लिमों की समूची जातियों को ओबीसी वर्ग में शामिल कर आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है..इनमें अगड़े माने जाने वाले शेख,पठान,सैययद भी शाामिल हैं.. मप्र समेत अन्य राज्यों में मुस्लिमों की केवल पसमांदा कही जाने वाली गरीब जातियों को ही ओबीसी माना गया है…बीजेपी इस आरक्षण को धर्म के आधार पर बताकर इसका विरोध कर रही है..उसका मानना है कि यह ओबीसी वर्ग के मूल लोगों के हितों पर कुठाराघात है…
