क्या भोपाल स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए तैयार है
15 मई को दिल्ली में स्वच्छ सर्वेक्षण का काम पूरा हुआ। अब टीम दो से तीन दिनों में भोपाल पहुंच सकती है। नगर निगम ने सड़कों, बाजारों, बैक लेन और नालों की सफाई के साथ पेंटिंग और मरम्मत का काम तेज कर दिया है। सवाल यह है कि जिन 10 इंडिकेटर्स पर 1500 अंक मिलने हैं, उन पर जमीन पर तैयारी कितनी दिख रही है?
भास्कर की टीम ने अशोका गार्डन से कमलापति स्टेशन तक का जायजा लिया। इसके बाद हम कमलापति से बिट्टन मार्केट तक गए। नए भोपाल कहे जाने वाले इन इलाकों में कई जगह नाले खुले मिले। कई जगहों पर डस्टबिन टूटे हुए दिखे और मेन रोड पर कई जगह गड्ढे पाए। बिट्टन मार्केट के पास झुग्गी से मल्टी की गलियों में चलना भी मुश्किल है।
अशोका गार्डन से कमलापति स्टेशन तक सड़कों में गड्ढे
पेटिंग, वेस्ट-टू-आर्ट, गड्ढामुक्त सड़कें और हरियाली बढ़ाने के लिए 200 अंक तय हैं। अशोका गार्डन से कमलापति स्टेशन तक सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे, धूल उड़ती मिली। सड़क पर पेंटिग या हरियाली नहीं मिली। हालांकि कमलापति स्टेशन से न्यूमार्केट की ओर जाते हुए सड़कों के दोनों ओर हरियाली है।

कई जगह तीन में से दो डस्टबिन गायब
सफाई की परीक्षा में 200 अंक सिर्फ इस बात पर मिलेंगे कि डस्टबिन लगे हैं या नहीं, क्या कोई नया कचरा प्वाइंट तो नहीं बन गया है। फिर भी बोर्ड ऑफिस से कांग्रेस कार्यालय तक करीब 10 में से 9 डस्टबिनों से ढक्कन खुले मिले, तो तीन जगहों पर केवर एक ही डस्टबिन मिला, बाकी के दो डस्टबिन गायब थे।
कमलापति स्टेशन से मानसरोवर चौराहे के बीच में एक कूड़े का ढेर मिला। अशोका गार्डन के वर्धमान ग्रीन पार्क में कचेर का ढेर लगा मिला। अशोका गार्डन थाने के पास भी यही हाल हैं।



प्रभात पेट्रोल पंप पर 20 मीटर खुला नाला
200 अंक नालियों की सफाई और व्यवस्थित निकासी पर मिलेंगे। राजधानी में ज्यादातर जगहों पर तो ढंकी हुई नालियां मिलीं, लेकिन प्रभात पेट्रोल पंप के पास ही 20 मीटर का एक खुला नाला बह रहा है। प्रगति पेट्रोल पंप से कमलापति स्टेशन के बीज में एक जगह कोलार का पाइप लाइन लीक होती मिली।


पार्कों में दिखी गंदगी
आवासीय क्षेत्रों और पार्कों में रोज एक बार, जबकि व्यावसायिक स्थलों, बस-रेलवे स्टेशनों, पर्यटन स्थलों और स्ट्रीट फूड जोन में दिन में दो बार सफाई जरूरी होती है। इस पैरामीटर के लिए 300 अंक तय हैं।
अशोका गार्डन के स्वामी विवेकानंद पार्क में डस्टबिन टूटा था और बगल में कचरे का ढेर लगा था। यहीं महावीर गेट से न्यूमार्केट के बीच में पड़ने वाले पार्क का भी यही हाल है डस्टबिन टूटे हैं और कचरा बगल में है।

बिट्टन मार्केट के पीछे स्लम एरिया में सांस लेना मुश्किल
स्लम क्षेत्रों और ढके नालों के लिए 150 अंक मिलते हैं। स्कूल परिसरों को कचरा मुक्त रखने के लिए 100 अंक तय किए गए हैं। नालों के आसपास कचरा पड़ा हुआ है।
रवींद्र भवन के पास प्रमुख नाले के आसपास अब भी गंदगी है। जालियां भी कई जगह टूटी हैं।
वहीं बिट्टन मार्केट के पास झुग्गी से मल्टी बनी बस्ती का हाल सबसे खराब नजर आया। जहां नाले खुले थे। दो मल्टी के बीच की गली कचरे से भरी है, जहां सांस लेना भी मुश्किल है।


पुरानी पेटिंग पर जमी धूल
कमलापति स्टेशन से बिट्ठल मार्केट जाते समय बीच में पड़ने वाली सभी पुरानी वॉल पेंटिंग धूल खा रही हैं। कहीं- कहीं वॉल पेटिंग के आगे दुकाने हैं तो कई नालियों में कचरा भरा है। हालांकि इस रास्ते पर एक सार्वजनिक शौचालय की दीवार पर स्वच्छता का संदेश देती नईं पेंटिंग बनी हुई है।
लोगों ने कहा हालत खराब हैं
भोपाल के लोगों ने सफाई को 10 में से 7 नंबर दिए। एक ने कहा कि केवल वीआईपी एरिया में ही आपको सफाई दिखेगी। अभी आप हमारी सोसाइटी के बाहर निकल जाएं। आप देखेंगी की पूरी गंदगी पड़ी हुई है। दूसरे ने कहा पुराने भोपाल में जाते तो सफाई की वहां स्थिति खराब है। नए भोपाल के भी अंदर की जो बस्तियां हैं वहां गंदगी मिलती है।

इन कामों पर होगा फोकस
जानकारी के अनुसार, आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 में विजिबल क्लीनलीनेस यानी जमीन पर दिखने वाली सफाई पर विशेष फोकस किया है। नई गाइडलाइंस के तहत शहरों की रैंकिंग 10 मुख्य इंडिकेटर्स के आधार पर तय होगी।
इसी वजह से निगम बैक लेन से लेकर नालों और कचरा पॉइंट तक सुधार कार्यों में जुटा है। पिछली बार ग्लोबल इन्वेस्टर समिट (GIS) के कारण शहर चकाचक था, लेकिन इस बार नए काम तो छोड़ो पुराने को ही मेंटेन नहीं रख पाए हैं।

कई जगहों पर बनी पेंटिंग…


