शराब दुकान में घुसकर मारने वाले असिस्टेंट कमिश्नर कौन

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जबलपुर के सहायक आबकारी आयुक्त संजीव दुबे का एक वीडियो बेहद चर्चा में है। इस वीडियो में वे शराब दुकान के भीतर कर्मचारी से अभद्रता करते नजर आ रहे हैं। शराब ठेकेदार का आरोप है कि हर महीने 2.64 करोड़ रुपए वीआईपी शुल्क नहीं देने पर दुबे ठेकेदारों को परेशान कर रहे हैं। ठेकेदार ने इसकी शिकायत सीएम समेत आला अधिकारियों से की है।

दैनिक भास्कर ने जब संजीव दुबे से बात की तो उन्होंने इन आरोपों को खारिज किया। दुबे ने कहा- जब मैंने दुकान पर पहुंचकर सेल्समैन से परमिट मांगा तो उसने मुझे गालियां दी थीं। मेरे स्टाफ के सामने एक मामूली कर्मचारी मुझे गाली दे रहा है, तो मैं क्या करता? मैं शराब माफियाओं को बहुत अच्छी तरह से जानता हूं।

बता दें कि संजीव दुबे वो अफसर हैं, जिन पर 2006 में भी शराब माफियाओं ने रतलाम में तलवार से जानलेवा हमला किया था। इस हमले में उनके एक हाथ की हथेली कट गई थी। 21 दिन के इलाज के बाद उनका हाथ जुड़ पाया था। एक उंगली अभी भी आधी कटी हुई है।

दुबे का कहना है कि शराब माफिया के अवैध कामों को उजागर करना मेरी ड्यूटी है। पढ़िए, और क्या कहा संजीव दुबे ने…

सवाल: आपको शराब दुकान में घुसकर कर्मचारी से मारपीट करने की जरूरत क्यों पड़ी? जवाब: मुझे एक महीने से शिकायत मिल रही थी कि जबलपुर में बरेला दुकान से बड़ी मात्रा में शराब शहर में आ रही है। 20 दिन पहले 40 पेटी शराब पकड़ी भी गई थी। खबर आई कि 3 गाड़ियां अवैध शराब रखी हुई है। हमने रैकी कराई। ये खबर मिली कि दुकान का सेल्समैन मिश्रा चौथी गाड़ी लोड करवा रहा है।

हम देखने गए थे कि दुकान में कितनी वैध शराब है और कितनी अवैध? हम उससे 25 मिनट तक कागज मांगते रहे। कभी वो ये रजिस्टर दिखाए, कभी वो लेकिन परमिट नहीं दिखा रहा था। न ही उसने स्टॉक रजिस्टर दिखाया। उल्टा वो हमसे ये कहने लगा कि चलो भागो यहां से, क्या फालतू चले आते हो। इसके बाद वो दबाव बनाने लगा। बदतमीजी से बात कर रहा था। संजीव दुबे ने कहा-

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मुझे लगा कि वो कुछ ऐसा न कर दे कि आगे से आबकारी विभाग उस पर एक्शन लेने से डरे।

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संजीव दुबे ने शराब दुकान में कर्मचारी से मारपीट की। घटना सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई।
संजीव दुबे ने शराब दुकान में कर्मचारी से मारपीट की। घटना सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई।

सवाल: ठेकेदार का आरोप है कि आप हर महीने 2.64 करोड़ रुपए वीआईपी चार्ज मांग रहे थे? जवाब: ये आरोप तब लगाया, जब उसकी दुकान से 429 पेटी शराब जब्त की। हम उसके खिलाफ अवैध शराब रखने के लिए 3 केस दर्ज कर चुके थे। वैध शराब की जानकारी न देकर अधिकारी पर आरोप लगा देना तो ठीक नहीं है। किसी और ठेकेदार ने तो ऐसा कोई आरोप नहीं लगाया है, न उन्होंने ऐसी कोई बात कही है।

समझने वाली बात ये है कि ये आरोप आप तब लगा रहे हो, जब आप पकड़े जा रहे हो। बाकी ठेकेदारों ने क्यों नहीं कहा कि उनसे कोई डिमांड की जा रही है? मेरे पास जो रिकॉर्ड है, उसके मुताबिक बरेला के विधायक, वहां नगर परिषद की अध्यक्ष मुझे डेढ़ महीने पहले ही लेटर लिख चुके थे कि बरेला का ठेकेदार बड़े पैमाने पर अवैध शराब बेच रहा है और असामाजिक गतिविधियों में शामिल है।

संजीव दुबे, कर्मचारियों से ठेकेदार के बारे में पूछताछ करते हुए।
संजीव दुबे, कर्मचारियों से ठेकेदार के बारे में पूछताछ करते हुए।

सवाल: इंदौर में रहते हुए 42 करोड़ के फर्जी चालान में भी आपकी भूमिका पर सवाल उठे हैं? जवाब: आरोप मुझ पर नहीं हैं। 42 करोड़ की गड़बड़ी मैंने ही पकड़ी थी। मैंने ही उसे सर्च किया था। कलेक्टर की रिपोर्ट में ये साफ लिखा है कि असिस्टेंट कमिश्नर दुबे ने ही ये पूरी गड़बड़ी पकड़ी है। 60 करोड़ में लगभग 25 करोड़ रुपए की राशि मैंने ठेकेदारों से तुरंत वसूल कर सरकार के खजाने में जमा करवा दी थी। वे कहते हैं,

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मेरा ट्रांसफर हो गया, नहीं तो मैं पूरी राशि वसूल करके छोड़ता। इस मामले में विभागीय जांच चल रही है। जांच में सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। पता चल जाएगा कि संजीव दुबे की क्या भूमिका थी।

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सवाल: 2006 में रतलाम में आप पर क्यों हमला हुआ था? जवाब: रतलाम में पदस्थ रहते हुए मैं अवैध शराब पकड़ने गया था। पहले 700-800 पेटियां पकड़ने की कार्रवाई हुई। राजस्थान की बनी रॉयल चैलेंजर्स शराब पकड़ी गई। कार्रवाई के बाद मैं घर आ गया था। तभी मुझे सूचना आई कि कुछ और अवैध शराब वहां रखी हुई है। मैं दोबारा गया। पूरी टीम लेकर गया था।

वहां मुझ पर माफिया के लोगों ने हमला कर दिया। वो सब तलवार लिए हुए थे। मेरे एक हाथ की हथेली आधी कट गई थी। दूसरे हाथ की उंगली लटक गई थी। मेरी पीठ और सिर पर भी तलवार की गंभीर चोट थी। मुझे याद है कि मैं खून से लथपथ था। मेरे दोनों फोन भी हमले में टूट चुके थे। मैंने एक ऑटो रुकवाया और उससे अस्पताल पहुंचने की कोशिश की।

उस ऑटो वाले के फोन से मैंने उस समय की तत्कालीन कलेक्टर दीप्ति गौड़ मुखर्जी और अपनी पत्नी को फोन पर सूचना दी। मुझे हेलिकॉप्टर से गंभीर हालत में इंदौर के बॉम्बे अस्पताल में शिफ्ट किया गया था। मैं 21 दिन अस्पताल में भर्ती रहा। मेरे एक हाथ में रॉड डालकर उसे जोड़ा गया। दूसरे हाथ की उंगली आधी ही बची है। इस हमले के बाद मैं जानता हूं कि शराब माफिया के लोगों से कैसे डील करना है।

सवाल: क्या जबलपुर में आपने दूसरे शराब ठेकेदारों पर कोई एक्शन लिया? जवाब: चार महीने पहले ही मैं जबलपुर में पदस्थ हुआ हूं। चार्ज लेने के बाद मैंने देखा कि शराब ठेके के एवज में सरकारी खजाने में 25.50 करोड़ रुपए की एफडी जमा की जानी थी, लेकिन ये राशि चार साल तक विभागीय फाइलों से गायब रही। इस दौरान एफडी पर मिलने वाला ब्याज ठेकेदारों के हिस्से में जाता रहा। मैंने इसकी जांच करवाई, तब ये एफडी विभाग को मिली है।

बैंक अफसरों के मुताबिक, 25.50 करोड़ रुपए की एफडी पर सालाना करीब डेढ़ करोड़ रुपए ब्याज बनता है। ऐसे में चार साल का ब्याज तो ठेकेदार को मिल चुका है।

दुबे बताते हैं कि साल 2021-22 में जबलपुर शहर के उत्तर और दक्षिण समूह की शराब दुकानों का ठेका मां वैष्णो इंटरप्राइजेस के नाम पर दिया गया था। इसके दो साझेदार थे– आशीष शिवहरे और सूरज गुप्ता।

नियमानुसार उन्हें 25.50 करोड़ रुपए की एफडीआर (फिक्स डिपॉजिट रिसीट) आबकारी विभाग के कार्यालय में जमा करनी थी। इस रकम की एफडी तो बैंक ऑफ महाराष्ट्र की तिलहरी शाखा, जबलपुर से बनवाई गई लेकिन विभाग को कभी सौंपी नहीं गई। इसके बाद ही 26 मई 2025 को ठेकेदारों ने 25.50 करोड़ की एफडी सरकारी खजाने में जमा की।

अब जानिए, क्या है मारपीट का मामला शराब कंपनी जागृति इंटरप्राइजेज के पार्टनर अजय सिंह बघेल ने प्रमुख सचिव को पत्र में बताया कि वह साल 2025-26 के लिए बरेला मदिरा समूह के लाइसेंसी हैं। 17 जुलाई को सहायक आबकारी आयुक्त संजीव दुबे बरेला शराब दुकान पहुंचे और गद्दीदार उपेंद्र मिश्रा से मालिक के बारे में पूछा। वह चुप रहा तो संजीव दुबे को यह बात नागवार गुजरी। उन्होंने गद्दीदार को लात-घूंसे मारे। दुकान के बाहर भी कर्मचारियों से पिटवाया।

प्रमुख सचिव को लिखे पत्र में यह भी कहा गया कि संजीव दुबे ने धमकी दी कि जिले में अब शराब दुकान नहीं चलाने दूंगा। सभी लोगों पर 34(2) का प्रकरण (अवैध शराब के कब्जे और वितरण) बनाकर जेल भिजवा दूंगा।

इसके बाद वह धनपुरी दुकान पहुंचे, वहां भी सेल्समैन अमर गुप्ता के साथ मारपीट की और सीसीटीवी डीवीआर अपने साथ ले गए। यहां धमकी देने के बाद बरेला नंबर 2 और पड़वार दुकान में भी कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज की गई।

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