भोपाल को बिजनेस हब बनाने के लिए अपने सुझाव

पिछले दिनों भास्कर में यह खबर प्रकाशित हुई थी कि भोपाल को बिजनेस हब बनाने के लिए अपने सुझाव दें ।पहले मैंने भी क्यू आर कोड खोला उसको भरा परंतु फिर डिलीट कर दिया वजह यह की भोपाल को तो बिजनेस सिटी के हिसाब से हब बनाना है साहित्य और संस्कृति के हिसाब से नहीं
प्रश्न यह है कि पैसा, पैसा ,सिर्फ पैसा हाय पैसा। पैसा कहां से कमाया जाए। आम जनता और सरकार भी इसी जुगत में लगी रहती है कि पैसा कहां से आए।जाहिर है पैसा मनुष्य की प्रमुख आवश्यकता है, होनी भी चाहिए क्योंकि उसके बिना गुजारा नहीं, परंतु मेरा मानना है कि पैसा हमारे पास पर्याप्त होना चाहिए आवश्यकता से अधिक नहीं। वैसे भी भोपाल को बाबुओं का शहर की कहा जाता है और बिना लेनदेन के कोई काम नहीं होता यह जग जाहिर है। अपने 30-35 साल के सेवा काल के दौरान मैंने यही देखा कि किस तरह से नंबर दो का पैसा आए हालांकि कहना उचित नहीं होगा मगर अधिकांश की प्रवृत्ति सिर्फ यह है कि टेबल के नीचे से पैसा आए जिससे हमारा घर चले और हमारी तनख्वाह बैंक में जमा होती रहे ।दूसरी नजर यह भी कि पैसा खर्च करना ना पड़े और फोकट में सब मिल जाए। देखिए आगे – आगे होता है क्या हर घर तिरंगा के साथ -साथ हर घर धंधा भी अब सरकार का प्रयोजन है। अब आर्थिक रूप से समृद्ध होने में नैतिकता आड़े नहीं आएगी क्योंकि सब कुछ प्रायोजित है।
Karuna rajulkar
