गेंद महामहिम अब आपके पाले में है!

गेंद महामहिम अब आपके पाले में है
कोटा से बेंगलुरू आने जाने के लिए सप्ताह में दो दिन सोमवार और बुधवार को जयपुर- मैसूर ट्रेन है। लेकिन इस ट्रेन में कोटावासियों को पर्याप्त सीटें उपलब्ध नहीं है। होना तो यह चाहिए था कि कोटा से बारां- गुना- बीना-भोपाल के रास्ते बेगलुरू/ मैसूर के बीच एक साप्ताहिक ट्रेन चलाई जानी चाहिए थी लेकिन हमारे कर्णधार सोते रहे और गुना के सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर से शिवपुरी- गुना- अशोकनगर- बीना- भोपाल के रास्ते बेगलुरू के बीच ट्रेन संख्या- 11085/11086 चलवाने में सफल रहे।
हमारा महामहिम ओम बिरलाजी और झालावाड़-बारां के सांसद दुष्यंत सिंह से अनुरोध है कि वे कोटा- बारां- गुना- बीना-भोपाल के रास्ते बेंगलुरू के बीच सप्ताह में एक दिन रविवार को ट्रेन चलाने के लिए कोशिश करें। यह ट्रेन कोटा से तीन बजे रवाना होकर अंता, बारां, छबड़ा रूकते हुए गुना
सायं 6.30 पहुंचे। फिर वहां से ग्वालियर- बेंगलुरू के समयानुसार बेंगलुरू पहुंचे।
कोटा- बीना मेमू संख्या 06633 सायं 17.10 बजे गुना पहुंचती है। इसके 80 मिनिट बाद शुक्रवार को 18.30 बजे ग्वालियर- बेंगलुरू 11085/86 का क्रासिंग मिलेगा। इसके लिए दो चीजें करने की आवश्यकता है कि ग्वालियर- बेगलुरू ट्रेन में कोटा/ बारां/ अंता/ छबड़ा के यात्रियों के लिए स्लीपर से लेकर फर्स्ट एसी तक सभी श्रेणी में बेंगलुरू के लिए सीटें आरक्षित की जाए। इसी प्रकार लौटते समय का ट्रेन टाइम मेन्टेन किया जाए।
उल्लेखनीय है कि ग्वालियर से बेंगलुरू के बीच कर्नाटक एक्सप्रेस और राजधानी एक्सप्रेस के बाद यह तीसरी ट्रेन है जो ज्योतिरादित्य ने शिवपुरी- गुना- अशोक नगर के युवा इंजीनियर के लिए चलवाई है। ऐसे में कोटा- बारां के युवा इंजीनियर ने क्या बिगाड़ा है जो नई ट्रेन की सौगात से वे वंचित रहे?
बेंगलुरू में कोटा के जितने सॉफ्टवेयर इंजीनियर काम करते हैं, उसके आधे भी ग्वालियर संभाग के नहीं होंगे। मेरे दोनों बेटों ने बेगलुरू में एक ही मल्टीनेशनल कंपनी में अलग अलग काल खण्ड में काम किया है। इसलिए उनकी समस्याओं को नजदीक से देखा है। पिछले दिनों शिक्षक नेता रोहिताश्व त्यागी जी ने भी एक टिप्पणी में इस ओर ध्यान दिलाया था। कोटावासी हजारों इंजीनियर बेंगलुरू में काम करते हैं। उनके बारे में सोचिए महामहिम!
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