दोस्त ने बहन से अफेयर का राज खोला तो उसे मौत के घाट उतारा; हकलाने से खुलासा हुआ

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तारीख 17 मई। वक्त शाम के 6 बजे। खरगोन जिले के सिराली गांव के रहने वाले पूनमचंद घर के बरामदे में बैठे थे, तभी उनके मोबाइल की रिंग बजी। कॉल सनावद में बीए सेकेंड ईयर की पढ़ाई कर रहे बड़े बेटे पंकज किरोड़े गुर्जर का था। पंकज ने पूनमचंद को कहा कि पापा मैं आज घर आ रहा हूं। पंकज और पूनमचंद के बीच ये आखिरी बातचीत थी। इसके चार दिन बाद उसकी लाश ही घर आई।

पंकज की हत्या कर उसकी लाश को खंडवा जिले के भैरूखेड़ा के जंगल में एक गड्ढे में दबाया गया था। पुलिस ने जब मामले की तफ्तीश की तो हत्यारा कोई और नहीं, बल्कि उसका दोस्त ही निकला। वह चार दिन से परिवार के साथ पंकज को ढूंढने का नाटक करता रहा।

परिवार के साथ गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाने थाने भी जा रहा था। पुलिस ने अगले दिन जब उसे थाने पूछताछ के लिए बुलाया तो उसकी बातों से पुलिस को उसी पर शक हुआ और इस मर्डर का पर्दाफाश हो गया। पूछताछ में उसने जो खुलासा किया उसे सुनकर परिवार के लोगों के साथ पुलिस भी सन्न रह गई।

खरगोन के रहने वाले 22 साल के छात्र पंकज के मर्डर की क्या वजह थी, आरोपी दोस्त परिवार के साथ उसे तलाशने का नाटक क्यों कर रहा था। थाने में उसने ऐसा क्या कहा कि मर्डर का खुलासा हो गया? पढ़ें बीए स्टूडेंट के मर्डर की इनसाइड स्टोरी…

पुलिस ने मृतक पंकज की लाश को खंडवा-खरगोन सीमा पर स्थित भैरूखेड़ा के जंगल से बरामद किया।
पुलिस ने मृतक पंकज की लाश को खंडवा-खरगोन सीमा पर स्थित भैरूखेड़ा के जंगल से बरामद किया।

मां खाना बनाकर बेटे के लौटने का इंतजार करती रही

खेती-किसानी करने वाले पूनमचंद के दो बेटों में बड़ा बेटा पंकज करोड़े गुर्जर (22) सनावद स्थित आरएनटी कॉलेज से बीए की पढ़ाई कर रहा था। सनावद में ही किराए का कमरा लेकर रह रहा था।

17 मई की शाम उसने घर आने की सूचना दी थी। मां सुनीता खाना बनाकर बेटे के आने का इंतजार करने लगी। रात 10 बजे तक जब वह नहीं लौटा तो पिता ने उसके मोबाइल नंबर 8815302403 पर कॉल किया, लेकिन वह बंद था। मां-बाप देर रात तक उसके घर लौटने का इंतजार करते रहे ।

सिराली गांव में पंकज का मकान। उसके पिता पूनमचंद किसान हैं।
सिराली गांव में पंकज का मकान। उसके पिता पूनमचंद किसान हैं।

पंकज का दोस्त प्रदीप बोला- वह वापस सनावद लौट गया

इसके बाद पूनमचंद ने बेटे के दोस्तों को कॉल किया। बेटे के दोस्त दीपक पिता हुकुम सिंह चौहान ने बताया कि उसकी 9.30 बजे पंकज से बात हुई थी। तब पंकज ने बताया था कि प्रदीप व लालू उसे रिसीव करने के लिए दौड़वा आ चुके हैं। हम दौड़वा में पेट्रोल पंप पर पेट्रोल डलवा रहे हैं।

दरअसल, सनावद से दौड़वा तक ही बस चलती है। दौड़वा से सिराली गांव की दूरी लगभग 10 किमी है। इस सूचना पर पूनमचंद प्रदीप के घर पहुंचे, लेकिन वह नहीं मिला। घरवालों से पता चला कि वह अभी नहीं लौटा है।

अगले दिन प्रदीप घर लौटा। पूनमचंद पूछने गए तो उसने बताया कि पंकज मेरी बाइक लेकर किसी से पैसे लेने का बोल कर गया था। कुछ देर बाद उसने मैसेज कर बताया कि उसकी बाइक वाइन शॉप के पास खड़ी कर दी है। तुम बाइक लेकर चले जाना। मैं वापस सनावद जा रहा हूं, तो हम बाइक लेकर घर आ गए।

गुमराह करने के लिए आरोपी ने पंकज बन मां सुनीता को किया था कॉल

आरोपी प्रदीप को एहसास हुआ कि पंकज के मां-बाप उसे शिद्दत से तलाश रहे हैं, तो उसने उन्हें गुमराह करने की कोशिश की। प्रदीप ने पंकज बनकर उसकी मां सुनीता को 18 मई की दोपहर कॉल किया। जैसे ही उसने संबोधन में मम्मी बोला, तो सुनीता को संदेह हो गया कि ये उसका बेटा नहीं है।

सुनीता ने उससे कहा भी कि तुम पंकज नहीं बोल रहे हो, तुम्हारी आवाज बदली हुई आ रही है, तो पंकज बनकर बात कर रहा प्रदीप बोला कि गले में छाले पड़ गए हैं। इस पर भी मां सुनीता को संदेह हुआ। दरअसल, 15 मई को ही पंकज घर से सनावद गया था, तब उसका गला ठीक था।

16 तारीख को भी सुनीता की बेटे पंकज से बात हुई, तब भी वह ठीक था। उन्होंने ये बात पति पूनमचंद को बताई। पूनमचंद को शक हो गया कि उनके बेटे के साथ कोई अनहोनी हुई है, इसलिए 18 मई की देर रात उन्होंने भीकनगांव थाने पहुंचकर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।

अब जानिए कैसे हुआ पंकज की हत्या का खुलासा, क्या रही वजह

पंकज की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस ने पूनमचंद से पूरा घटनाक्रम समझा। इस दौरान ये भी पता चला कि पंकज को लेने के लिए प्रदीप दौड़वा गांव गया था। वहां उसे पंकज भी मिला था। पुलिस को पंकज के वापस सनावद लौटने की बात पर शक था।

पुलिस ने जब प्रदीप से गहराई से पूछताछ की तो वह हकलाने लगा। उसके चेहरे से पसीना टपकने लगा। इस पर पुलिस का संदेह और ज्यादा बढ़ गया। इसके बाद वह अलग-अलग कहानी सुनाने लगा। 19 मई को प्रदीप पूरे दिन पुलिस को अपने बयान में उलझाता रहा। इसके बाद पुलिस ने जब सख्ती दिखाई तो वह टूट गया। उसने पंकज की हत्या का खुलासा कर दिया।

गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करने के कुछ ही घंटे बाद पुलिस को शक हो गया था कि प्रदीप इस मामले का मास्टरमाइंड है।
गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करने के कुछ ही घंटे बाद पुलिस को शक हो गया था कि प्रदीप इस मामले का मास्टरमाइंड है।

हत्या की वजह : प्रदीप की शादीशुदा प्रेमिका के पति को पंकज ने दोनों के संबंध के बारे में बताया था

पुलिस पूछताछ में प्रदीप ने बताया कि सिराली गांव की रहने वाली एक युवती से उसका प्रेम प्रसंग है। युवती की शादी हाे चुकी है। पंकज उसे मुंह बोली बहन कहता था। पंकज ने मेरे संबंधों के बारे में युवती के पति को बता दिया था। इसकी वजह से युवती और उसके पति के संबंध खराब हो गए थे। वह युवती को मायके जाने नहीं देता था।

अब जानिए कैसे की हत्या…

दूसरी गर्लफ्रेंड से मिलाने के लिए भैरूखेड़ा के जंगल ले गया

पंकज सनावद से 17 मई की रात 9 बजे के लगभग दौड़वा गांव पहुंच गया था। यहां प्रदीप व लालू पहले से बाइक लेकर मौजूद थे। प्रदीप ने लालू को दौड़वा गांव में छोड़ा और पंकज को साथ लेकर बाइक से निकल गया। उसने लालू को बोला था कि वह कुछ देर में लौट आएगा।

इसके बाद दोनों दौड़वा गांव स्थित पंप से पेट्रोल भरवाने के बाद निकल गए। प्रदीप ने पंकज को कहा कि अमौदा में उसकी नई गर्लफ्रेंड है। वह उसे मिलने भैरूखेड़ा के जंगल आ रही है। दोनों भैरूखेड़ा की ओर निकले। रास्ते में दोनों ने शराब पी।

प्लान के मुताबिक प्रदीप ने खुद कम शराब पी और पंकज को ज्यादा पिलाई। इसके बाद दोनों भैरूखेड़ा रोड से लगे जंगल में पहुंचे। वहां प्रदीप ने सबसे पहले पंकज का मोबाइल स्विच ऑफ किया। दोनों यहां भी शराब पीते रहे।

जब पंकज पूरी तरह से शराब के नशे में डूब गया और उसे होश नहीं रहा तो 1 बजे के लगभग प्रदीप ने अचानक उसके सिर पर पत्थर से वार कर दिया। वह तब तक वार करता रहा, जब तक उसकी मौत न हो गई।

30 मई को था जन्मदिन, पार्ट टाइम काम भी करता था पंकज

पिता पूनमचंद ने बताया कि उनका बेटा पंकज पढ़ाई के साथ सनावद में एक बीज दुकान में पार्ट टाइम काम भी करता था। वह अपनी पढ़ाई के साथ-साथ घर का भी खर्च उठा रहा था। उसकी हत्या से पूरा परिवार आक्रोशित है।

मां सुनीता ने आक्रोशित होकर कहा कि हत्या का बदला मौत के रूप में चाहिए। पुलिस आरोपी को फांसी पर चढ़ा दे, तभी उसके दिल को सुकून मिलेगा। सुनीता ने बताया कि उनके बेटे पंकज का 30 मई को जन्मदिन था, पर इससे पहले ही आरोपियों ने मेरे लाल को छीन लिया।

बड़े भाई को मुखाग्नि देने वाला चंदन बोला- आरोपी अकेला नहीं हो सकता

पंकज के भाई चंदन का दावा है कि अकेले प्रदीप उसके भाई की हत्या नहीं कर सकता है। उसकी हत्या में प्रदीप का साथी लालू भी शामिल था। हालांकि, भीकनगांव पुलिस का दावा है कि लालू की इसमें मिलीभगत सामने नहीं आई है। पुलिस ने लालू को पूछताछ के बाद छोड़ दिया है।

चंदन के मुताबिक भाई पंकज को 15 मई को वह दौड़वा तक बाइक से छोड़ने गया था, तब पंकज ने बोला था कि 16 को वह लौट आएगा। पर किसी काम में वह फंस गया और 17 को सनावद से घर के लिए निकला था।

आरोपी दो भाइयों में सबसे बड़ा, पिता की किराना दुकान

आरोपी प्रदीप भी दो भाइयों में सबसे बड़ा है। पिता इंदर खेती करने के साथ घर में किराना की दुकान भी चलाते हैं। पंकज के परिजन का आरोप है कि इंदर किराना की दुकान की आड़ में शराब भी बेचता है।

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खंडवा में खरगोन के छात्र की उसके ही दोस्त ने हत्या कर दी और शव को जंगल में गाड़ दिया। छात्र 18 मई से लापता था। सोमवार को पुलिस ने इस मामले का खुलासा कर दिया है। साथ ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। दोपहर में उसकी निशानदेही पर मृतक के शव को गड्‌ढे से निकाला गया।

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