जब एक छात्रा अपनी हिम्मत से कुछ गलत के खिलाफ बोलती है, तो व्यवस्था कैसे उसके मुंह पर तमाचा मारती है।
यह घटना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है बल्कि यह भी दिखाती है कि जब एक छात्रा अपनी हिम्मत से कुछ गलत के खिलाफ बोलती है, तो व्यवस्था कैसे उसके मुंह पर तमाचा मारती है।
सीधी छात्रावास में शर्मनाक बर्बरता: छात्रा ने खराब भोजन की शिकायत की, वार्डन ने पीट-पीटकर बेहोश किया
सीधी कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास, सीधी में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ वार्डन की हैवानियत का शिकार एक बारहवीं कक्षा की छात्रा को होना पड़ा। छात्रा ने जब खराब खाने को लेकर आपत्ति जताई, तो वार्डन ने न सिर्फ उसे डांटा बल्कि बेरहमी से पीट-पीटकर अधमरा कर दिया।
जानकारी के अनुसार, घटना सीधी जिले के अमिलिया क्षेत्र की है, जहाँ छात्रावास में रह रही छात्रा अंजू प्रजापति ने भोजन की गुणवत्ता को लेकर आपत्ति जताई थी। इस पर वार्डन उर्मिला पटेल इस कदर आगबबूला हो गईं कि उन्होंने छात्रा को मारना शुरू कर दिया। छात्रा को बुरी तरह पीटा गया, जिससे वह मौके पर ही बेहोश हो गई।
घायल छात्रा को गंभीर हालत में अमिलिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उसका इलाज जारी है।
मामले में प्रशासन की चुप्पी, जिम्मेदार कौन?
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि घटना सामने आने के बावजूद अब तक जिम्मेदार वार्डन के खिलाफ कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं हुई है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
बड़ा सवाल: आखिर कब तक चलेगा छात्रावासों में ऐसा अमानवीय व्यवहार?
यह पहली बार नहीं है जब छात्रावासों में बच्चों के साथ दुर्व्यवहार या मारपीट की खबरें आई हों। लेकिन प्रशासन की निष्क्रियता इन घटनाओं को बढ़ावा देती है।
यदि कोई बच्ची खराब खाना मिलने पर अपनी आवाज उठाती है, तो क्या उसका जवाब लात-घूंसे होना चाहिए? ऐसे में सरकार और महिला बाल विकास विभाग की जिम्मेदारी क्या है?
मामले ने तूल पकड़ लिया है।
