इस समय हर शहर मे अतिक्रमण और सड़को पर वाहनों की गलत पार्किंग की समस्या बढ़ती जा रही है।हमारा भोपाल शहर भी इस बीमारी से अछूता नहीं है।
इस समय हर शहर मे अतिक्रमण और सड़को पर वाहनों की गलत पार्किंग की समस्या बढ़ती जा रही है।हमारा भोपाल शहर भी इस बीमारी से अछूता नहीं है।
रोज अखबारों में शहर के हर इलाके मे अतिक्रमण और सड़क पर गाड़ियों की बेतरतीब पार्किंग की न्यूज छपती है।
अब आगे समस्या को ध्यान से देखें तो पहले गैर कानूनी तरीके से योजनाबद्ध अतिक्रमण होता है,जो हमेशा स्थानीय नेता,नगर निगम कर्मचारी और समाज के तथाकथित दबंग लोगों की शह से ही संभव है।
फिर अचानक सरकार या अफसरों की कुंभकर्ण नींद टूटती है और तोडफ़ोड़ चालू होने लगती है। फिर हर राजनीतिक दल के नेता गरीब जनता पर अन्याय की बात कर उसका विरोध करते हैं,फिर दबाव में मुहिम बंद हो जाती है।
दूसरी समस्या शहर मे बढ़ती गाड़ियों की संख्या है,जिसकी तुलना में पार्किंग स्थल कम पड़ रहे हैं। जहां पार्किंग है, वहां भी लोग पार्किंग चार्ज बचाने के जुगाड मे सड़को, गलियों में गाड़ी पार्क कर रहे हैं।
मल्टी लेवल पार्किंग खाली पड़े हैं और बाजारों मे हर जगह गाड़ियां पार्क हैं,हद तो यह है कि पुलिस थाने के बाहर भी पार्किंग पुलिस की नाक के नीचे हो रही है।
आप कभी शाहपुरा में बंसल अस्पताल के सामने से निकले तो मनीषा मार्केट तक सड़क के दोनों तरफ गाड़ियों की कतार नजर आएगी।
अब मुख्य समस्या यह है कि अस्पताल और प्रशासन दोनों को पता है कि गाड़ियां आएंगी और अस्पताल ने पार्किंग स्थल बनाया ही नहीं है। हर दूसरे महीने शहर के प्रमुख अख़बार इस इलाके पर आर्टिकल छापते हैं,कोसते हैं पर अस्पताल और प्रशासन आंख और कान बंद कर व्यवस्था को बर्बाद कर रहे हैं।
सच कहें तो भोपाल राजधानी होने के बाद भी अन्य राज्यों की राजधानियों से मीलों पीछे है। आप कभी लखनऊ, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम, रायपुर आदि शहरों का दौरा करें तो असलियत समझ आ जाएगी। मुकुल
