पुजारी ने कहा- कथा की तो अनिष्ट हो जाएगा
उत्तर प्रदेश में कथावाचक विवाद की गूंज अब मध्यप्रदेश के भिंड जिले तक पहुंच गई है। मौ कस्बे में कथित जातिगत अपमान को लेकर यादव समाज में आक्रोश है। विवाद तब शुरू हुआ जब बड़ैरा गांव में कथा आयोजन के दौरान यादव समाज की कथावाचक राधा यादव को बुलाने के बाद अंतिम समय में उनकी जगह एक ब्राह्मण से कथा कराई।
कथावाचक राधा यादव के पिता रोशन सिंह का कहना है कि हम कथा करने गांव पहुंचे थे। ऐन वक्त पर पुजारी बाबा हरि गिरिनाथ ने यह कहकर मना कर दिया गया कि अगर कथा होती है तो अनिष्ट हो जाएगा। इसके बाद हम वापस लौट आए। दैनिक भास्कर की टीम मौ, लोहरपुरा और बड़ैरा गांव पहुंची। दोनों पक्षों से बातचीत की और मामले की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। पढ़िए यह रिपोर्ट…
सबसे पहले जानिए क्या था यूपी कथावाचक विवाद दरअसल, इटावा में 21 जून को भागवत कथा में लोगों को पता चला कि कथावाचक ब्राह्मण नहीं, यादव हैं। इसके बाद हंगामा हो गया। कथावाचक को मारा-पीटा गया। उनकी चोटी काट दी गई। सिर मुंडवा दिया गया। एक महिला के पैरों में नाक रगड़वाई गई। इन सबका वीडियो बनाया। अगले दिन एक ब्राह्मण कथावाचक को बुलाया गया। उनसे भागवत करवाई गई, तभी पिछली रात वाले वीडियो वायरल हुए और हंगामा हो गया।
मध्यप्रदेश में भी यादव समाज ने घटना का विरोध किया। भिंड जिले में समाज के लोगों ने फैसला किया कि ब्राह्मणों से कर्मकांड नहीं कराएंगे। यदि कोई यादव परिवार ब्राह्मणों से पूजा कराता है तो उसका समाज से बहिष्कार किया जाएगा।

भिंड श्रीमद् भागवत कथा विवाद में कब क्या हुआ…
- जून महीना : मौ क्षेत्र के बड़ेरा गांव के नजदीक मघन गांव में भागवत कराने शास्त्री राधा यादव को बुलाया गया। कालिका मंदिर के पुजारी बाबा हरिदेव गिरि भी कथा सुनने पहुंचे। यहां उन्होंने कालिका मंदिर पर भागवत कथा के आयोजन को लेकर यादव को नारियल सौंपते हुए संकल्प लिया। भागवत कथा की तारीख 4 जुलाई तय हुई।
- 2 जुलाई : शास्त्री राधा यादव अपनी कमेटी के साथ पुखराया से निकलीं और 3 जुलाई को भिंड पहुंचीं। गांव में कथा की तैयारियां हो चुकी थीं। हालांकि, राधा यादव के आने से ठीक पांच दिन पहले बाबा हरिदेव गिरि ने बेहट के शास्त्री मदनमोहन शर्मा को कथा करने के लिए आमंत्रण दे दिया था।
- 3 जुलाई : शास्त्री राधा यादव ने बाबा हरिदेव गिरि को फोन किया और गांव का रास्ता पूछा। बाबा ने उन्हें गांव आने से मना किया। वे गांव पहुंचीं तो बाबा ने दूसरे पंडित से कथा कराए जाने की बात कही। इसके बाद राधा यादव वापस हो गईं।
- 4 जुलाई : कलश यात्रा हुई। भागवत कथा में पूरे गांव के लोगों ने हिस्सा लिया। 10 जुलाई को पूर्णाहूति के साथ कथा संपन्न हुई और भंडारा प्रसादी का वितरण हुआ।
- 13 जुलाई : मौ कस्बे के टेकरी सरकार मंदिर पर यादव समाज की पंचायत हुई। इस पंचायत में राधा यादव कथा नहीं करने देने पर नाराजगी जाहिर की। लोगों ने निर्णय लिया कि ब्राह्मणों से पांडित्य कार्य समाज का कोई भी व्यक्ति नहीं कराएगा। पंचायत का निर्णय न मानने पर परिवार का बहिष्कार किया जाएगा।
- 14 जुलाई : बड़ेरा के प्रबुद्ध लोगों ने शास्त्री राधा यादव के पिता से संपर्क किया और पुखराया पहुंचे। यहां गांव के लोगों ने बाबा हरिदेव गिरि को गलत ठहराते हुए राधा यादव से क्षमा मांगी और शॉल श्रीफल, वस्त्र एवं 11 हजार की राशि भेंट कर सम्मानित भी किया।
- 15 जुलाई : रात में समाज के लोग कमल यादव के घर पहुंचे। कमल की मां का 4 जुलाई को निधन हो गया था। 16 को त्रयोदशी थी। घर में भोजन तैयार हो रहा था। यहां पर समाज के लोगों ने ब्राह्मणों को न बुलाने की बात कही। कमल ने मना किया तो समाज ने त्रयोदशी का बहिष्कार कर दिया।

कमल यादव बोले- सर्व समाज का करता हूं सम्मान कमल यादव ने बताया कि मां ने 102 साल की आयु पूरी की थी और वे हमेशा ब्राह्मणों को देवताओं की तरह पूजती थीं। उनकी त्रयोदशी 16 जुलाई को थी, लेकिन 15 जुलाई की रात करीब दस बजे समाज के लोग उनके घर आए और ब्राह्मण से अंतिम संस्कार और तेरहवीं ब्राह्मण भोज न करने का दबाव डाला।
पंचायत का फैसला सुनाने आए लोगों ने साफ कह दिया कि वे लोग नहीं आएंगे। हमारे यहां चार हजार लोगों का न्योता था, जिसमें करीब पांच से सात सौ लोग ही नहीं आए। मैंने सभी समाज के लोगों को भोजन कराया। ये सभी लोग लोहरपुरा के रहने वाले हैं।

यादव समाज की पंचायत के समर्थकों से मिली भास्कर टीम विवाद की जड़ तक पहुंचने के लिए भास्कर टीम लोहरपुरा पहुंची। यहां नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद, जिन्होंने यादव समाज की पंचायत में सक्रिय भूमिका निभाई थी और कमल यादव के यहां त्रयोदशी भोज का विरोध किया था, से संपर्क का प्रयास किया गया।
हालांकि वे ग्वालियर जा चुके थे। इस दौरान मोहल्ले में मौजूद कुछ युवा और बुजुर्ग पंचायत के समर्थन में दिखे। उन्होंने उन लोगों की एक सूची भी तैयार की थी जो कमल यादव के यहां त्रयोदशी भोज में शामिल हुए थे।

यादव समाज के वकील ने बताई विवाद की जड़ इस दौरान लोहरपुरा में मौजूद वकील यादव ने विवाद की पृष्ठभूमि साझा की। उन्होंने कहा कि उत्तरप्रदेश में यादव समाज की कथावाचक की चोटी काटने की घटना और भिंड के बड़ैरा में कथावाचक राधा यादव को भागवत कथा का वाचन न करने देने की घटना के बाद समाज ने ब्राह्मणों से मांगलिक कार्य न कराने का निर्णय लिया। वकील यादव ने कहा- कमल ने पंडित से पूजा-अर्चना कराई, इसलिए उनकी मां की त्रयोदशी में यादव समाज का कोई व्यक्ति शामिल नहीं हुआ।

यादव समाजजन बोले- हमारी समाज में भी विद्वान लोग विवाद पर दीपू यादव ने कहा कि उनके समाज में विद्वान लोग हैं, जिन्हें कर्मकांड और धार्मिक ज्ञान है। हम अपने समाज के इन्हीं विद्वानों से कथा का वाचन कराएंगे। उमेश यादव ने कहा कि कथावाचक राधा यादव को आमंत्रित करने के बाद लौटा दिया गया, जो यादव समाज का अपमान है। इसी कारण हमने ब्राह्मण समाज का विरोध किया है।
इसके दैनिक भास्कर की टीम बड़ैरा गांव के उस मंदिर पर पहुंची, जहां भागवत कथा का आयोजन हुआ था। कथा विवाद के मुख्य पात्र मंदिर के पुजारी से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका कमरा बंद मिला।

राधा के पिता बोले- विरोध होने पर वापस आ गए कथावाचक राधा यादव के पिता रोशन यादव कहा कि कथा के लिए हरिगिरि दास महाराज ने बुक किया था। जब राधा अपनी कमेटी के साथ गांव पहुंची तो वहां के लोगों ने विरोध कर दिया। लोगों का कहना था कि ये कालिका माता का मंदिर है। यहां कथा करने पर अनिष्ट हो जाएगा। ये कथा चार जुलाई को होनी थी हम लोग एक दिन पहले पहुंचे थे।
बता दें, रोशन यादव पुलिस विभाग से एसआई पद से रिटायर्ड हुए हैं। भिंड, मुरैना समेत अन्य जिलों में पदस्थ रह चुके हैं।

गांववालों बोले- पुजारी ने बदला कथावाचक, हमने तो सम्मान किया विवाद पर स्थानीय निवासी इशरद खान ने बताया कि राधा यादव को लेकर गांव में किसी ने कोई विरोध नहीं किया था। यह मामला मंदिर के पुजारी की गलती से उपजा है। खान ने बताया कि उन्होंने पहले एक महिला को कथा वाचक के रूप में आमंत्रित किया और फिर पुरुष कथावाचक को ले आए। गांव में कथा वाचक को लेकर कोई चर्चा भी नहीं हुई।
इस मुद्दे पर अखिलेश शर्मा ने कहा कि गांव के किसी व्यक्ति ने विरोध नहीं किया था। मंदिर के पुजारी की कार्रवाई से गांव बेकार में बदनाम हुआ है। ब्राह्मणों पर झूठा आरोप लगा है, यह सब ठीक नहीं हुआ।

कथावाचक को लेकर कभी नहीं हुआ जातिगत विरोध बड़ैरा गांव के ही ब्रजेंद्र सिंह ने बताया कि बाबा हरि गिरिनाथ ने राधा यादव की जगह ब्राह्मण हरिकृष्ण शास्त्री को कथा करने बुला लिया। बाबा की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। यादव समाज का विरोध जायज है। गांव के पास स्थित एक अन्य मंदिर में पिछले दो वर्षों में राठौर समाज और कुशवाह समाज के वक्ताओं द्वारा कथा वाचन किया गया, लेकिन कभी किसी ने कोई विरोध नहीं किया।

