हिमाचल में मस्जिद के शिवालय होने का दावा, सबूत नहीं

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हिमाचल के मंडी में जेल रोड पर बनी मस्जिद के बाहर एक दिन अचानक भीड़ जुट गई। तारीख थी 13 सितंबर। भीड़ में आम लोगों के साथ हिंदूवादी संगठनों के सदस्य भी थे। उन्होंने कहा कि मस्जिद की आड़ में अवैध कंस्ट्रक्शन किया गया है। इसे तोड़ा जाए। बातचीत के बाद सहमति बनी कि मस्जिद का अवैध हिस्सा गिराया जाएगा। इसके बाद नया विवाद शुरू हुआ।

विरोध कर रहे 6 लोगों ने दावा किया कि मस्जिद की जगह कभी हिंदू देवस्थल था। यहां खुदाई की जाए तो मंदिर के अवशेष मिल सकते हैं। इस दावे की पड़ताल के लिए दैनिक भास्कर मंडी पहुंचा। देवस्थल का दावा करने वालों से बात की। साथ ही हम शहर के इतिहासकार और कुछ बुजुर्गों से भी मिले।

102 साल के एक बुजुर्ग बताते हैं कि उन्होंने हमेशा से यहां मस्जिद ही देखी है। एक और बुजुर्ग 77 साल पुराना किस्सा सुनाते हैं, जब मंडी में भीड़ मस्जिद गिराने पहुंच गई थी। पढ़िए ये रिपोर्ट…

वे लोग जिन्होंने मस्जिद के देवस्थल होने का दावा किया… मस्जिद की जगह शिवालय होने का दावा मंडी में सिर्फ 6 लोग कर रहे हैं। इनमें रिटायर्ड कर्नल तारा प्रताप राणा, रिटायर्ड DIG केसी शर्मा, गगन बहल, संजय मंडयाल, गीतांजलि शर्मा और विराज जसवाल शामिल हैं। उन्होंने मंडी के डिप्टी कमिश्नर अपूर्व देवगन को ज्ञापन दिया। डिप्टी कमिश्नर ने इन सभी लोगों से सबूत देने के लिए कहा है। अब तक इस दावे को पुख्ता बताने वाले सबूत पेश नहीं किए गए हैं।

हिंदूवादी संगठन और आम लोग मस्जिद के नीचे शिवालय होने का दावा करके खुदाई की मांग कर रहे हैं। इसके लिए वे मंडी के डिप्टी कमिश्नर से भी मिले थे।
हिंदूवादी संगठन और आम लोग मस्जिद के नीचे शिवालय होने का दावा करके खुदाई की मांग कर रहे हैं। इसके लिए वे मंडी के डिप्टी कमिश्नर से भी मिले थे।

ये ज्ञापन 17 सितंबर को दिया गया था। इसके बाद से मस्जिद में न लाइट है और न पानी। मस्जिद से जुड़े लोगों के मुताबिक, इस शिकायत के बाद हमसे कोई बात नहीं की गई, न ही प्रशासन ने बताया कि बिजली और पानी क्यों काट दिया।

ज्ञापन के बारे में हमने एडवोकेट गीतांजलि शर्मा से बात की। गीतांजलि 25 साल से वकालत कर रही हैं। वे कहती हैं, ‘हमने डिप्टी कमिश्नर को रेवेन्यू रिकॉर्ड की डिटेल दी है। उसमें साफ लिखा है कि मस्जिद वाली जमीन की मालिक हिमाचल सरकार है।’

गीतांजलि भले मस्जिद की जांच की बात कर रही हैं, लेकिन ये भी कहती हैं कि मैं रेवेन्यू रिकॉर्ड की जानकार नहीं हूं। इस मामले की जांच किसी रेवेन्यू एक्सपर्ट को करनी चाहिए।

हमने गीतांजलि शर्मा से पूछा कि मस्जिद के हिंदू देवस्थल होने के दावे का आधार क्या है? वे कहती हैं, ‘मैं भी बचपन से वहां मस्जिद ही देख रही हूं। पहले स्ट्रक्चर छोटा था, कुछ ही साल में इतना बड़ा हुआ है।’

गीतांजलि के बाद हमने गगन बहल से बात की। गगन दावा करते हैं कि मस्जिद की जगह पर शिवालय है। वे कहते हैं, ‘मस्जिद का ढांचा जैसा है, बिल्कुल वैसा ही यहां के कामेश्वर महादेव मंदिर का भी है।’

हमने गगन को बताया कि मस्जिद की पुरानी फोटो में गुंबदनुमा ढांचा है। इस पर गगन कहते हैं, ‘वहां गुंबदनुमा ढांचा हुआ करता था। उस पर एक पत्थर लगा था, जो मंदिरों के ऊपर लगाया जाता है। कुछ समय पहले तक वो पत्थर मस्जिद में था, अब वहां नहीं है।’

गगन ने कहा कि मेरे पास उस पत्थर की फोटो हैं, लेकिन उन्होंने दिखाने से मना कर दिया।

करीब 70 साल पुरानी बताई जा रही ये मस्जिद मंडी के जेल रोड पर बनी है। आरोप है कि पहले मस्जिद 45 वर्गमीटर एरिया में बनी थी, जिसे कब्जा करके 231 वर्गमीटर में बना दिया गया।
करीब 70 साल पुरानी बताई जा रही ये मस्जिद मंडी के जेल रोड पर बनी है। आरोप है कि पहले मस्जिद 45 वर्गमीटर एरिया में बनी थी, जिसे कब्जा करके 231 वर्गमीटर में बना दिया गया।

हमने गगन से पूछा, ‘क्या आपके पास ऐसे कागजात हैं, जो आपके दावे को साबित कर सकें? गगन ने कहा, ‘मैंने कई कागज निकाले हैं, उनमें ऐसा कुछ नहीं लिखा है कि वहां मस्जिद ही है।’

हमने उनसे पूछा , ‘अगर मस्जिद की जगह शिवालय था, तो अब अचानक ये मामला क्यों उठ रहा है?’

गगन ने जवाब दिया, ‘पहले ऐसा कोई मामला नहीं था। हमने बुजुर्गों से सुना था, लेकिन तब कोई विवाद नहीं था। अगर किसी जगह की पहचान अचानक बदलने लगे, तो लोगों में फर्क आना स्वाभाविक है। मंडी की आबादी करीब 40 हजार है। सभी मिलकर रहते हैं। अब लोगों में बदलाव दिख रहा है। ये डेमोग्राफी का मुद्दा बन रहा है।’

मस्जिद के नाम पर सरकारी जमीन पर कब्जे के विरोध में 13 सितंबर को लोगों ने प्रोटेस्ट किया था।
मस्जिद के नाम पर सरकारी जमीन पर कब्जे के विरोध में 13 सितंबर को लोगों ने प्रोटेस्ट किया था।

गगन आरोप लगाते हैं कि मंडी में बाहर से मुस्लिम आकर बस गए हैं। इनकी वजह से मंडी में रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों का स्वभाव बदलता जा रहा है।

गगन अपने पास राजस्व विभाग का कागज होने का दावा कर कहते हैं कि इन कागजों में मस्जिद का कोई जिक्र नहीं है। हमने उनसे पूछा, ‘हमारे पास जो कागज हैं, उनमें साफ लिखा है कि ये जगह मस्जिद की है।’

गगन ने जवाब दिया, ‘अगर नकल जमाबंदी, यानी जमीन पर अधिकार से जुड़े कागजों में मस्जिद लिखा हुआ है, तो हम सहयोग करेंगे और मस्जिद बनवाने में मदद करेंगे। हमारे पास जो कागजात हैं, उनमें ऐसा कुछ नहीं लिखा है।’

गगन कागजों की बात तो करते हैं, लेकिन उन्हें हमारे साथ शेयर नहीं करते।

इतिहासकार बोले- मैंने कभी नहीं सुना मस्जिद की जगह मंदिर था मंडी के रहने वाले बीरबल शर्मा 35 साल से जर्नलिज्म कर रहे हैं। उनके पास शहर की 30 साल पुरानी फोटो हैं। उनका नाम शहर के बड़े इतिहासकारों में गिना जाता है। जेल रोड वाली मस्जिद के देवस्थल होने के दावे को बीरबल सिरे से खारिज कर देते हैं।

वे कहते हैं, ‘पिछले 52 साल से मैं इस शहर को देख रहा हूं। मंडी में दो मस्जिदें हैं, एक जेल रोड पर और दूसरी मूंगवाई में। जेल रोड वाली मस्जिद की जगह कभी शिवालय था, न ऐसा मैंने कभी देखा और न किसी किताब में पढ़ा है।’

‘15 साल पहले ये मस्जिद गुंबदनुमा थी। इसमें कुछ बदलाव किए गए। ये बात सही है कि मस्जिद का दायरा बढ़ाया गया और उन्होंने सरकारी जमीन पर कब्जा भी किया। मुस्लिम समुदाय ने ही पुरानी मस्जिद को तोड़कर यहां नई मस्जिद बनाई है।’

102 साल के ओमचंद बोले- बचपन से मस्जिद ही देखी है आजादी से पहले मंडी रियासत होती थी। इसके आखिरी राजा जोगिंदर सेन थे, जो 28 अप्रैल, 1913 को 8 साल की उम्र में गद्दी पर बैठे थे। आजादी तक वही मंडी के राजा रहे। शहर के इतिहास में मस्जिद की मौजूदगी के बारे में जानने के लिए हम 102 साल के ओमचंद कपूर से मिले। उन्होंने मंडी रियासत और राजा जोगिंदर सेन का वक्त देखा है।

ओमचंद कपूर फ्रीडम फाइटर रहे हैं। उनकी पढ़ाई लाहौर में हुई थी। तब लाहौर भारत का हिस्सा था। ओमचंद मस्जिद की मौजूदगी पर कहते हैं, ‘ये कहना मुश्किल है कि वहां क्या था। इतना पुराना इतिहास किसी को नहीं पता। कोई अगर बोल रहा है कि वहां मस्जिद थी, तो उसके पास इस बात के क्या सबूत हैं।’

ओमचंद के बाद हमने 96 साल के कृष्ण कुमार नूतन से बात की। वे हिमाचल प्रदेश के इतिहास पर कई किताबें लिख चुके हैं। वे मस्जिद विवाद पर कुछ भी बोलने से इनकार कर देते हैं। कृष्ण कुमार नूतन बताते हैं ‘ये मस्जिद जिस जगह पर बनी है, वो राजा जोगिंदर सेन के महल की जगह है। उस जमाने में राजा ने सभी धर्म के लोगों को प्रार्थना करने के लिए जगह दी थी। राजा सभी धर्म के लोगों का ध्यान रखते थे।’

कृष्ण कुमार नूतन कहते हैं, ‘अगर धर्म को लेकर इसी तरह लड़ाई होती रही तो हिंदुस्तान का हाल भी बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसा हो जाएगा।’

कृष्ण कुमार नूतन राजा जोगिंदर सेन के बारे में एक किस्सा सुनाते हैं। वे बताते हैं, ‘1947 में उपद्रवियों की भीड़ मंडी की मूंगवाई वाली मस्जिद को गिराना चाहती थी। तब राजा साहब ने उन्हें रोका था। वे बोले कि ये हमारा भी धर्म स्थान है। इसे कोई नहीं गिराएगा।’

‘उस वक्त मैं भी वहीं मौजूद था। राजा सभी धर्मों के लोगों को साथ लेकर चलते थे। उस जमाने में लोग उर्दू पढ़ा करते थे। राजा साहब के टीचर मुस्लिम थे। राजा साहब ने उनसे उर्दू सीखी थी। इसके बाद उन्हें पूरी मंडी की जमीन तोहफे में दी थी। वहीं आज मुस्लिमों की बस्ती है।’

रेवेन्यू के रिकॉर्ड में मस्जिद का जिक्र लोगों से बात करने के बाद हमने मस्जिद से जुड़े रेवेन्यू रिकॉर्ड के कागज देखे। उन कागजों को एक रेवेन्यू अधिकारी की मदद से समझा। हम रेवेन्यू अधिकारी की पहचान जाहिर नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मस्जिद की जगह शिवालय होने का दावा सही नहीं है।

मस्जिद की जमीन का जिक्र खसरा नंबर 2216 से 2221 तक है। इनसे साबित होता है कि ये जमीन मस्जिद के नाम पर ही दर्ज है। सभी कागजों में जमीन की मालिक हिमाचल प्रदेश सरकार है।

रेवेन्यू अधिकारी कहते हैं कि मस्जिद के सभी जमाबंदी जायज हैं और ये मस्जिद की ही जमीन है। हमने उनसे पूछा कि सभी कागजों में जमीन की मालिक हिमाचल सरकार क्यों लिखा है। अधिकारी ने जवाब दिया हिमाचल प्रदेश में सभी धार्मिक स्थलों का मालिकाना हक राज्य सरकार का ही होता है, लेकिन इस पर कब्जा धर्मस्थलों का रहता है।

जिस मस्जिद पर विवाद, वो 70 साल पुरानी मंडी की मस्जिद 70 साल से ज्यादा पुरानी है। पहले इसका स्वरूप अलग हुआ करता था। यहां सिर्फ छोटा सा कमरा था, जिसमें साल में कभी-कभार ही नमाज पढ़ी जाती थी। मस्जिद के आस-पास हिंदू कम्युनिटी के लोग ही रहते थे।

लोगों का दावा है कि 2014 के बाद यूपी से मुसलमानों की एक बड़ी आबादी आकर यहां बस गई। उसके बाद से यहां रोजाना नमाज का सिलसिला शुरू हुआ। मुस्लिम आबादी के बसने के साथ ही मस्जिद की तस्वीर भी बदली।

पहले यहां सिर्फ ग्राउंड फ्लोर पर ही कंस्ट्रक्शन था। ऊपर की दो मंजिलें बाद में बनवाई गईं, जिन्हें लेकर पूरा विवाद है। नगर निगम कमिश्नर एचएस राणा के कोर्ट ने 30 दिन में अवैध निर्माण गिराने के आदेश दिए हैं।

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