खूंखार आतंकी भटकल के गांव गया था फैजान
‘मैंने जिंदगीभर मेहनत करके अपना और परिवार का गुजारा चलाया। आज तक हराम का काम नहीं किया। अगर औलाद गलत करें तो इसमें मेरा क्या दोष है? आपके भी बच्चे होंगे, कल वे कुछ करेंगे तो उसमें आपका क्या कसूर होगा? इस घटना ने मुझे अंदर तक तोड़ दिया। मैं बीमार हूं और दवाई से जिंदगी काट रहा हूं। आज मेरी स्थिति बहुत खराब है।
मैं तो ऊपर वाले से हमेशा यही दुआ करता हूं कि जो जैसा करेगा, वह वैसा भरेगा। मुझे हिंदुस्तान के कानून पर भरोसा है। मुझे कैमरे पर कुछ भी नहीं बोलना है।’
दोपहर की नमाज अदा करने के लिए निकल रहे हनीफ शेख (75) का गला बोलते-बोलते रुंध जाता है। ऐसा बोलने के बाद वे अपनी साइकिल लेकर वहां से मस्जिद की तरफ निकल जाते हैं। वे लेथ मशीन का काम करते हैं।
खंडवा के कंजर मोहल्ले की संकरी गलियों से होता हुआ एक रास्ता सलूजा कॉलोनी में खुलता है। कॉलोनी के बीचो-बीच दो मंजिला घर बना हुआ है। जिस पर अंग्रेजी में “AMINMANSION 1987” लिखा हुआ है। 4 जुलाई को तड़के 3:56 बजे अचानक मध्यप्रदेश एटीएस (एंटी टेररिज्म स्क्वाड) ने उस घर को घेर लिया था। परिवार और मोहल्ले वाले कुछ समझ पाते, उससे पहले ही एटीएस ने घर में घुसकर हनीफ शेख के पुत्र फैजान शेख (34) को गिरफ्तार कर लिया।
दैनिक भास्कर ने खंडवा पहुंचकर फैजान के परिवार, दोस्तों और मोहल्ले के लोगों से बातचीत की। पढ़िए रिपोर्ट…
पहली बार रकीब की गिरफ्तारी के समय रडार पर आया फैजान
जनवरी 2023 में अंकुर नगर के रहने वाले रकीब को मध्यप्रदेश एटीएस ने गिरफ्तार किया। उस पर आरोप था कि वह सिमी से जुड़ा हुआ है। रकीब और फैजान दोनों मैकेनिक थे, इस कारण दोनों में गहरी दोस्ती थी। रकीब टेलीग्राम के जरिए कोलकाता में बैठे हुए सिमी के सदस्यों से जुड़ा हुआ था। जब एटीएस ने रकीब को गिरफ्तार किया तो उस समय फैजान ने एटीएस का विरोध भी किया था।
इस कारण फैजान एटीएस के रडार पर आ गया था। बाद में एटीएस ने उसे गिरफ्तार करके पूछताछ की और ठोस सबूत नहीं मिलने के कारण उसे छोड़ दिया। इस दौरान फैजान ने एटीएस के अधिकारियों के नंबर ले लिए और अपने पास सेव कर लिए।

बड़े भाई ने कहा- भड़काऊ पोस्ट करता था फैजान
बड़े भाई इमरान ने बताया कि फैजान को सोशल मीडिया पर वीडियो देखने का बड़ा शौक था। जब वह काम से लौटकर घर पर आता था तो वाट्सएप स्टेटस पर भड़काऊ पोस्ट शेयर करता था। हम सब घर वाले भी उस से परेशान थे। बहुत समझाने के बाद भी वह मानता नहीं था।
रात 8 बजे खाना खाने के बाद घर से निकल जाता था। देर रात लौटता था। वह मोहल्ले के बच्चों का कट्टरपंथी स्लोगन से ब्रेन वॉश भी करता था।
स्टेटस लगाकर एटीएस के अधिकारियों को चिढ़ाता था
फैजान को एटीएस ने पहली बार पूछताछ के लिए 2023 में हिरासत में लिया था। इमरान बताते हैं कि फैजान लगातार एटीएस के संपर्क में था। उसके मोबाइल में एटीएस के अधिकारियों के नंबर सेव थे। वह वाट्सएप पर इंडियन मुजाहिदीन, सिमी और धार्मिक कट्टरपंथ संबंधित पोस्ट करता था।
जब तक एटीएस के अधिकारी उस स्टेटस को नहीं देखते, तब तक वह वाट्सएप पर स्टेटस को लगाए रखता। जब एटीएस के अधिकारी उस स्टेटस को देख लेते तो वह खुश होता। कभी-कभी रिश्तेदार भी फैजान के परिवार वालों को फोन करके बताते थे कि वह भड़काऊ वाट्सएप स्टेटस लगाता है, आप उसे समझाइए।
परिवार के समझाने के बाद भी फैजान नहीं मानता था क्योंकि उसका मकसद इंडियन मुजाहिदीन का प्रचार-प्रसार करना और मशहूर होना था। रात को टी स्टॉल पर उसकी मुलाकात सिमी के पूर्व सदस्यों से भी होती रहती थी।

यूट्यूब पर बम बनाने के तरीके सर्च करता था
भास्कर पड़ताल में पता चला कि आरोपी फैजान से आसपास के लोग डरते थे। जब भी किसी का मोबाइल उसके हाथ लगता तो यूट्यूब पर वह बम बनाने के तरीके, आतंकवादियों के नंबर और उनकी खबरों को सर्च करता था। एटीएस को फैजान के मोबाइल फोन की इंटरनेट हिस्ट्री में सैकड़ों बार बम बनाने के अलग-अलग तरीकों को सर्च करने की जानकारी मिली।
फैजान विदेशी आतंकवादी संगठन से संपर्क करने की कोशिश इंटरनेट के माध्यम से करता था। वह आतंकवादियों के परिवारों की आर्थिक मदद करना चाह रहा था। उसने यह काम प्रारंभिक तौर पर शुरू कर दिया था।

कट्टरपंथ से जुड़ी खबरों का कलेक्शन रखता था
फैजान को अखबार पढ़ने का भी शौक था। उसके दिमाग में कट्टरपंथी सोच गहरी जगह बना चुकी थी। अखबार पढ़ता था तो उसमें इस्लाम को लेकर छपने वाली खबरों की कटिंग अपने पास रख लेता था। हमेशा से ही उनके निशाने पर सुरक्षाबलों के अधिकारी और उनके परिवार रहे हैं।
उनके पास एक मेमोरी कार्ड में इस्लामिक कट्टरता से जुड़े हुए फोटो-वीडियो भी मिले थे। फैजान ने मोबाइल में आतंकवादियों के मोबाइल नंबर भी सर्च किए थे।

मोहल्ले और आसपास की दुकानों पर डर का माहौल
सलूजा कॉलोनी में कोई भी फैजान के मामले पर बोलने के लिए तैयार नहीं है। भास्कर रिपोर्टर ने पड़ोस के लोगों से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन सब डरे और सहमे हुए हैं। फैजान जहां चाय पीता था, उस दुकानदार ने बताया कि वह बड़ा शातिर लड़का था। हमारे सामने कभी ऐसी बातों का जिक्र नहीं किया लेकिन अपने आप में हमेशा खोया रहता था। चाय पीने के दौरान भी वह मोबाइल में ही देखता रहता था।
भास्कर रिपोर्टर ने फैजान की दुकान के आसपास काम करने वाले मैकेनिकों से भी बात करने की कोशिश की, लेकिन कोई कैमरे पर आने के लिए राजी नहीं हुआ। सबको डर है कि उन पर कोई कार्रवाई हो जाएगी। फैजान कट्टरपंथी सोच के स्लोगन लिखकर आसपास के लड़कों को पढ़ने के लिए देता था।

मछली मार्केट के टी स्टॉल पर होती थी दोस्तों से मुलाकात
फैजान के पड़ोस में मैकेनिक का काम करने वाले वसीम खोखर ने बताया कि फैजान अपनी दुकान हर सुबह 9 बजे खोलता था। दिनभर कामकाज करने के बाद शाम को 7 बजे तक घर चला जाता । शाम को 8 बजे अपने दोस्तों से मिलने मछली मार्केट के टी स्टॉल पर पहुंचता।
यही वह जगह है, जहां फैजान और उसके दोस्त मिलकर बातचीत और प्लानिंग बनाते थे। इस स्टॉल पर सिमी से जुड़े पूर्व सदस्य फैजान के साथ मौजूद रहते थे।
यह टी स्टॉल, खंडवा कोतवाली पुलिस स्टेशन से महज 100 मीटर दूरी पर है। जब फैजान के यहां आने को लेकर दैनिक भास्कर की टीम ने टी स्टॉल के मालिक से बातचीत की तो उसने कुछ बोलने से मना कर दिया। हालांकि, कैमरे के पीछे कहा कि वह फैजान को जानता है।
जब भास्कर रिपोर्टर ने टी स्टॉल के फोटो-वीडियो लिए तो उसने वे डिलीट करवा दिए।

मुंबई, दिल्ली में सुरक्षाबलों के ठिकानों की रेकी की
नाम नहीं छापने की शर्त पर एक दोस्त ने बताया कि फैजान कट्टरपंथी बातें करता था, इसलिए हम लोग कम ही उसके साथ बैठते थे। चाय की दुकान पर उसका अड्डा था और वहीं पर सिमी संगठन से जुड़े हुए गुलमोहर कॉलोनी के लड़कों के संपर्क में रहता था। उन्हीं से बातचीत करता था।
एटीएस की पूछताछ में फैजान ने कहा है कि उसका एक ही मकसद था- सुरक्षाबल और उनके परिवारों को नुकसान पहुंचाना। इसी कारण कश्मीर, पठानकोट, मुंबई और दिल्ली में सुरक्षाबलों के ठिकानों की रेकी भी उसने की थी।
फैजान ने पिछले तीन साल में 14 बार इन शहरों में आर्मी एरिया की रेकी की है। उसने एटीएस को बताया कि अगर एक भी सुरक्षाकर्मी को नुकसान पहुंचाने में वह कामयाब हो जाता तो खुद को खुशनसीब मानता। फैजान के बड़े भाई इमरान ने बताया कि उसे पकड़े जाने का बिल्कुल भी डर नहीं था। जब एटीएस ने पकड़ा तो वह हंसते हुए घर से निकला था क्योंकि उसको हीरो बनने का बड़ा शौक था।
जेल में बंद रकीब से मिलने कोलकाता गया
फैजान खंडवा में लेथ मशीन की दुकान पर पिता और भाई के साथ काम करता था। थोड़े समय पहले भटकल का घर देखने कर्नाटक भी जा चुका है। कुल 7 भाई-बहनों में फैजान सबसे कम पढ़ा-लिखा है। सिमी से जुड़े खंडवा के ही रकीब की गिरफ्तारी के समय पुलिस टीम का फैजान ने विरोध किया था।
रकीब फिलहाल कोलकाता की जेल में बंद है। उससे मिलने फैजान कुछ महीने पहले वहां भी गया था। एटीएस के मुताबिक, रकीब का संबंध हावड़ा में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने वाले मो. सद्दाम और सईद अहमद से भी है।

नाबालिग के फोन में सर्च किए आतंकियों के वीडियो
दैनिक भास्कर की टीम से बातचीत में फैजान के 12 साल पुराने दोस्त मोहम्मद शाहिद ने बताया कि उसके पास खुद का मोबाइल नहीं था। दो-तीन महीने पहले ही नया मोबाइल लिया था। फैजान अमूमन दूसरों से मोबाइल मांग कर यूट्यूब पर इंडियन मुजाहिदीन से संबंधित जिहादी पोस्ट सर्च करता था।
फैजान एक नाबालिग के मोबाइल पर पाकिस्तान में चल रहे मुजाहिदीन ट्रेनिंग कैंप, मसूद अजहर और लश्कर-ए-तैयबा के वीडियो देखता था। फैजान के भाई इमरान ने बताया कि अपने रूम में वो हमेशा अकेला ही रहता था। मोबाइल फोन में क्या देखता और क्या सर्च करता था, इस बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है।
एटीएस ने फैजान से आईएसआईएस और दूसरे आतंकी संगठनों से जुड़ी किताबें, 4 मोबाइल फोन, 1 पिस्टल, 5 जिंदा कारतूस और सिमी संगठन के सदस्यता फॉर्म जब्त किए हैं।
नाबालिग का परिवार भी डर के साये में
आरोपी फैजान शेख की दुकान के पास ही नाबालिग किसी दूसरे मिस्त्री के यहां काम सीख रहा है। इसी दौरान उनके मोबाइल का इस्तेमाल फैजान ने किया था। दुकान मालिक शाहिद बताते हैं कि मेरी दुकान पर काम करने वाले नाबालिग के मोबाइल पर भी फैजान ने कुछ वीडियो सर्च किए थे। उसके बाद एटीएस ने नाबालिग से पूछताछ की थी।
4 जून को एटीएस इस नाबालिग को उसके घर से अपने साथ ले गई थी, फिर छोड़ दिया। दैनिक भास्कर की टीम गुलमोहर कॉलोनी, सेक्टर 3 स्थित नाबालिग के घर पहुंची। पूरा परिवार दरवाजा बंद कर घर के अंदर था। रिपोर्टर में दरवाजा खटखटाया तो उसकी दादी बाहर आईं। रिपोर्टर ने जब उनसे बातचीत करने की कोशिश की तो उन्होंने इनकार कर दिया।
इतना जरूर कहा कि हमारे बेटे की कोई गलती नहीं थी, उसके मोबाइल पर फैजान ने वीडियो सर्च किए थे। इस मामले में अब हम कुछ भी नहीं बोलेंगे। इतना कहने के बाद उन्होंने अपने घर का दरवाजा बंद कर दिया।

इंडियन मुजाहिदीन को 2013 में प्रतिबंधित संगठन घोषित किया गया
इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) को हिंसक उग्रवादी गतिविधियों के कारण भारत सरकार द्वारा वर्ष 2013 में प्रतिबंधित संगठन घोषित किया गया है। संगठन का उद्देश्य हिंसक तरीकों से भारत में इस्लामी राज्य की स्थापना करना है। भारत में वर्ष 2005 से 2013 तक दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, अहमदाबाद, पुणे आदि स्थानों पर हुए बम धमाकों में आईएसआईएस की संलिप्तता रही है।

लोन वुल्फ अटैक करने की साजिश रच रहा था
एटीएस के मुताबिक, फैजान लोन वुल्फ अटैक करने की फिराक में था। लोन वुल्फ अटैक का मकसद अकेले दम पर ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने का होता है। इस अटैक में छोटे हथियारों, चाकुओं या अन्य धारदार हथियारों का उपयोग किया जाता है। आतंकी संगठन आईएसआईएस के आतंकी अक्सर ऐसे हमले करते हैं।

सफदर नागौरी सहित 3 आरोपियों को फांसी की सजा मिली थी
आईएम सरगना रियाज भटकल ने संगठन में भर्ती एवं प्रशिक्षण के लिए मध्यप्रदेश के सिमी सदस्यों के सहयोग से मजबूत नेटवर्क स्थापित किया था। अहमदाबाद सीरियल बम ब्लास्ट मामले में साल 2022 में मध्यप्रदेश के सिमी सरगना सफदर नागौरी सहित 3 आरोपियों को फांसी जबकि अन्य 5 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा मिली थी।

सिमी के पूर्व सदस्यों की गतिविधियों पर पुलिस की नजर
दैनिक भास्कर से बातचीत में खंडवा पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार राय ने बताया कि साल 2001 से खंडवा सिमी का गढ़ रहा है। मध्यप्रदेश पुलिस और अन्य एजेंसियों ने समय-समय पर ऐसे अपराधियों पर कार्रवाई की है।सिमी के पूर्व सदस्यों की हर गतिविधियों पर हमारी नजर है।

