किस कानून के तहत किसी भी थाने पर वीडियो ग्राफी और फोटोग्राफी करना कानून अपराध है।

माननीय न्यायालय ने एक केस की सुनवाई के दौरान थानों पर आम जनमानस के द्वारा वीडियो बनाने फोटो खींचने को विधिक न मानने और पुलिस कर्मियों द्वारा आपत्ति जताने के बाद इस मामले को सुनवाई के दौरान भरी अदालत में पुलिस विभाग के अधिवक्ता के द्वारा दिए गए तर्कों पर माननीय न्यायाधीश ने सख्त प्रश्न वार्ता के दौरान किए तीखे सवाल
जिसमें विद्वान महिला अधिवक्ता से कई बार यह सवाल माननीय न्यायाधीश ने पूछा।।
की किस कानून के तहत किसी भी थाने पर वीडियो ग्राफी और फोटोग्राफी करना कानून अपराध है।
पुलिस अगर विधिक काम कर रही है। तो उसको किस बात की आपत्ति यहां तक की माननीय न्यायालय ने कहा सरकार के द्वारा लगाए गए 80% सी.सी.टी.वी. कैमरे काम नहीं करते हैं। इस दिशा में अधिवक्ता के द्वारा दिया गए तर्क को माननीय न्यायाधीश ने कई बार डिक्लाइन किया की थानों पर कैमरे लगे हुए हैं।
इसलिए रिकॉर्डिंग की क्या आवश्यकता है। माननीय न्यायालय ने साफ तौर पर स्पष्ट किया कि वीडियो ग्राफी फोटो ग्राफी करना किसी भी तरह का अपराध नहीं है। और ऐसा करने से कोई भी पुलिस कर्मी या सार्वजनिक स्थान पर कार्यरत जन सेवक किसी भी जनमानस के सामान्य से सामान्य व्यक्ति को सबूत के तौर पर वीडियो बनाने और फोटो खींचने से कोई रोक नहीं सकता।।
