एक लाख में दी गर्लफ्रेंड की हत्या की सुपारी

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मप्र क्राइम फाइल्स के पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि उज्जैन की चिंतामणि रिंग रोड पर 15 नवंबर 2019 को हुई स्वाति की मौत, दरअसल एक ऐसी साजिश थी जिसकी स्क्रिप्ट कई दिन पहले लिखी जा चुकी थी। जो एक सड़क हादसा नजर आया था, अब वह पूरी तरह एक सुनियोजित हत्या में बदल चुका था।

हादसे के पांच दिन बाद जब पुलिस ने मैजिक वाहन के चालक वाहिद को गिरफ्तार किया, तब भी मामला पूरी तरह साफ नहीं था। वह खुद को निर्दोष बताता रहा, लेकिन जैसे-जैसे पूछताछ आगे बढ़ी, उसकी चुप्पी टूटती चली गई।

आखिरकार उसने कबूल किया कि उसे एक महिला को मारने के लिए सुपारी दी गई थी और यह पूरा खेल एक हादसे की तरह दिखाने के लिए रचा गया था।

अब आगे की कहानी इस क्राइम फाइल्स के इस पार्ट में…

वाहिद के खुलासे ने पुलिस को सीधे उस साजिश तक पहुंचा दिया, जहां इस हत्या की बुनियाद रखी गई थी। उज्जैन-इंदौर रिंग रोड स्थित चिंतामणि ब्रिज के पास पांच लोग एक साथ जुटे थे। वहीं तय हुआ कि किस तरह स्वाति को सड़क हादसे में मारकर मामले को दबा दिया जाएगा।

योजना बेहद सटीक थी। स्वाति को पहले से तय जगह पर बुलाया गया। जैसे ही वह ऑटो से उतरी, वहां मौजूद उमा नाम की महिला ने फोन कर उसकी लोकेशन की पुष्टि की।

‘सरदार’ का नाम आया… और कहानी पलट गई

पूछताछ के दौरान बार-बार एक ‘सरदार’ का जिक्र सामने आ रहा था, जो पूरी साजिश का मास्टर माइंड था। जब पुलिस ने इस कड़ी को जोड़ा, तो जो नाम सामने आया, उसने पूरे शहर को चौंका दिया।यह ‘सरदार’ कोई और नहीं, बल्कि सुखविंदर खनूजा था। वही शख्स जिसने घटना के बाद सबसे पहले स्वाति को पहचानकर अस्पताल पहुंचाया था। वही, जो खुद को उसका करीबी बता रहा था।

पुलिस गिरफ्त में सुखविंदर खनूजा।
पुलिस गिरफ्त में सुखविंदर खनूजा।

प्यार, विवाद और आरोपों से जुड़ा मर्डर

जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, स्वाति और सुखविंदर के रिश्ते की परतें खुलती चली गईं। स्वाति के पिता ने बताया कि दोनों के बीच कई सालों से जान-पहचान थी, लेकिन 2017 के बाद रिश्ते में दरार आ गई थी। स्वाति ने सुखविंदर के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था, हालांकि वह उसमें बरी हो गया था।

इसके बाद दोनों के बीच तनाव बढ़ता गया। फोन पर धमकियां, समझौते का दबाव और लगातार विवाद-यह सब पहले से चल रहा था।

सुखविंदर ने खुद को निर्दोष बताया

गिरफ्तारी के बाद सुखविंदर ने खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया। उसकी कहानी पुलिस के सामने बिल्कुल अलग थी। उसने कहा कि स्वाति उस पर शादी का दबाव बना रही थी, जबकि उसकी पहले से शादी हो चुकी थी। मना करने पर उसने झूठा केस दर्ज कराया और 50 लाख रुपए की मांग करने लगी।

सुखविंदर ने यह भी दावा किया कि स्वाति मानसिक रूप से अस्थिर थी और कई बार आत्महत्या की कोशिश कर चुकी थी।

बयानों में फर्क, लेकिन सबूत एक ही दिशा में

पुलिस के सामने अलग-अलग कहानियां थीं, लेकिन तकनीकी सबूत कुछ और ही इशारा कर रहे थे। कॉल डिटेल्स से साफ हो गया कि सभी आरोपी लगातार एक-दूसरे के संपर्क में थे। वारदात से पहले और बाद की लोकेशन भी उनकी संलिप्तता को साबित कर रही थी।

ढाबे में काम करने वाले संजय और पंकज ने खुद को निर्दोष बताया, लेकिन जांच में उनकी भूमिका भी सामने आती गई। धीरे-धीरे साजिश की पूरी चेन साफ हो गई।

आरोपी वाहिद जिसने स्वाति को गाड़ी से कुचल दिया था।
आरोपी वाहिद जिसने स्वाति को गाड़ी से कुचल दिया था।

पहले से दर्ज थीं शिकायतें, बढ़ रहा था झगड़ा

थाने में पहले से दर्ज शिकायतें इस मामले की एक और अहम कड़ी थी। स्वाति ने सुखविंदर के खिलाफ धमकी और जान के खतरे की बात कही थी। वहीं सुखविंदर ने भी आरोप लगाया था कि उस पर शादी और पैसों का दबाव बनाया जा रहा है।

यानी, यह वारदात अचानक नहीं हुई थी। इसके बीज काफी पहले बोए जा चुके थे, जो आखिरकार एक खतरनाक साजिश में बदल गए।

कैसे तैयार हुई हत्या की पूरी साजिश

पुलिस के मुताबिक, सुखविंदर ने अपने करीबी लोगों के साथ मिलकर इस हत्या की योजना बनाई। ढाबे के कर्मचारियों को शामिल किया गया, फिर समीर के जरिए इंदौर से वाहिद को जोड़ा गया। शुरुआत में 20 हजार रुपए एडवांस दिए गए और सही मौके का इंतजार किया गया।

सभी छह आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा

जांच पूरी होने के बाद मामला अदालत में पहुंचा। गवाहों के बयान, कॉल रिकॉर्ड और घटनाक्रम की कड़ियां एक-एक कर जुड़ती गईं। आखिरकार 25 सितंबर 2024 को उज्जैन जिला न्यायालय ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाया।

सुखविंदर खनूजा सहित सभी छह आरोपियों वाहिद, समीर, पंकज, संजय और उमा को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

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