दिन में खजुराहो, रात में सतना सबसे गर्म

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एक तरफ जहां पूरा प्रदेश भीषण गर्मी की चपेट में है, वहीं दूसरी तरफ आंधी और बारिश का दौर भी जारी है। 24 घंटों में राज्य के कई हिस्सों में मौसम ने करवट ली, जिससे कहीं राहत मिली तो कहीं आंधी-तूफान ने तबाही मचाई।

मौसम विभाग के मुताबिक, 24 घंटों के दौरान शिवपुरी, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह, सागर, पन्ना, कटनी, जबलपुर, मंडला, बालाघाट, सिवनी और सतना में बारिश दर्ज की गई।

पन्ना में तो ओले गिरने की खबर भी सामने आई है। जबलपुर में 59 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूलभरी आंधी चली।

वहीं सागर-सतना में 43 किमी और चित्रकूट में 41 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं।

आंधी-बारिश के बावजूद गर्मी का असर कम नहीं हुआ है। सोमवार को खजुराहो सबसे गर्म रहा। यहां अधिकतम तापमान 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

रात में भी नहीं मिल रही राहत: सतना में सबसे गर्म रात

चिंता की बात यह है कि अब रात के तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। सतना में न्यूनतम तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन में रात का सबसे ज्यादा तापमान है। यह पहली बार है जब इस सीजन में रात का पारा 31 डिग्री के पार पहुंचा है। रायसेन, उमरिया, खजुराहो और सीधी में भी रात का तापमान 29 डिग्री या उससे अधिक दर्ज किया गया।

दमोह में आंधी-बारिश से दीवार गिरी, दबने से महिला की मौत

दमोह में सोमवार शाम आंधी-बारिश से एक कच्ची दीवार गिर गई। इसमें दबने से पड़ोस में रहने वाली 48 वर्षीय रागिनी पटैरिया नाम की महिला की मौत हो गई। महिला घर के पास रखे कंडे ढंकने गई थी, तभी यह हादसा हुआ। घटना रनेह थाना क्षेत्र के महुआ खेड़ा गांव की है।

सीहोर में सड़क का डामर पिघला, लू से बचाव के लिए अलर्ट जारी

सीहोर जिले में अधिकतम तापमान 44.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। राजस्थान से आ रही गर्म हवाओं ने अप्रैल के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जिससे मंगलवार को सीहोर-श्यामपुर मार्ग पर डामर पिघलना शुरू हो गया। दो दिनों से पारा 44 डिग्री के पार बना हुआ है, जिसके चलते दोपहर में सड़कें सुनसान नजर आ रही हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने लू और हीट स्ट्रोक से बचाव के लिए अलर्ट जारी करते हुए सभी अस्पतालों में ‘हीट स्ट्रोक मैनेजमेंट यूनिट’ और ORS कॉर्नर स्थापित कर दिए हैं। CMHO डॉ. सुधीर कुमार डेहरिया ने सतत निगरानी और उपचार के निर्देश दिए हैं।

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गर्मी से बचाव के लिए एडवाइजरी

गर्मी का असर बढ़ते ही मौसम विभाग ने लोगों के लिए बचाव एडवाइजरी भी जारी की है। लोगों से कहा गया है कि वे दिनभर पर्याप्त पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेट रखें। दोपहर के समय लंबे समय तक धूप में न रहें। हलके वजन और रंग के सूती कपड़े पहनें। बच्चे और बुजुर्ग खासतौर पर अपना ध्यान रखें।

अप्रैल में पड़ती है तेज गर्मी

मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह दिसंबर-जनवरी में सर्दी और जुलाई-अगस्त में सबसे ज्यादा बारिश होती है, उसी तरह गर्मी के दो प्रमुख महीने अप्रैल और मई हैं। अप्रैल में तेज गर्मी पड़ती है।

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एमपी में अप्रैल के दूसरे पखवाड़े से गर्मी का असर तेज होने लगता है। महीने के आखिरी दिनों में तो तापमान रिकॉर्ड तोड़ देता है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के 10 साल की डेटा बेस्ड स्टडी में सामने आया कि भोपाल-इंदौर में पारा 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा, जबकि जबलपुर में इसने 44 डिग्री सेल्सियस को छू लिया।

ग्वालियर में तो तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। तीन साल इन शहरों में तेज गर्मी पड़ी। इस बार भी तापमान में बढ़ोतरी की संभावना है।

भोपाल में 1996 में पड़ी थी सबसे ज्यादा गर्मी

अप्रैल में गर्मी के ट्रेंड की बात करें तो भोपाल में 29 अप्रैल 1996 को अधिकतम तापमान 44.4 डिग्री सेल्सियस पहुंचा था। इस महीने भोपाल में बारिश-आंधी के आसार भी बनते हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ साल से अप्रैल में बारिश का दौर चल रहा है।

20 अप्रैल 2013 को भोपाल में 24 घंटे के भीतर 30.8 मिमी, यानी एक इंच से ज्यादा बारिश हुई थी। वहीं, 2023 में 22.6 मिमी पानी गिरा था।

इंदौर में पिछले साल गिरा था 22.3 मिमी पानी

इंदौर में भी अप्रैल में पारा 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, 25 अप्रैल 1958 को सर्वाधिक 44.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया था। इस महीने यहां भी मौसम में बदलाव देखने को मिलता है। गर्मी के साथ बादल छाए रहते हैं तो बौछारें भी गिरती हैं। हर साल बारिश का दौर भी बनता है।

जबलपुर में तेज गर्मी का ट्रेंड

जबलपुर में अप्रैल में एक बार पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, 28 अप्रैल 1970 को दिन का तापमान 45.4 डिग्री रहा था। अप्रैल में यहां भी बारिश होने की संभावना रहती है।

रिकॉर्ड के अनुसार, जबलपुर में 3 अप्रैल 1935 को 24 घंटे के भीतर 50.3 मिमी बारिश हुई थी। 2023 में 20.2 मिमी पानी गिरा था। इस साल 19 अप्रैल को अधिकतम तापमान 40.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था।

ग्वालियर में पड़ती है सबसे ज्यादा गर्मी

ग्वालियर में अप्रैल की गर्मी का ट्रेंड बाकी शहरों से अलग रहता है। यहां ज्यादा गर्मी पड़ती है। 10 साल में यहां पारा एक बार 45 डिग्री और 3 बार 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। 28 अप्रैल 1958 को तापमान 46.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।

एक दिन में सर्वाधिक बारिश होने का रिकॉर्ड वर्ष 1909 में बना था, जब 22 अप्रैल को कुल 67.6 मिमी बारिश हुई थी। इसी साल अप्रैल महीने में साढ़े 4 इंच पानी गिरा था।

उज्जैन में भी गर्मी, बारिश का ट्रेंड

उज्जैन में भी अप्रैल महीने में गर्मी और बारिश का ट्रेंड रहता है। 18 अप्रैल 2010 को तापमान रिकॉर्ड 45.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था। वहीं, 2014 से 2025 के बीच दो बार पारा 43 डिग्री के पार जा चुका है। पिछले साल यह रिकॉर्ड 48.8 डिग्री पहुंच चुका है, जो ओवरऑल रिकॉर्ड भी है।

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