उत्पाती किन्नरों को जेल भेज सबक सिखाएं …..

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उत्पाती किन्नरों को जेल भेज सबक सिखाएं …..

रतलाम पुलिस कार्रवाई की सर्वत्र प्रशंसा…

 

उज्जैन। किन्नरों के अव्यवहारिक उत्पात से हर कोई परेशान है… किन्नर जन्म, विवाह आदि प्रसंगों पर अपनी नेक लेते हैं…. इसमें कोई बुराई नहीं…. पर नेक कितनी ले….. संबंधित परिवार कितनी दें…..यह उनकी इच्छा पर निर्भर होना चाहिए…. वे अपनी हैसियत से जो यथायोग्य देते हैं….. उसे किन्नरों को स्वीकार करना चाहिए….सनातन मान्यता में हम किन्नरों का सम्मान करते हैं…. सम्मान की भी एक मर्यादा है…. किन्नर जब बेलगाम हो जाए…. जबरिया वसूली करने लगते हैं….. परिवार या व्यक्ति की हैसियत से अधिक नेक मांगते हैं….. तो कष्ट होना स्वाभाविक है….. किन्नरों का जत्था अति कर देता है….. 1000, 2000, 3000 रुपए तक की मांग करने लगता है…. तब विवादित स्थितियां निर्मित होती है…. कई बार ऐसी घटनाएं हुई है….

 

खैर…. किन्नरों ने ‘ नेक’ मांगने की ‘ पठानी पद्धति’ अपना रखी है…. उनके द्वारा चाही गई नेक नहीं मिलने पर वे व्यक्ति या परिवार की बेइज्जती भी करने लगते हैं…. यही नहीं कई बार वे अश्लील प्रदर्शन करने लगते हैं…. अश्लील गालियां भी देते हैं…. कई बार अपने कपड़े भी उतार देते हैं…. जबरन गले पड़ जाते हैं…. बेवक्त आई मुसीबत से तौबा करने के लिए जैसे-तैसे व्यक्ति बचते हैं…. इन किन्नरों का उत्पात रेलवे में अधिक देखा गया है…. रेल के मार्ग किन्नरों ने अपनी ‘ स्वयंभू अदालत’ की तरह बांट लिए हैं…. जैसे शहरों में मोहल्ले बांट लिए जाते हैं…. ट्रेनों में परिवार सहित सफर करने वाले इन किन्नरों के आतंक से बेहद पीड़ित हो जाते हैं…. कई बार रेलवे में नेक वसूली को लेकर किन्नरों में जंग छिड़ जाती है… असली- नकली को लेकर मरने- मारने पर उतारू हो जाते हैं…. इंदौर सहित कई स्थानों पर किन्नरों के वर्चस्व वाले गुट एक- दूसरे को निपटाते हैं…. गुंडों-बदमाशों को ‘ हायर’ कर खूनी खेल भी खेलते हैं…. आखिर इन किन्नरों के प्रति सरकारी अफसरों का रवैया इतना ढीला/सुस्त क्यों रहता है…. रेलों में उनके आतंक पर प्रभावी अंकुश क्यों नहीं लगता….. जबरिया वसूली पर कानूनी एक्शन क्यों नहीं लिया जाता…. अफसरों को आखिर डर किससे है… कानून से है… या किन्नरों के उत्पात से है….

रतलाम के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राकेश खाखा साधुवाद के पात्र हैं जिन्होंने अपनी हिम्मत दिखाकर लेबड़-नीमच राष्ट्रीय राजमार्ग के धराड़-बिलपांक में बने टोल बूथ पर किन्नरों द्वारा की जा रही जबरिया वसूली के विरोध में सख्त कार्रवाई की… और 9 किन्नरों को जेल भिजवाया…. एसडीएम संजीव पांडे भी साधुवाद के हिस्सेदार है…. जिन्होंने बगैर किसी दबाव के उन्हें जेल भेजने के आदेश दिए…. हालांकि किन्नरों ने रतलाम के स्टेशन रोड स्थित एक पुलिस थाने पर काफी हंगामा और उत्पात मचाया….. किंतु किन्नरों के आगे झुके नहीं…. ऐसी ही कार्रवाई अन्य स्थानों और रेलवे पुलिस से किए जाने की दरकार है….

-राजेंद्र पुरोहित

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