मोहन सरकार में IAS-IPS के ट्रांसफर आधी रात को क्यों
मध्यप्रदेश सरकार ने मंगलवार रात को 7 आईपीएस अफसरों के तबादले किए थे। इसके आदेश आधी रात के बाद जारी किए। ये पहली बार नहीं था, जब रात 12 बजे के बाद मंत्रालय खोला गया, अफसर आए और ट्रांसफर आदेश जारी किया।
मोहन सरकार ने 8 महीने में 9 लिस्ट जारी कर 144 आईएएस-आईपीएस के तबादले किए। इसमें से 109 अफसरों के तबादलों की 6 लिस्ट आधी रात के बाद जारी की गईं।

देर रात अफसरों के तबादले करना क्या सरकार की मजबूरी है? या फिर कोई अन्य वजह, जानिए इस रिपोर्ट में..
देर रात अफसरों के तबादले की परंपरा शिवराज सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान शुरू हुई थी। 2012-13 में जब आर परशुराम मुख्य सचिव थे, तब पहली बार आईएएस अफसरों की ट्रांसफर लिस्ट रात 3 बजे जारी हुई थी। इसके बाद कई बार ऐसे मौके आए जब मंत्रालय के कार्यालयीन समय के बाद रात में आदेश जारी हुए।
शिवराज सरकार के अंतिम कार्यकाल में आखिरी बार 31 जुलाई 2023 को रात 12 बजे 10 आईएएस अफसरों की तबादला सूची जारी हुई थी, जिसमें तत्कालीन गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के दामाद श्रीमन शुक्ला का नाम शामिल था। उन्हें नर्मदापुरम कमिश्नर से कृषि मंडी का प्रबंध संचालक बनाया गया था।

अब जानिए 22 अक्टूबर को कैसे निकले ट्रांसफर आदेश..
रात 9 बजे सीएम से मिले डीजीपी, 12 बजे आदेश टाइप हुआ
- रात 9 बजे डीजीपी सुधीर सक्सेना सीएम हाउस पहुंचे थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ उनकी करीब आधा घंटे तक बैठक हुई। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव अनुराग जैन से भी बात की।
- रात 11 बजे अपर मुख्य सचिव एसएन मिश्रा के पास संदेश पहुंचा कि 7 आईपीएस अफसरों की नई पदस्थापना आदेश जारी होना है। संभवत: यह संदेश मुख्यमंत्री निवास से पहुंचा।
- रात 12 बजे गृह विभाग के सचिव ओपी श्रीवास्तव और उनका स्टाफ मंत्रालय पहुंचा। इसके बाद आदेश तैयार हुआ। लिस्ट सीएम हाउस के एक अफसर को भेजी गई। ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद रात 1.30 बजे आदेश जारी हुआ।

पहली बार 1996 में रात 3 बजे 300 आईएएस के तबादले मंत्रालय में लंबे समय तक रिपोर्टिंग करने वाले वरिष्ठ पत्रकार दिनेश गुप्ता के मुताबिक 1996 में तत्कालीन मुख्य सचिव शरद चंद्र बेहार ने रात 3 बजे 300 आईएएस अफसरों के ट्रांसफर आदेश जारी कराए थे। तब मंत्रालय को रात में खोला गया था। दरअसल, पंचायती राज सिस्टम लागू होने के बाद जिला पंचायतों में आईएएस अफसरों की पोस्टिंग की गई थी। देश में ऐसा पहली बार हुआ था, जब आधी रात के बाद सरकार ने थोक तबादले किए थे।

पुलिस अफसरों के लिए 2007 में बना बोर्ड पुलिस अफसरों के ट्रांसफर करने के लिए पुलिस स्थापना बोर्ड बना है। यह बोर्ड सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बनाया गया था। इस संबंध में राज्य सरकार ने 14 फरवरी 2007 को आदेश जारी किया था। इस बोर्ड की अनुशंसा पर सरकार पुलिस अफसरों के ट्रांसफर करती है।
बोर्ड में डीजीपी के अलावा अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एसएएफ, गुप्त वार्ता, सीआईडी और प्रशासन सदस्य हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक आईपीएस अफसरों के ट्रांसफर के लिए सरकार को बोर्ड की अनुशंसा को प्राथमिकता देना होगी। लेकिन सरकार को इसमें बदलाव करने का अधिकार है।
आईएएस अफसरों के लिए सिविल सर्विस बोर्ड 2017 में बना आईएएस अफसरों के ट्रांसफर करने के लिए सिविल सर्विस बोर्ड बना है। यह बोर्ड सुप्रीम कोर्ट के आदेश (अक्टूबर 2017) पर बना है। इसमें मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव (कार्मिक) और एक सीनियर अपर मुख्य सचिव सदस्य होते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकार किसी भी आईएएस अफसर को 2 साल से पहले नहीं हटा सकती है। यदि किसी आईएएस का 2 साल से पहले तबादला किया जाना जरूरी है तो उसके लिए कारण बताना होगा।

आईएएस: पहले ट्रांसफर, फिर बोर्ड की मंजूरी
- ये है नियम – सामान्य प्रशासन विभाग एक प्रस्ताव तैयार कर मुख्य सचिव को भेजता है। मुख्य सचिव सिविल सर्विस बोर्ड की बैठक बुलाकर प्रस्ताव पर सहमति लेते हैं। इसके बाद मुख्य सचिव की मुख्यमंत्री से चर्चा होती है। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग तबादला आदेश जारी करता है।
- हो ये रहा – मंत्रालय सूत्रों ने बताया कि अफसरों की नई पदस्थापना के लिए मुख्य सचिव प्रस्ताव तैयार करने के बाद मुख्यमंत्री से चर्चा करते हैं। मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद सामान्य प्रशासन विभाग आदेश जारी करता है। इसके बाद नोटशीट पर सिविल सर्विस बोर्ड के सदस्यों की सहमति ले लेते हैं।
आईपीएस: गृह विभाग आदेश जारी करता है, मंजूरी बाद में
- ये है नियम – पुलिस मुख्यालय एक प्रस्ताव तैयार कर मुख्य सचिव को भेजता है। सीएस उसे गृह विभाग में भेजते हैं। इसके बाद पुलिस स्थापना बोर्ड की बैठक होती है। इसकी अनुशंसा के साथ प्रस्ताव मुख्यमंत्री कार्यालय भेजा जाता है। तब मुख्यमंत्री डीजीपी से चर्चा करते हैं। इसके बाद गृह विभाग आदेश जारी करता हैं।
- हो ये रहा – पीएचक्यू सूत्रों ने बताया कि आईपीएस अफसरों की नई पदस्थापना के लिए डीजीपी लिस्ट तैयार करने के बाद मुख्यमंत्री से चर्चा करते हैं। मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद उनका कार्यालय एक नोटशीट मुख्य सचिव को भेजता है। इसके बाद गृह विभाग आदेश जारी करता है। पुलिस स्थापना बोर्ड की सहमति बाद में ले ली जाती है।
ट्रांसफर में सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं मान रही सरकार आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने आईएएस अफसरों के तबादले के लिए सिविल सर्विस बोर्ड की अनुशंसा को राज्य शासन की वेबसाइट पर अपलोड करने के आदेश दिए हैं, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।
बोर्ड की बैठक की कार्यवाही विवरण आरटीआई के तहत मांगा गया, लेकिन यह कहकर देने से इनकार कर दिया गया कि प्रकिया चल रही है। राज्य सूचना आयोग में यह पिटीशन पेंडिंग हैं। सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं कर रही है।

