एमपी में 8 दिन पहले एंटर हो सकता है मानसून

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इस बार मध्यप्रदेश में मानसून की दस्तक 8 से 10 दिन पहले हो सकती है। सोमवार को मानसून महाराष्ट्र के मुंबई, पुणे समेत कई शहरों में 15 दिन पहले ही पहुंच गया। इधर, मंगलवार को मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक एमपी समेत देश में होने वाली बारिश को लेकर पूर्वानुमान भी जारी करेंगे। अप्रैल में इस सीजन 38 से 39 इंच बारिश होने की उम्मीद जताई गई थी।

मौसम विभाग के अनुसार, सोमवार को मानसून ने मुंबई, पुणे, कलबुर्गी, महबूबनगर, कावली समेत अमरतला, गोलपारा में दस्तक दे दी। यहां मानसून के आने की सामान्य तारीख 10 जून तक है। मानसून की रफ्तार अभी ठीक है। यही रफ्तार रहती है तो मध्यप्रदेश में मानसून 4 से 7 जून तक आ सकता है।

बता दें कि प्रदेश में मानसून के आमद की सामान्य तारीख 15 जून है। हालांकि, पिछले कुछ सालों से यह 18 से 22 जून के बीच ही पहुंच रहा है। पिछले साल यानी 2024 में मानसून की 21 जून को एंट्री हुई थी। यह 6 दिन देरी से प्रदेश में पहुंचा था। इस बार जून के शुरुआत में ही मानसून के एंटर होने की उम्मीद है।

नई दिल्ली से जारी होगा मानसून का फोर कास्ट मंगलवार शाम को नई दिल्ली से मौसम विभाग मानसून का फोर कास्ट जारी करेगा। इस दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून को लेकर पूर्वानुमान जारी किया जाएगा। एमओएस सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन और डीजीएम आईएमडी डॉ. एम. महापात्रा मानसून के बारे में बताएंगे।

दक्षिणी हिस्से से होगी मानसून की एंट्री मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश के दक्षिणी हिस्से यानी मंडला, सिवनी, डिंडौरी, बालाघाट, अनूपपुर, बुरहानपुर, पांढुर्णा, बैतूल, बड़वानी के रास्ते से मानसून दस्तक देगा। ग्वालियर-चंबल में सबसे लेट 25 जून तक पहुंचेगा। भोपाल, इंदौर में यह 20 से 22 जून के बीच आ सकता है।

दक्षिण-पश्चिम मानसून ने पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर जिले में प्रवेश किया था। इस बार भी इन्हीं जिलों से मानसून के आने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा ने बताया कि इस बार मानसून ने 8 दिन पहले ही देश में दस्तक दी है। इससे पहले 2009 को भी मानसून 23 मई को पहुंच गया था। फिलहाल मानसून के आगे बढ़ने की स्थिति ठीक है। मध्यप्रदेश में इस बार भी समय से दस्तक देने की स्थिति बन रही है।

बारिश के सामान्य से बेहतर रहने की उम्मीद प्रदेश में इस बार मानसून के सामान्य से बेहतर रहने की उम्मीद जताई जा रही है। अनुमान के मुताबिक 104 से 106% यानी औसत 38-39 इंच बारिश हो सकती है। जबलपुर-शहडोल संभाग में सबसे ज्यादा पानी गिरेगा। ग्वालियर, चंबल, इंदौर, उज्जैन और भोपाल संभाग में भी कोटा फुल हो सकता है।

साल 2023 में प्रदेश के 25 से ज्यादा जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई थी, लेकिन 2024 में भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर समेत 44 जिलों में कोटे से ज्यादा बारिश हुई थी। नतीजा ये रहा है कि सोयाबीन का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 2 क्विंटल तक बढ़ गया था। वहीं, गेहूं-चने के लिए भी पानी पर्याप्त गिरा था। मई के आखिरी में मौसम विभाग एक और अपडेट जारी करेगा। इसमें बारिश को लेकर तस्वीर साफ हो जाएगी। अप्रैल में हुए मानसून फोरकास्ट में कहा था कि जून से सितंबर तक मानसून सामान्य से बेहतर रहेगा।

इन जिलों में अच्छी बारिश होने की उम्मीद मौसम विभाग ने प्रदेश के ज्यादातर जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश होने का अनुमान जताया है। जबलपुर, शहडोल संभाग में सबसे अधिक पानी गिरने की उम्मीद है। वहीं, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभाग के ज्यादातर जिलों में डेढ़ सौ फीसदी तक पानी गिर सकता है। उत्तरप्रदेश बॉर्डर से लगे कुछ जिलों में सामान्य बारिश के भी आसार हैं।

2017 में सबसे कम, 2019 में जमकर बारिश हुई पिछले 10 साल के बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2017 में सबसे कम बारिश हुई थी। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37.3 इंच है। इसके मुकाबले औसत 29.9 इंच बारिश हुई थी। साल 2015 में 32.4 इंच, 2018 में 34.3 इंच बारिश दर्ज की गई थी।

सबसे ज्यादा पानी साल 2019 में 53 इंच हुई थी। 2021 और 2023 में सामान्य से थोड़ी ही कम बारिश हुई थी। इस तरह कह सकते हैं कि पिछले 6 साल से प्रदेश में अच्छी बरसात हो रही है। अगर मौसम विभाग का इस साल का अनुमान सटीक बैठता है तो लगातार 7वें साल प्रदेश में सामान्य से ज्यादा बारिश होगी।

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