पुजारी ने जेब में राखी दक्षिणा

#पुजारी
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पण्डे, पुजारी, महंत, पंडित जी आदि शब्द आपने खूब सुने होंगे और व्यक्तिगत जीवन मे आप इनसे परिचत भी होंगे !!
हमारे यहां ग्रामीण अंचल में बामण(ब्राह्मण) दादा के नाम से भी इनको जाना जाता है !!
दैनिक जीवन मे होने वाले हवन/शादी/जन्म/मौत/गृह-प्रवेश/गाड़ी आदि के अवसर पर होने वाले पूजन एवं अन्य संस्कार कारण तथा विभिन्न अवसरों पर ज्योतिषीय पंचाग के आधार पर शुभ-अशुभ मुहूर्त लग्न देखना इनका #पेशा है … हांजी आप सही समझे इनका पेशा अर्थात जीविकोपार्जन का साधन है !!
#दूसरापहलू मेरी नज़र में ….??
◆ पुजारी कोई भगवान नहीं है वो भी हमारी तरह एक आम इंसान है जिसकी जरूरते हमसे मिलती-जुलती है जैसे- रोटी, कपड़ा, मकान, बच्चों की शिक्षा, दवाई, गाड़ी, मोबाइल इत्यादि जो इनको भी पैसे देकर बाजार से उसी भाव से लेने पड़ते है जिससे हम लेते है ! कभी आपने देखा है किसी स्कूल, अस्पताल में कहीं पर की अरे आप तो फलां मंदिर के पुजारी जी हो आपसे क्या फीस लेना ?
◆ पैसा सबको यहाँ स्किल और समय के अनुपात में मिलता है जैसे एक प्राइमरी के शिक्षक की (स्किल * आठ घंटे) का भुगतान किसी IAS कोचिंग के टीचर की (स्किल * आठ घंटे) का भुगतान से बहुत कम होता है, यहां पर समय बराबर है लेकिन स्किल का फर्क है !!
उसी तरह से इनकी ज्योतिषीय गणना एवं मंत्रोच्चार की (स्किल * समय) के अनुरूप इनका भी मेहनताना होता है जो इनको देते समय हमारे पेट मे मरोड़ उठने लगती है !!
◆ जिस तरह से किसी विशेष शिक्षक/चिकित्सक आदि की सेवाओं की जरूरत नहीं होने पर हम उनको पैसे नहीं देते है; ठीक उसी तरह से पंडित जी की जरूरत नहीं महसूस हो तो आप अपने पूरे के पूरे पैसे बचा सकते हो !!
पंडित जी को दक्षिणा देना हमारी जरूरत है मजबूरी नहीं !!
◆ जिस तरह से हर पेशे में सही गलत का अनुपात होता है, जैसे कुछ चुनिंदा शिक्षक/चिकित्सक गलत होने पर आप पूरे शिक्षक/चिकित्सक वर्ग को गलत नहीं ठहरा सकते ठीक उसी तरह से कुछ पंडितों के आचरण के लिए पूरे वर्ग को उस नज़र से नहीं देखे !!
समाज मे बाकी लोगो से गलतियां हो सकती है तो उनसे भी हो सकती है !!
◆ जैसे बढई, नाई, कुम्हार, सुनार, बनिया आदि पेशों में कार्य मुखयतः इन्हीं जातियों के लोग करते है ठीक उसी तरह पुजारी का कार्य भी मुख्यतः ब्राह्मण जाति के लोग करते है लेकिन अब समय बदल रहा है तो सभी कार्य सभी जातियों के लोग करने लग गए है !!
मेरे आसपास ऐसे बहुत उदाहरण है जहां कार्य विशेष में अन्य जातियों के लोग भी वो कार्य करते है !!
◆ मुझे नहीं पता मेरा समर्थन या विरोध कितना मायने रखता है लेकिन फिर भी पुजारी जी ने पैसे अपनी जेब मे रख लिए और इस बात के लिए मैं उनके समर्थन में हु और उनकी आलोचना या उन पर कारवाही करने वालो का विरोध करता हूं।
मनोज महला भाई की वॉल से सादर
