काटजू अस्पताल में एक साल में 15% बढ़ीं नॉर्मल डिलीवरी

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राजधानी भोपाल के डॉ. कैलाशनाथ काटजू जच्चा-बच्चा अस्पताल ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यहां एक साल में नॉर्मल डिलीवरी के मामलों में 15 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अस्पताल में सिजेरियन के बजाय सामान्य प्रसव को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे न सिर्फ जच्चा-बच्चा की सेहत बेहतर हो रही है, बल्कि मरीजों की तेजी से रिकवरी भी सुनिश्चित हो पा रही है।

यह सुधार इसलिए भी अहम है क्योंकि यहां 40 से 45 फीसदी रैफर्ड गर्भवती महिलाएं आती हैं। जिन्हें हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के तहत चिह्नित किया गया होता है। इन मरीजों में आमतौर पर डॉक्टर सिजेरियन डिलीवरी का ही विकल्प चुनते हैं।

67 फीसदी हो रहीं नॉर्मल डिलीवरी अस्पताल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, साल 2023 में काटजू अस्पताल में कुल 1,528 प्रसव हुए थे, जिनमें से 802 यानी 52% नॉर्मल डिलीवरी थीं। वहीं, 2024 में यह आंकड़ा 5,175 पर पहुंच गया, जिसमें से 3,518 यानी 67% डिलीवरी सामान्य तरीके से हुईं। इस वृद्धि को डॉक्टरों की मेहनत, सही गाइडेंस और गर्भवती महिलाओं में जागरूकता का नतीजा बताया जा रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन डब्ल्यूएचओ के अनुसार किसी भी अस्पताल में ऑपरेशन से डिलीवरी की दर 18% से अधिक नहीं होनी चाहिए। काटजू अस्पताल इस दिशा में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन लक्ष्य है कि इसे और घटाया जाए।

सिजेरियन डिलीवरी के खतरे और बचाव अस्पताल की गायनोकोलॉजिस्टों का कहना है कि ऑपरेशन से डिलीवरी में रिकवरी धीमी होती है और इन्फेक्शन का खतरा अधिक रहता है। साथ ही पेट से जुड़ी समस्याएं, डीप वेन थ्रॉम्बोसिस, प्लैसेंटा से जुड़ी जटिलताएं और भविष्य में अन्य बीमारियों की संभावना भी बनी रहती है।

इसलिए, डॉक्टरों ने महिलाओं को सलाह दी है कि यदि वे नॉर्मल डिलीवरी चाहती हैं तो गर्भावस्था के दौरान नियमित व्यायाम करें, संतुलित आहार लें, पर्याप्त पानी पिएं और मानसिक रूप से भी खुद को सकारात्मक बनाए रखें। रोजाना कम से कम 30 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी जरूरी मानी गई है।

अस्पताल में आधुनिक सुविधाएं अस्पताल प्रशासन ने प्रसूताओं और उनके परिजनों की सुविधा के लिए वार्डों में नई पहल की है। सात-सात वॉशिंग मशीनें और प्रेस लगाई गई हैं, जिससे कपड़े धोना और प्रेस करना आसान हो गया है। साथ ही, चार माइक्रोवेव भी लगाए गए हैं ताकि मरीजों को गरम भोजन आसानी से मिल सके और उन्हें बार-बार बाहर न जाना पड़े। इन व्यवस्थाओं ने मरीजों की देखभाल को और आसान बना दिया है।

यहां आर्थिक फायदा नहीं, सिर्फ मिलता है सही इलाज काटजू अस्पताल की नोडल अधिकारी डॉ. रचना दुबे ने बताया कि यह अस्पताल केवल इलाज का केंद्र नहीं, बल्कि नई जिंदगी की शुरुआत का स्थान है। यह सरकारी अस्पताल है और यहां डॉक्टर चाहे सिजेरियन या नॉर्मल डिलीवरी कराए, इससे उसका किसी भी तरह का कोई आर्थिक फायदा नहीं जुड़ा है।

ऐसे में मरीज को वहीं इलाज मिलता है, जो जरूरी है। हमारा लक्ष्य है कि यहां आने वाली हर महिला को संपूर्ण सुविधा मिले और वह अपने नवजात के साथ स्वस्थ और मुस्कुराते हुए घर लौटे। पूरी टीम का समर्पण ही है कि काटजू अस्पताल प्रसव के लिए हर दंपती की पहली पसंद बनें।

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