किसी वेब सीरीज की तरह बढ़ता ही जा रहा पवार खानदान का फैमिली ड्रामा राजेश चतुर्वेदी
आज के “हरकारा” में…………..
किसी वेब सीरीज की तरह बढ़ता ही जा रहा पवार खानदान का फैमिली ड्रामा
राजेश चतुर्वेदी
महाराष्ट्र में पवार परिवार की “घड़ी” की टिक-टिक फिर सुनाई देने लगी है. कहा जा रहा है कि चाचा-भतीजा फिर एक हो सकते हैं. पिछले माह 12 दिसंबर को अजित पवार ने जिस अंदाज़ में अपने पूरे परिवार के साथ शरद पावर को उनके दिल्ली वाले घर पर जन्मदिन की बधाई दी, उसके बाद से दोनों में “एका” होने की उम्मीद की जा रही है. इसमें इजाफा अजित की माँ आशा ताई ने किया, जिन्होंने नए साल के मौके पर पंढरपुर स्थित विट्ठल
रुक्मणी मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद मीडिया से कहा, “मैंने कामना की है कि पवार परिवार के मतभेद जल्द से जल्द खत्म हों और उनके बेटे व उसके चाचा फिर एक हो जाएं. मुझे पूरी उम्मीद है कि पांडुरंग मेरी प्रार्थना जरूर सुनेंगे.” उपमुख्यमंत्री अजित पवार की माँ आशा ताई की इस टिप्पणी से लग रहा है कि खुद पवार परिवार अपनी तीसरी पीढ़ी की खातिर राजनीतिक सुलह के रास्ते पर है. पवार परिवार के एक और सदस्य विधायक रोहित पवार की माँ सुनंदा पवार ने भी दोनों के एक होने की इच्छा जताई थी. हालांकि शरद पवार की बेटी और एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने आशा ताई की इच्छा पर नपे तुले शब्दों में जवाब दिया. कहा, “मैं इस बारे में कुछ नहीं कहना चाहती, क्योंकि मैं पेशेवर जिंदगी को व्यक्तिगत जीवन से अलग रखती हूं. पवार परिवार हमेशा से एक रहा है. मेरा अपनी ताई से रिश्ता नहीं बदला है.” एनसीपी (एपी) के दूसरे नेता भी कम से कम महाराष्ट्र की सियासत में दोनों को एक होता देखना चाहते हैं, क्योंकि चाचा भतीजा का राज्य के 20 फीसदी वोटों पर प्रभाव है.
जहां तक राजनीतिक समीकरणों का सवाल है तो महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से शरद पवार जहां बैकफुट पर हैं, वहीं लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद अजित पवार ने विधानसभा की लड़ाई में खुद को साबित किया है. 84 वर्ष की आयु पूरी कर चुके शरद पवार लगभग छह दशक से सार्वजनिक जीवन में हैं, लेकिन राजनीतिक तौर पर उनका इतना बुरा हाल कभी नहीं हुआ. 80 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद उनके महज 10 उम्मीदवार चुने गए. आज की हालत तो ऐसी है कि वह यदि अगली बार राज्यसभा में जाना चाहें तो उनके पास पर्याप्त संख्या बल ही नहीं है. जाहिर है, इसके लिए उन्हें अपने भतीजे का मुंह देखना पड़ेगा. वैसे, बुजुर्ग पवार अपने आप में राजनीतिक प्रबंधन के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं. उनके बारे में अकसर दो बातें की जाती हैं. (एक) वह क्या करेंगे, इस बारे में कभी भविष्यवाणी नहीं की जा सकती. (दो) उनके कहे पर एकदम भरोसा नहीं किया जा सकता. उनकी शैली ऐसी है कि जैसे, बोर्डिंग पास मुंबई का दिखाकर कोई दिल्ली की फ्लाइट में बैठ जाए. वह राजनीति के रहस्यमयी किरदार माने जाते हैं. जरूरी नहीं कि जहां दिखाई पड़ रहे हैं, वहां वास्तव में हों ही! यही वजह है, कभी वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हैं तो कभी उनके कसीदे पढ़ने लगते हैं. कब मोदी के साथ किस मंच पर दिख जाएं, कहा नहीं जा सकता.
विपक्ष में रहकर भी “पावर” की राजनीति करने के अभ्यस्त पवार अपने जन्मदिन के पांच दिन बाद मोदी को अनार की पेटी गिफ्ट करने पहुंच जाते हैं. बीस दिन पहले 18 दिसंबर को जब मोदी, अनार और पवार की तस्वीर सोशल मीडिया में वायरल हुई तो “इंडिया ब्लॉक” की जमीन का नक्शा सामने आ गया! चाचा भतीजे के एक होने की खबरों के बीच ही शुक्रवार को वह छगन भुजबल के साथ मंच शेयर करते दिखाई दिए. बल्कि उन भुजबल का डेढ़ घंटे इंतजार किया, जिनकी इन दिनों अजित पवार से खुली अनबन चल रही है. दोनों काफी देर बतियाते रहे. तो क्या मान लिया जाए कि “साहेब” भतीजे के लिए नई चुनौतियों को पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं या उन्होंने भतीजे की खातिर भुजबल को शांत रहने के लिए कोई “पुड़िया” पकड़ाई है?
शरद पवार के मित्र 86 साल के विट्ठल मनियार कहते हैं, अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को परिवार के ऊपर रखने के कारण साहेब को वाकई धक्का लगा.” मनियार ने यह अजित पवार के लिए कहा, जो छठवीं बार महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री हैं और मध्य 2023 में उन्होंने मध्यमार्गी एनसीपी को बांट दिया था. बहरहाल, पवार परिवार की घड़ी के “दो कांटों” में सुलह की कोशिशें जारी हैं, दिलचस्प होगा कांटों की चाल देखना. वैसे, कहानी वेब सीरीज लायक है!
