कोविशील्ड वैक्सीन से दस लाख लोगों में से 13 को साइड इफेक्ट
दैनिक ‘भास्कर’ अपने संपादकीय में लिख रहा है कि कोविशील्ड वैक्सीन से दस लाख लोगों में से 13 को साइड इफेक्ट और एक को घातक ब्लड काटिंग ( टीटीएस ) हो सकती है। इसके साथ वे ये भी लिखते हैं कि कोविशील्ड वैक्सीन पर दुष्प्रचार से बचना चाहिए।
राजस्थान पत्रिका कह रही है कि वैक्सीन का भय दिखाकर अनावश्यक जांचों के लिए लोगों को धकेला जा रहा है ताकि चांदी काटी जा सके। यानी भयभीत लोगों को लूटने के लिए लैब तैयार हैं।
तीसरी तरफ भयावह सच्चाई यह है कि 25 – 26 साल के हृष्ट पुष्ट नौजवान हार्ट अटैक से मर रहे हैं। ऊपर मैंने दो नौजवानों के फोटो दिए हैं। ये दोनों ही अब इस दुनिया में नहीं है। दोनों ही शानदार नौकरियां कर रहे थे। दोनों की शादी के लिए परिवार वाले सुनहरे सपने संजो रहे थे। दोनों को कोराना से बचाव के टीके लगे थे।
काले चश्मे में दिखाई दे रहे हैंडसम नौजवान का नाम हर्ष सक्सेना है। ये नोएडा में फिजिक्सवाला में साफ्टवेयर का काम देखते थे। इनके पिता अंता में एनटीपीसी में काम करते हैं। गत 1 अक्टूबर 23 की सुबह उन्हें घबराहट की शिकायत हुई। अस्पताल ले गए, भर्ती किया। वहां थोड़ी देर बाद ही डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। मृत्यु का कारण हार्ट अटैक बताया। हर्ष की बड़ी बहन की पहले ही शादी हो चुकी है। अब हर्ष भी नहीं रहा तो माता पिता के जीवन में सूनापन पसर गया है।
दूसरा फोटो कुन्हाड़ी थाने के पास रहने वाले अनुराग शर्मा का है। एमबीए करने के बाद पहले बेंगलुरू फिर पुणे में नौकरी की। मन नहीं लगा तो खेती में ही कुछ नवाचार करने की कोशिश कर रहे थे। गत 5 मार्च को सुबह साढ़े सात बजे उनकी मां चाय लेकर उन्हें जगाने पहुंची तो अनुराग ने कुछ देर और सोने की इच्छा जताई। सुबह साढ़े नौ बजे मां फिर बेटे को जगाने पहुंची तो वह उठा ही नहीं। डॉक्टर का कहना था कि डेढ़ घण्टा पहले ही साइलेंट हार्ट अटैक से उसकी मौत हो चुकी थी।
अनुराग के पिता संजय सक्सेना बताते हैं कि मार्च में ही तालेड़ा में एक सिख युवक कार में ही बैठा रह गया। हार्ट अटैक से उसकी मौत हुई थी।
इन दोनों युवकों की मौत का समय एक है यानी सुबह सात से नौ के बीच हुई। लेकिन न पोस्टमार्टम हुआ और न डिटेल में जांच हुई। इसलिए कभी पता ही नहीं चलेगा कि वे कोविड के बचाव के टीके से मरे थे या नहीं? यानी उनके माता पिता को शायद ही कभी न्याय मिल पाएगा।
