पहलगाम हमले के 3 महीने बीते, डल झील खाली-लालचौक सूना

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’पहलगाम हमले ने टूरिज्म को गहरी चोट पहुंचाई है। पहले अप्रैल, मई और जून में 90 दिन का पीक सीजन रहता था। हाउस बोट, होटल और ड्राइवर सबके लिए यही कमाई का वक्त था। अब सब ठंडा पड़ा है। उम्मीद थी कि अमरनाथ यात्रा शुरू होगी तो शायद हालात बदलें। यात्रा तो अच्छी चल रही है, लेकिन टूरिस्ट नहीं आ रहे।’

श्रीनगर में हाउस बोट चलाने वाले मोहम्मद याकूब आस-पास पसरे सन्नाटे से मायूस हैं। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के तीन महीने बाद भी कश्मीर में टूरिज्म ठप पड़ा है। पहले सुरक्षा के चलते 87 में से 48 टूरिस्ट स्पॉट बंद थे। अब वो भी खोल दिए गए हैं, लेकिन टूरिस्ट नहीं आ रहे हैं। हालांकि, अमरनाथ यात्रा की वजह से पहलगाम और सोनमर्ग में कुछ जगहें अब भी बंद हैं।

कश्मीर में टूरिज्म ही इनकम का जरिया है। टैक्सी, होटल, बोट और घोड़े वालों से लेकर कपड़ा बाजार तक की कमाई इसी पर निर्भर है। न के बराबर टूरिस्ट आने से इनकी जिंदगी मुश्किल हो गई है। कई कर्ज लेकर खर्च चलाने को मजबूर हैं। गुलमर्ग के रहने वाले मोहम्मद सुभान इन्हीं में से एक हैं। वे गुलमर्ग में पिछले 10 साल से ATV बाइक चला रहे हैं। अब पहलगाम के बाद काम ठप हुआ तो बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्ज में डूब गए हैं।

कश्मीर में सबसे ज्यादा टूरिस्ट्स श्रीनगर, गुलमर्ग, सोनमर्ग और पहलगाम ही पहुंचते हैं। हमले के लगभग 3 महीने बाद अब टूरिज्म किस हाल में है, ये जानने के लिए दैनिक भास्कर कश्मीर पहुंचा।

श्रीनगर की डल झील से लेकर बोट हाउस तक सब खाली कश्मीर का जिक्र आते ही जेहन में सबसे पहली तस्वीर श्रीनगर के लाल चौक की आती है। इसके बाद बॉलीवुड फिल्मों की फेवरेट डल-झील याद आती है। कश्मीर आने वाले भी सबसे पहले श्रीनगर में इन दो जगहों पर ही जाते हैं। हम भी सबसे पहले डलझील पहुंचे। ये टूरिस्ट्स का फेवरेट स्पॉट है, लेकिन यहां अब भी सन्नाटा पसरा है।

डल-झील पर ज्यादातर टूरिस्ट बोटहाउस में ही रुकते हैं। झील से लेकर बोटहाउस तक सब खाली ही नजर आया। वीकेंड के चलते यहां के कुछ लोकल लोग परिवारों के साथ यहां जरूर दिख गए, लेकिन बाहरी टूरिस्ट बमुश्किल ही आ रहे हैं। कश्मीर हाउस बोट ओनर्स एसोसिएशन के पूर्व जनरल सेक्रेटरी मोहम्मद याकूब हमें बोटहाउस वालों का हाल बताते हैं।

डल झील में याकूब का न्यू गोल्डन फ्लावर हाउस बोट है। ये उनके परिवार का खानदानी काम है। 1916 से चल रहे इस काम आगे बढ़ाने वाले परिवार की चौथी पीढ़ी हैं। याकूब के मुताबिक, उनकी हाउस बोट पर माधवराव सिंधिया, लता मंगेशकर, शम्मी कपूर, ओम प्रकाश और जुबिन मेहता जैसे लोग रुक चुके हैं।

स्कूल फीस नहीं भर सके, बच्चों की पढ़ाई रुकी याकूब बताते हैं, ‘पिछले तीन सालों में आर्टिकल-370 हटने के बाद सब बढ़िया चल रहा था। खूब टूरिस्ट आ रहे थे। पहलगाम हमले के बाद उसका 4-5% ही रह गया है। तीन कमरों वाले हाउस बोट से पहले रोज 13,500 रुपए कमा लेता था। पहलगाम हमले से 15 जून तक करीब 1 लाख रुपए का नुकसान हुआ। मेरा 13 लोगों का परिवार इसी पर निर्भर है। अब बच्चों की फीस तक नहीं भर पा रहे हैं। इसी वजह से स्कूल ने उन्हें एग्जाम में नहीं बैठने दिया।‘

याकूब सरकार और प्रशासन से किसी भी तरह की मदद न मिलने से नाराज भी हैं। वे कहते हैं, ‘हाउस बोट और ड्राइवरों का कारोबार हैंड-टु-माउथ है। ये कुदरत का करिश्मा है कि हम जिंदा हैं। कर्ज लेकर और घर का सोना बेचकर हमने प्री-बुकिंग वालों के पैसे लौटाए।‘

लाल चौक सूना, व्यापारी बोले- सरकार बस रोजी-रोटी चलवा दे इसके बाद शाम के वक्त हम लाल चौक पहुंचे। आम दिनों में शाम के वक्त यहां काफी भीड़ जमा होती है। लाल चौक का मार्केट खरीदारी के लिए फेमस है। वहीं इसके बीचोंबीच बना क्लॉक टावर (घंटाघर) सेल्फी पॉइंट है। रविवार के दिन भी बमुश्किल ही भीड़ दिख रही थी। अमरनाथ यात्रा से लौटे कुछ लोग जरूर शाम को चौक पर इकट्ठा हुए थे। वो झंडा लेकर फोटो खिंचवा रहे थे। इसके अलावा कुछ लोकल कश्मीरी ही थे।

यहां शॉल बेचने वाले एक दुकानदार शौकीन ने कैमरे पर न आने की शर्त पर हमसे बात की। वे कहते हैं, ‘बिजनेस में इतना नुकसान हुआ है कि जवान लोग तो कश्मीर छोड़कर दूसरी जगह काम करने जा रहे हैं। जो बाहर नहीं जा सकते, वो दुकानों पर खाली बैठे हैं।‘ शब्बीर सरकार से व्यापारियों की मदद की अपील करते हुए कहते हैं कि बस रोजी-रोटी चलाने लायक मदद मिल जाए।

गुलमर्ग पहुंच रहे टूरिस्ट, लेकिन सिर्फ 20% ही भीड़ लाल चौक के बाद हम गुलमर्ग पहुंचे। ये श्रीनगर से करीब 50 किलोमीटर दूर है। श्रीनगर के बाद टूरिस्ट गुलमर्ग ही जाते हैं। यहां सर्दियों में काफी बर्फ रहती है इसीलिए लोग स्कीइंग, स्नो बोर्डिंग और स्केटिंग करने आते हैं। जबकि गर्मी की छुट्टियों में यहां लोग पहाड़ों वाली मोटरबाइक ATV और घंटोला यानी केबल कार की सवारी करते हैं।

पहलगाम हमले के बाद सुरक्षा पहले से ज्यादा चाक-चौबंद है। श्रीनगर से निकलते ही हर थोड़ी-थोड़ी दूर पर सेना के जवान तैनात दिखे और चौकियां भी दिखीं। गुलमर्ग पहुंचने पर हमें विदेशी महिला टूरिस्ट्स का एक ग्रुप मिला। बात करने पर पता चला कि ग्रुप में 10 महिलाएं ताइवान और एक 1 इटली से आई हैं। ताइवान से आईं सिल्विया ने हमसे बात की। वो पहली बार कश्मीर आईं हैं।

सिल्विया कहती हैं, ‘हमें कश्मीर बहुत पसंद आया। यहां के लोगों में बहुत मेहमान नवाज हैं। हम श्रीनगर से सफर शुरू करके यहां पहुंचे हैं। ये हमारा दूसरा हॉल्ट है। हम 11 दिन के लिए कश्मीर और लद्दाख घूमने आए हैं।‘ वे सुरक्षा इंतजामों पर कहती हैं कि बहुत सेफ और साफ-सुथरा माहौल है। हर जगह आर्मी है, इसलिए कोई डर नहीं।

3-4 सौ रुपए की कमाई, कर्ज लेकर घर चला रहे टूरिस्ट्स के इंतजार में कई ATV स्टैंड पर खड़ी हैं। हमने ATV चलाने वाले मोहम्मद सुभान से बात की। वे कहते हैं, ‘अच्छे सीजन में दिन के 3-4 हजार रुपए कमा लेते थे। हमले के बाद एक महीने तक कोई आया ही नहीं। परिवार में पांच लोग हैं। तीनों बच्चे पढ़ रहे हैं। मैं अकेला कमाने वाला हूं। अब कमाई नहीं हो रही, तो पड़ोसियों से या बगीचे वालों से कर्ज लेना पड़ता है। यहां हर व्यक्ति पर तकरीबन 2-4 लाख का कर्ज है।‘

गुलमर्ग के रहने वाले शब्बीर अहमद भी 10 साल से ATV ही चला रहे हैं। वे बताते हैं, ‘हमले के बाद से टूरिज्म 80% कम हो गया है। पहले सीजन में हर दिन 10,000 गाड़ियां आती थीं। एक ATV ड्राइवर 3-4 हजार रुपए कमा लेता था। हमले के बाद 8-10 दिन सब बंद रहा। अब धीरे-धीरे शुरू हुआ। सिर्फ 100-150 गाड़ियां ही आ रही हैं। कमाई घटकर 300-400 रुपए रह गई है। मेरे साथ 108 लोग ATV चलाते हैं, लेकिन अब गाड़ियां खड़ी हैं।

शब्बीर कहते हैं, ‘मेरी दो बेटियां हैं, जो चौथी और पहली क्लास में पढ़ती हैं। 22 अप्रैल से स्कूल की फीस नहीं दी। कर्ज लेकर और बचे हुए पैसों से घर चल रहा है। स्कूल वाले फीस मांगते हैं, लेकिन हमें यही कहना पड़ता है कि टूरिस्ट आएंगे तभी तो भर पाएंगे।‘

गुलमर्ग में ATV स्टैंड पर खड़ी ये गाड़ियां टूरिस्ट्स के इंतजार में धूल खा रही हैं।
गुलमर्ग में ATV स्टैंड पर खड़ी ये गाड़ियां टूरिस्ट्स के इंतजार में धूल खा रही हैं।

पहलगाम की वजह से डरे थे, कश्मीर आकर वो भी नहीं रहा जयपुर के कन्हैया लाल भी परिवार के साथ पहली बार कश्मीर घूमने आए हैं। कन्हैया पहले वैष्णो देवी गए, फिर वंदे भारत से श्रीनगर आए। सफर के बारे में पूछने पर कहते हैं, ‘पहलगाम हमले की वजह से थोड़ा डर और चिंता थी। यहां आकर अब वो भी निकल गया है। सुरक्षा के बेहतर इंतजाम हैं। हमें कहीं कोई दिक्कत नहीं हुई। कश्मीर के लोग बहुत अच्छे हैं, सबने बहुत प्यार दिया।‘

वो लोगों से भी अपील करते हैं कि यहां अब डरने की कोई बात नहीं है। कश्मीर में बेखौफ होकर आएं, छुट्टियां एंजॉय करें। कन्हैयालाल के साथ आए 7 लोगों के ग्रुप में अनीता भी हैं। वे कहती हैं,

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सरकार ने यहां सुरक्षा के कड़े और अच्छे इंतजाम किए हैं। सारी सुविधाएं शानदार हैं। हमें कहीं कोई परेशानी नहीं हुई।

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चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा इंतजाम, टूरिस्ट्स से कश्मीर आने की अपील कश्मीर में क्या सुरक्षा इंतजाम हैं। टूरिज्म पर निर्भर लोगों की प्रशासन क्या मदद कर रहा है,? ये जानने के लिए हमने गुलमर्ग डेवलपमेंट अथॉरिटी के CEO तारिक हुसैन से बात की।

वे भी टूरिस्ट्स से कश्मीर आने की अपील करते हुए कहते हैं, ‘पहलगाम हमले को लेकर कश्मीर में हर घर में दुख है। टूरिज्म यहां की इकोनॉमी की रीढ़ है। हमारी आबादी का बड़ा हिस्सा इससे जुड़ा है। प्रशासन और सरकार ने कई मीटिंग्स और कॉन्फ्रेंस के जरिए टूरिज्म को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश की है। अब धीरे-धीरे इसके नतीजे दिख रहे हैं।‘

सुरक्षा इंतजामों पर वे कहते हैं, ‘गुलमर्ग टूरिस्ट डेस्टिनेशन होने के साथ-साथ रणनीतिक लिहाज से भी अहम है। जम्मू-कश्मीर पुलिस, BSF, CRPF और सेना पूरी तरह अलर्ट है।‘

पहलगाम हमले के बाद और अमरनाथ यात्रा को देखते हुए चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा जवान तैनात हैं।
पहलगाम हमले के बाद और अमरनाथ यात्रा को देखते हुए चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा जवान तैनात हैं।

अमरनाथ यात्रा के चलते सोनमर्ग और पहलगाम टूरिस्ट्स के लिए बंद 3 जुलाई से अमरनाथ यात्रा जारी है। इसके लिए दो रूट तय किए गए हैं। एक पहलगाम और दूसरा बालटाल। ज्यादातर अमरनाथ यात्री पहलगाम होते हुए जाते हैं। बालटाल वाले दूसरे रूट पर सोनमर्ग पड़ता है। इसलिए सुरक्षा इंतजाम के चलते हिल स्टेशन सोनमर्ग फिलहाल बंद है। वहीं पहलगाम में भी ज्यादातर टूरिस्ट स्पॉट बंद रखे गए हैं।

हम पहलगाम भी पहुंचे, जहां आतंकी हमला हुआ था। यहां हमले वाली बायसरन घाटी को भी फिलहाल बंद रखा गया है। दूसरी सबसे फेमस बेताब वैली भी फिलहाल बंद है। अमरनाथ यात्रा के चलते पहलगाम की सड़कों पर भारी भीड़ जरूर दिख जाएगी। हालांकि, खाली पड़ी दुकानें, होटल और रेस्टोरेंट हर तरफ नजर आते हैं।

पहलगाम में टैक्सी चलाने वाले एजाज अहमद लोगों को यहां के मेन मार्केट से 6 किलोमीटर दूर बेताब वैली और 4 किलोमीटर दूर बायसरन घाटी छोड़ते हैं। वे बताते हैं कि अमरनाथ यात्रा शुरू होने से टूरिस्ट स्पॉट बंद हैं। इससे उनके काम पर असर पड़ा है। वे कहते हैं, ‘हमले के बाद ये टूरिस्ट स्पॉट 10-15 दिन के लिए खुले। यात्रा शुरू होते ही फिर बंद कर दिए गए।‘

एजाज कहते हैं कि टूरिस्ट स्पॉट बंद होने से हमारे दूसरे काम ठप हैं। काम सिर्फ यात्रियों तक सीमित हो गया है। हालांकि, वे उम्मीद जताते हैं कि जल्द ही सारे टूरिस्ट स्पॉट दोबारा खोल दिए जाएंगे।

होटलों में 50% डिस्काउंट, फिर भी खाली पड़े मार्केट के अलावा पहलगाम में होटल, रिसॉर्ट और रेस्टोरेंट भी खाली पड़े हैं। पहलगाम में फेमस असल रिसॉर्ट में भी सन्नाटा है। रिसॉर्ट के जनरल मैनेजर मुदस्सिर कहते हैं कि 50% डिस्काउंट के बाद भी कमरे खाली हैं। मार्केट के हाल पर वे कहते हैं, ‘हमले के दिन भी सारी प्री-बुकिंग्स फुल थीं, लेकिन इसके बाद 80-90% बुकिंग्स कैंसिल हो गईं। हमें पूरा पैसा रिफंड करना पड़ा।’

अमरनाथ यात्रा के प्रभाव पर वे बताते हैं, ‘यात्रा शुरू होने से थोड़ी उम्मीद जगी थी, लेकिन यात्री बजट होटल्स पसंद करते हैं। हमने 50-65% डिस्काउंट शुरू किया है। पहले 10 हजार रुपए का कमरा अब 5 हजार और 5 हजार का ढाई हजार में उठा रहे हैं। फिर भी टूरिस्ट्स का फुटफॉल बहुत कम है।’

टूरिज्म को पटरी पर लाने के लिए क्या कर रही सरकार? 2024 में कश्मीर में टूरिज्म अपने पीक पर था। इस साल 29.5 लाख टूरिस्ट आए और इकोनॉमी को काफी फायदा हुआ। अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले ने सब कुछ बदल दिया। केंद्र सरकार ने टूरिस्ट्स की मदद के लिए ट्रैवल ऑपरेटर्स और होटल मालिकों को बुकिंग रद्द करने की फीस माफ करने का निर्देश दिया।

80% बुकिंग रद्द हुईं, होटल खाली हो गए, और पर्यटन ठप हो गया। ये लोकल लोगों और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका था।

हालांकि, पर्यटन को फिर से शुरू करने के लिए जम्मू-कश्मीर होटल और रेस्तरां एसोसिएशन (JKHARA) ने होटल किराए में 65% छूट दी। लोकल टूरिस्ट्स के लिए खास पैकेज लॉन्च किए हैं। टूरिज्म को वापस पटरी पर लाने के लिए कश्मीर में बंद किए गए 48 पर्यटन स्थलों में से 16 को 14 जून से फिर से खोला गया है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अच्छी तादाद में टूरिस्ट कश्मीर में फिर आ रहे हैं।

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