पुलिस देखकर टॉयलेट के बहाने भागी थी साध्वी लक्ष्मीदास
छिंदवाड़ा में महंत कनकबिहारी दास के निधन के बाद उनके बैंक अकाउंट से फर्जी तरीके से 90 लाख रुपए निकालने वाली रीना रघुवंशी उर्फ साध्वी लक्ष्मीदास ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस को चकमा दे दिया था। चौरई पुलिस उसे गिरफ्तार करने नर्मदापुरम के चकलेसा गांव पहुंची तो वह टॉयलेट के बहाने भागकर दो किलोमीटर दूर छिप गई थी।
जिस कार से वो भागी थी, उसी के ड्राइवर की निशानदेही पर बाद में पकड़ी गई। प्रारंभिक पूछताछ में रीना ने बताया कि धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज होने के बाद वह अयोध्या में जाकर छिपी थी। सावन के महीने में एक विशेष अनुष्ठान के लिए नर्मदापुरम आई थी। चौरई कोर्ट ने उसे दो दिन की पुलिस रिमांड पर सौंपा है।
बता दें कि पिछले साल 12 जुलाई को कनकधाम के महंत श्यामदास महाराज और पदाधिकारियों ने रीना के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई थी। गिरफ्तारी से बचने और खुद को कनकबिहारी का उत्तराधिकारी बताने के लिए साध्वी ने कई बार झूठ बोला। इतना ही नहीं, जमानत हासिल करने के लिए उसने कोर्ट को भी गुमराह किया।

जानिए, कैसे गिरफ्तार हुई साध्वी लक्ष्मीदास रीना रघुवंशी उर्फ साध्वी लक्ष्मीदास की तलाश न केवल पुलिस बल्कि रघुवंशी समाज को भी थी। 20 जुलाई को समाज के लोगों को उसके नए मोबाइल नंबर के बारे में पता चला। जब इस नंबर की लोकेशन पता की तो वह देवास के आसपास की निकली। इसके बाद चौरई पुलिस ने दो महिला पुलिसकर्मियों समेत पूरी टीम को साध्वी को गिरफ्तार करने भेजा।
टीम देवास पहुंची तो साध्वी की लोकेशन नर्मदापुरम जिले के शिवपुर के गांव चकलेसा की मिली। यहां एक छोटे से आश्रम में साध्वी अनुष्ठान करने पहुंची थी। चकलेसा के आश्रम को चुनने की वजह ये थी कि यहां पहुंचने के लिए नर्मदा को पार करना पड़ता है। बारिश के बाद से नर्मदा का जलस्तर बढ़ा हुआ है।

गांव के लोगों को पुलिस के खिलाफ भड़काया साध्वी लक्ष्मीदास को यकीन था कि पुलिस इतनी मशक्कत के बाद यहां पहुंच नहीं पाएगी। हालांकि, सोमवार को पुलिस यहां पहुंच ही गई। साध्वी ने गांव के लोगों को उकसाया कि पुलिस पूजा में व्यवधान डालने के लिए आई है। इस गलतफहमी को दूर करने के लिए छिंदवाड़ा एसपी ने नर्मदापुरम एसपी से बात की और बताया कि साध्वी धोखाधड़ी की आरोपी है।
पुलिस साध्वी की पूजा खत्म होने का इंतजार करने लगी। वह टॉयलेट जाने के बहाने पूजा से उठी और एक श्रद्धालु की कार से 2 किलोमीटर दूर दूसरे गांव में छिप गई। उसी श्रद्धालु ने पुलिस को साध्वी की लोकेशन के बारे में बताया।

अब जानिए, साध्वी ने किस तरह से किया गुमराह
1. शादी से इनकार किया, मां ने बताया- पति को छोड़कर आई रीना रघुवंशी से साध्वी बनी लक्ष्मीदास से दैनिक भास्कर ने उसकी फरारी के दौरान उसके भाई हर्ष के मोबाइल से बात की थी। इस दौरान रीना ने बताया था कि उसकी कभी शादी नहीं हुई। वहीं, कोलार के आईबीडी कैंपस में रहने वाले उसके माता-पिता ने भास्कर रिपोर्टर से बातचीत करते हुए ये बताया था कि बेटी की शादी इंदौर में हुई थी।
वह 5 महीने ससुराल में रही। फिर मायके लौट आई थी। माता-पिता ने ये नहीं बताया था कि रीना मायके वापस क्यों लौटी थी?
रिपोर्टर ने जब रीना से कहा- परिजन तो कह रहे हैं कि आप 5 महीने तक ससुराल में रहीं तो उसने जवाब दिया कि परिवार परेशान है। उन्हें कुछ नहीं मालूम। उसका परिवार से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, वह पुलिस से बचकर अपने भाई हर्ष के मोबाइल से भास्कर रिपोर्टर से बात कर रही थी।

2. खुद को लॉ-मैनेजमेंट ग्रेजुएट बताती है, लेकिन साल याद नहीं रीना रघुवंशी खुद को एलएलबी और एमबीए पास बताती है। फरारी के दौरान भास्कर ने जब उससे सवाल किया था कि आपने एलएलबी कब पास की तो जवाब मिला कि 2011 में एनएलआईयू (नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी) से एलएलबी पास की है। बता दें कि एनएलआईयू में 3 साल का कोई ग्रेजुएशन कोर्स ही नहीं है। यहां क्लेट से दाखिला होता है।
जब ये पूछा कि एमबीए कब किया है तो जवाब मिला- आईआईएम कोलकाता से 2011 में पास आउट हूं। खास बात ये है कि इसी दौरान वह निजी इंश्योरेंस कंपनी में नौकरी भी कर रही थी। वह खुद को कंपनी का वाइस प्रेसिडेंट बताती थी। जब भास्कर ने इस कंपनी के स्टाफ से पूछा तो बताया गया कि वह नौकरी छोड़ने के पहले तक ब्रांच हेड के रूप में काम कर रही थी।

3. महंत कनकबिहारी के उत्तराधिकारी का शपथपत्र पेश किया रीना रघुवंशी ने चौरई कोर्ट में केस की सुनवाई के दौरान एक शपथपत्र पेश किया था। जिसमें उसने खुद को महंत कनकबिहारी का उत्तराधिकारी बताया था। इसमें उसने खुद को महंत कनकबिहारी की शिष्या और बेटी कहा था। इस आधार पर वह बैंक अकाउंट से पैसा निकालने को जायज ठहराना चाहती थी।
हालांकि, आश्रम की तरफ से केस की पैरवी कर रहे वकील और पदाधिकारियों ने इस वसीयत को फर्जी बताया था। आश्रम की तरफ से कोर्ट में एक हस्तलिखित वसीयत पेश की गई। ये बताया गया कि कनकबिहारी दास महाराज ने बचपन से उनके साथ रह रहे श्यामदास महाराज को 2010 में ही अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था।

4. सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट को झूठ बोला- 90 लाख जमा कर दूंगी महंत कनकबिहारी दास की 17 अप्रैल 2023 को एक सड़क हादसे में मृत्यु होने के 8 महीने बाद तक उनके अकाउंट से कोई पैसा नहीं निकला था। बैंक के अकाउंट स्टेटमेंट बताते हैं कि उनके खाते में 90 लाख रुपए जमा थे। 31 दिसंबर 2023 को इस अकाउंट से 1 रुपए निकाला गया। इसके बाद 1 जनवरी 2024 से लेकर 18 जनवरी 2024 तक कई किस्तों में 11 लाख 57 हजार रुपए निकाले गए।
19 जनवरी को एक साथ 50 लाख रुपए निकाले गए और 12 फरवरी तक बैंक खाते से सारे पैसे निकाल लिए गए थे। चौरई पुलिस के मुताबिक, रीना रघुवंशी ने धोखाधड़ी के पैसे अपने भाई हर्ष रघुवंशी के अकाउंट में भी ट्रांसफर किए थे। इस पैसे से हर्ष ने एक एमजी हेक्टर गाड़ी खरीदी थी। पुलिस रीना को गिरफ्तार नहीं कर सकी लेकिन हर्ष को गिरफ्तार किया था।
हर्ष की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान वकील ने कोर्ट में लिखकर दिया था कि रीना रघुवंशी पूरे 90 लाख रुपए जमा करने को तैयार है। इस आधार पर कोर्ट ने हर्ष को जमानत दे दी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में रीना ने इस बात से इनकार कर दिया कि उसने पैसे लौटाने की सहमति दी थी।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाईकोर्ट ने हर्ष की जमानत रद्द कर दी। साथ ही रीना रघुवंशी को भी जमानत देने से इनकार कर दिया।

5. दीक्षा 2010 में ली, लेकिन नाम बदला 2020 में रीना रघुवंशी का दावा है कि उसने 2010 में ही दीक्षा ले ली थी, लेकिन घर की जिम्मेदारी के चलते वह परिवार के साथ रही। फिर 2020 में उसने विधिवत अपना नाम रीना रघुवंशी से बदलकर साध्वी लक्ष्मीदास कर दिया। रीना के मुताबिक, उसके पिता 2010 से महंत कनकबिहारी से जुड़े थे। वह साल 2020 में पूरी तरह साध्वी हो गई थी।
हालांकि, कनकधाम आश्रम के वरिष्ठ सदस्य चक्रपाल पटेल का कहना है कि साल 2022 में विदिशा के गमाकर गांव में कनकबिहारी दास महाराज यज्ञ करने पहुंचे थे, उसी दौरान रीना उनके संपर्क में आई थी। लक्ष्मी पर आश्रम से जुड़े दूसरे लोगों को पहले से ही संदेह था। रीना ने 2022 में विदिशा के खेजड़ा गांव से सरपंच का चुनाव भी लड़ा था। ये चुनाव उसने रीना रघुवंशी के नाम से ही लड़ा था।

