डॉ. मोहन यादव जी के नाम एक सीधा पत्र

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डॉ. मोहन यादव जी के नाम एक सीधा पत्र

(एक शुभचिंतक की ओर से)

माननीय डॉ. मोहन यादव जी,
सादर नमस्कार।

आप उस वर्ग से आते हैं, जहाँ जीवन का हर कदम संघर्ष से भरा होता है। मध्यमवर्गीय परिवार की जड़ें जितनी गहरी होती हैं, उतनी ही मजबूत होती है उनकी समझ और संवेदना। आपका राजनीतिक सफर भी उसी मिट्टी से निकला है जहाँ मेहनत ही पहचान बनती है, और लोगों के दुख-दर्द को महसूस करना ही राजनीति का असली अर्थ होता है।

आप गरीब का दर्द जानते हैं, क्योंकि आपने वो जिंदगी खुद जिया है।पर अफ़सोस, आज आपके आस-पास ऐसे अधिकारी और सलाहकार हैं जो उस दर्द को नहीं, बल्कि सत्ता के सुख को समझते हैं।जो जनता से दूरी बनाकर रखते हैं, पर आपकी छवि के पीछे “संपर्क” का मुखौटा लगाए बैठे हैं।

डॉ. साहब, आपने हमेशा अपनी सहजता से
हर विरोधी को अवसर दिया। आपने यह दिखाया कि राजनीति में द्वेष नहीं, अवसर की भावना होनी चाहिए। पर शायद आपने यह नहीं देखा कि कई वही चेहरे, जो कल आपके विरोधी थे, आज आपके पास बैठकर मुस्करा रहे हैं पर भीतर से वही हैं, जिन्होंने पहले आपकी छवि को कमजोर किया था।

आज आपकी लोकप्रियता में जो गिरावट दिख रही है,
वो जनता की नज़र में आपकी नहीं, बल्कि आपके आसपास बैठे लोगों की नीयत की नाकामी है।जनसंपर्क विभाग, जो आपकी आवाज़ जनता तक पहुँचाने का माध्यम होना चाहिए था, वो अब सिर्फ कुछ चापलूस अफसरों का अड्डा बन गया है। यहाँ रिपोर्टें बनती हैं, लेकिन जनता तक सच्चाई नहीं पहुँचती। मुख्यालय की दीवारों पर लिखा “जनसम्पर्क”काले बैकग्राउंड में सफेद अक्षरों में चमकता जरूर है, पर भीतर का मन उतना ही अंधकारमय है।

सच कहूँ तो अब वक्त आ गया है कि आप सख्त निर्णय लें। जनसम्पर्क और सलाहकार मंडल दोनों को नये सिरे से देखें। 2020 के बाद जिन सच्चे और कर्मठ अधिकारियों को किनारे किया गया, उन्हें फिर से मौका दीजिए क्योंकि वही आपके असली सहयोगी साबित हो सकते हैं।

डॉ. साहब, आज की राजनीति सोशल मीडिया या प्रचार से नहीं चलती, अब यह एआई और पारदर्शिता का जमाना है। जनता अब आँखों से नहीं, दिल से नेता को परखती है। आपमें वो क्षमता है कि आप अपनी सच्चाई और ईमानदारी से फिर से जनता के दिल में जगह बना सकते हैं, बस अपने चारों ओर बैठे नकली चापलूसों को पहचानिए।

आपके तीन साल का कार्यकाल अभी बाकी है, लेकिन समय हाथ से फिसलने में देर नहीं लगती। आपके हर निर्णय पर जनता की निगाह है, और आपके शुभचिंतक उम्मीद करते हैं कि आप सच्चे, पारदर्शी और ज़मीन से जुड़े वो मोहन यादव बनकर सामने आएँगे, जिसे जनता ने अपना नेता कहा था।

सादर,
एक शुभचिंतक
भाजपा विरोधी
कलमकार

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