सुनवाई से पहले निगम की सीलिंग कार्रवाई पर सवाल

0
Spread the love

रहवासी इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटी बंद करने के लिए निगम ने पिछले दिनों सीलिंग की कार्रवाई की थी। कार्रवाई अब सवालों के घेरे में आ गई है।

रहवासियों ने नीलबड़ रोड स्थित साक्षी ढाबे की वह तस्वीर जारी की, जिसे निगम ने सील कर दिया, लेकिन खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने दो दिन पहले यहां पर कार्रवाई की थी।

संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन को शिकायत भेजकर साक्षी ढाबे को तत्काल पुनः सील करने, सीलिंग के बाद खुले अन्य प्रतिष्ठानों का सर्वे कराने, जिम्मेदार अधिकारी और संचालकों की भूमिका की जांच कर वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।

समिति ने सवाल उठाया कि जिस प्रतिष्ठान पर नगर निगम ने कार्रवाई कर सील लगाई थी, वह सीलिंग के बाद दोबारा कैसे खुल गया? क्या नगर निगम ने सील हटाने या प्रतिष्ठान खोलने की अनुमति दी थी? यदि अनुमति नहीं दी गई थी तो सील किसने हटाई या तोड़ी और उसके खिलाफ अब तक FIR क्यों दर्ज नहीं की गई?

खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई से मामला सामने आया समिति के अनुसार, 13 सितंबर को खाद्य सुरक् एवं औषधि प्रशासन की टीम ने भदभदा क्षेत्र स्थित साक्षी ढाबे का निरीक्षण कर कार्रवाई की गई। यह तथ्य इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उक्त ढाबे को नगर निगम द्वारा सील किए जाने की कार्रवाई के फोटो और वीडियो सार्वजनिक रूप से सामने आए थे।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रतिष्ठान नगर निगम द्वारा सील किया गया था, तो खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम को वहां दोबारा संचालित गतिविधियां कैसे मिलीं? समिति का कहना है कि खाद्य सुरक्षा विभाग की 13 सितंबर की कार्रवाई से जुड़े पंचनामा, निरीक्षण रिपोर्ट, नमूना लेने की कार्रवाई, फोटो-वीडियो एवं अन्य अभिलेख इस पूरे मामले की जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं।

इन्हें नगर निगम की जांच का हिस्सा बनाया जाना चाहिए और सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाने वाली एक्शन टेकन रिपोर्ट में भी शामिल किया जाना चाहिए।

रहवासी बोले- ‘सीलिंग कोई फोटो खिंचवाने की कार्रवाई नहीं’ रहवासी लवनीश भाटी ने बताया कि यह सिर्फ साक्षी ढाबे का मामला नहीं है, बल्कि नगर निगम की पूरी सीलिंग कार्रवाई की विश्वसनीयता का सवाल है।

अगर सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में लगाई गई सील के बाद कोई प्रतिष्ठान दोबारा खुल जाता है तो नगर निगम को जवाब देना होगा कि सील किसने खोली और किसकी अनुमति या संरक्षण में वहां व्यावसायिक गतिविधियां शुरू हुईं। सीलिंग कोई फोटो खिंचवाने की कार्रवाई नहीं है।

उन्होंने कहा कि 13 सितंबर को खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा की गई कार्रवाई को गंभीरता से लेते हुए उसके सभी दस्तावेजों को नगर निगम की जांच में शामिल किया जाना चाहिए और वास्तविक स्थिति सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष रखी जानी चाहिए।

याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने कहा कि एक तरफ नगर निगम सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देकर सीलिंग कर रहा है और दूसरी तरफ सील किए गए प्रतिष्ठान दोबारा खुल रहे हैं। आखिर यह दोहरा मापदंड कब तक चलेगा? आम नागरिक और छोटे दुकानदारों के लिए कानून अलग और प्रभावशाली प्रतिष्ठानों के लिए अलग क्यों?

त्रिपाठी ने कहा कि यदि किसी प्रतिष्ठान को सील करने के बाद बिना सक्षम अनुमति के खोला गया है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान की जानी चाहिए और नियमानुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *