जब पुलिस ही असहाय हो जाए तो राज्य में न्याय कैसे मिलेगा?

0
Spread the love
*दिनांक: [23 जुलाई 2025]*
 *मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी, भोपाल*
*जब पुलिस ही असहाय हो जाए तो राज्य में न्याय कैसे मिलेगा?*
*प्रमोद पावन आत्महत्या मामला: माफिया राज, जातिवादी अपमान और भाजपा की नाकामी की क्रूर सच्चाई उजागर करता है – जीतू पटवारी*
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी ने पुलिसकर्मी प्रमोद पावन की आत्महत्या को भाजपा सरकार की विफलता, माफियाओं के बेलगाम आतंक, और जातिगत उत्पीड़न की शर्मनाक तस्वीर बताया है।
*मात्र एक घटना नहीं, एक खतरनाक चलन:*
मध्य प्रदेश में पिछले 6 महीनों में 10 पुलिसकर्मियों ने आत्महत्या की है!
यह आंकड़ा भाजपा शासन की प्रशासनिक क्रूरता और पुलिस बल के भीतर गहराते मानसिक, पारिवारिक और सामाजिक तनाव को दर्शाता है।
*श्री पावन ने आत्महत्या से पहले साफ शब्दों में कहा:*
“मेरे ही टीआई मुझे प्रताड़ित कर रहे हैं”
“रेत माफिया कुचलने की धमकी दे रहा है”
यह बयान केवल किसी एक व्यक्ति की व्यथा नहीं है, यह पूरे पुलिस महकमे के भीतर जहर बन चुके दबाव, भ्रष्टाचार, जातिवाद और माफिया-संरक्षण की गवाही है।
*भाजपा सरकार के राज में पुलिसकर्मी भी सुरक्षित नहीं!*
 मध्य प्रदेश में भाजपा के शासनकाल में माफियाओं को खुली छूट दी गई है।
पुलिसकर्मी मानसिक दबाव, कार्यभार, राजनीतिक हस्तक्षेप और जातिवादी उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं।
प्रमोद पावन जैसे ईमानदार जवानों को आत्महत्या जैसे कदम उठाने पर विवश होना प्रदेश की कानून व्यवस्था की पराजय है।
*जातिगत अपमान – भाजपा की दोहरी मानसिकता की पोल खोलता है!*
श्री पावन के वीडियो में जातिसूचक शब्दों के प्रयोग और सामाजिक अपमान का जिक्र है।
भाजपा एक तरफ सामाजिक समरसता की बात करती है, और दूसरी तरफ सरकारी तंत्र में  कर्मचारियों को अपमानित किया जा रहा है।
यह केवल आत्महत्या नहीं, यह एक संस्थागत हत्या है, जिसमें राज्य की चुप्पी भी अपराध है।
*मुख्यमंत्री मोहन यादव जोकि स्वयं गृह मंत्री है जिम्मेदारी लें!*
*कांग्रेस अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी ने तीखे सवाल किए:*
मुख्यमंत्री जी, जब पुलिस ही भय और अपमान के साये में जी रही है, तो आम आदमी कैसे सुरक्षित रहेगा?
गृह मंत्री बताएं – क्या उनका काम सिर्फ बयानों तक सीमित रह गया है? क्या प्रमोद पावन की आत्महत्या पर वे जवाब देंगे?
*कांग्रेस की 5 मांगें:*
1. इस मामले की उच्च न्यायिक जांच कराई जाए।
2. आरोपी टीआई और माफिया से मिलीभगत रखने वाले अधिकारियों को निलंबित कर गिरफ्तारी की जाए।
3. परिवार को ₹1 करोड़ मुआवज़ा और एक परिजन को नौकरी दी जाए।
4.  जातिगत उत्पीड़न का केस दर्ज हो ।
5. पुलिस बल के भीतर मानसिक तनाव और माफिया दबाव की जांच की जाए।
*श्री पटवारी की चेतावनी:*
“अगर भाजपा सरकार ने पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और गरिमा के लिए तत्काल कदम नहीं उठाए, तो कांग्रेस पूरे प्रदेश में जन आंदोलन खड़ा करेगी। यह लड़ाई सिर्फ प्रमोद पावन की नहीं है, यह हर उस व्यक्ति की है जो संविधान, न्याय और आत्मसम्मान में विश्वास करता है।” क्योंकि यदि पुलिसकर्मी आत्महत्या के लिए मजबूर है तो आम जनता की प्रताड़ना की क्या हालत होगी यह समझा जा सकता है
*सादर प्रकाशनार्थ*
*मीडिया विभाग*
*मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी*

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *