अभी तक ओबामा सीआइए सोरोस गिरोह को डीप स्टेट के नाम से भी जाना जाता हे, भारत के विरोध में पीछे रह कर काम कर रहे
अभी तक ओबामा सीआइए सोरोस गिरोह को डीप स्टेट के नाम से भी जाना जाता हे, भारत के विरोध में पीछे रह कर काम कर रहे थे, अब सीधे सामने आ गए, क्योंकि उनके सभी प्यादे गांधी, कम्युनिस्ट, इस्लामिक आतंकवादी से लेकर खालिस्तानियों से लेकर केजरीवाल तक कुछ नही कर पाए, भारत को आगे बड़ने से रोक नही पाए, मोदी सरकार के खिलाफ इनके सारे षड्यंत्र को जनता ने नाकाम कर दिया,
भारत की तरक्की इन्हे बर्दाश्त नहीं हो रही, क्यों अपने पैरों पर खड़ा हो रहा हे, क्यों प्रथम 5 इकोनॉमी में पहुंचा, इंपोर्ट करने की जगह अब हथियारों की एक्सपोर्ट करने लगा, राजनीतिक रूप से सक्षम हो गया, की भारत की बात का असर दुनिया में होने लगा,
यही सब इन्हे बर्दाश्त नहीं हो रहा, White Supremacy की नकाब से दुनिया को देखते हे,
मोदी जी सीआइए के पिट्ठू नही बने, उन्होंने अपने देश को प्रथम रखा, सभी लोग जानते है, सीआइए अमेरिका और दुनिया को चलाती हे, व्यापारिक संबंध रखना उनकी मजबूरी भी हे, इसीलिए मोदी सरकार की नीति “Make In India” ko मानना पड़ा,
अभी चुनाव हे, इस चुनाव के समय बहुत कुछ उठापटक, और अनहोनी होने की आशंका हे, क्योंकि ये गिरोह किसी भी तरह मोदी को रोकना चाहते हे, इसके लिए हर संभव प्रयास करेंगे, अब तो ये लोग खुलकर सामने आगे गए,
मेरे सभी भारत वासियों से अनुरोध हे अपनी सरकार पर विश्वास रखें, किसी भी तरह के षड्यंत्र में फसने से बचे, सतर्क रहे, समझदार रहे, 2024 के चुनाव के बाद भारत और आगे जायेगा,
विपक्षी सिर्फ झासेबाजी जुमलेबाजी में लगे हे, उनकी निगाहे भारत की जनता के खजाने पर है, तरह तरह के लुभावने प्रलोभन देने में लगे हे, ऐसे प्रलोभन क्या मोदी जी नही दे सकते, पर उन्हे देश की चिंता हे, इन प्रलोभनों में आने के बजाए राष्ट्र की भी सोचे,
याद करे 2014 के पहले देश की हालत क्या थी, हम भारतीय इसे अपनी तकदीर समझते थे, कभी उन्नति के बारे में सपना भी नही देखते थे, पकिस्तान जैसा 2 कौड़ी देश हमारे लिए हव्वा बना हुआ था, चाइना के सामान से बाजार अटा पड़ा था, भ्रष्टाचार कमीशनखोरी चरम पर थी, लालची नेता अपना घर भरे हुवे थे, भारत की सेना प्रेक्टिस के लिए गोलियों को तरसती थी, उनके ढंग के जूते वर्दी खरीदने के पैसे नही थे, हथियारों की तो छोड़ो,
जो बच्चे अच्छा पड़ते थे वो उज्ज्वल भविष्य के लिए सीधे बाहर निकल जाते थे, डिग्रियां गले में लटकाए नौकरी की बाट जोहते थे, अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए लोन लेना मुश्किल होता था,
जुगाड वाले कमीशन देकर लोन लेकर भाग जाते थे, वसूली नही होती थी,
सब याद कर आगे का रास्ता बनाए,
???? जयहिंद
