भोपाल मैनिट-एनएचडीसी के बीच एमओयू

भोपाल स्थित मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) और एनएचडीसी के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य बिजली और ऊर्जा के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार, परामर्श और कौशल विकास को बढ़ावा देना है।
इस समझौते के जरिए छात्रों को व्यावहारिक अनुभव, इंटर्नशिप और तकनीकी प्रशिक्षण के बेहतर अवसर मिलेंगे। दोनों संस्थानों का मानना है कि यह पहल देश के ऊर्जा भविष्य को मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम साबित होगी।
एमओयू हस्ताक्षर समारोह में दोनों संस्थानों के कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे। मैनिट की ओर से डॉ. अनुपमा शर्मा, डॉ. अरविंद मित्तल, डॉ. संजीव सिंह, डॉ. अमित ओझा, डॉ. अमित भगत और डॉ. मीना अग्रवाल शामिल हुईं।
वहीं एनएचडीसी की ओर से प्रबंध निदेशक ओम प्रकाश के नेतृत्व में महाप्रबंधक अशोक कुमार सिंह और डीजीएम दीपक सक्सेना उपस्थित रहे।
सहयोग के चार प्रमुख हिस्से
संयुक्त अनुसंधान: जलविद्युत और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर मिलकर काम किया जाएगा।
परामर्श सेवाएं: औद्योगिक परियोजनाओं के विकास में मैनिट के विशेषज्ञों की भूमिका अहम होगी।
कौशल विकास: छात्रों को इंटर्नशिप, प्रशिक्षण और विशेष तकनीकी कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा।
ज्ञान का आदान-प्रदान: ग्रीन एनर्जी और नई तकनीकों पर ज्ञान साझा कर क्षमता निर्माण किया जाएगा।
छात्रों को मिलेगा प्रैक्टिकल एक्सपोजर
इस साझेदारी का सबसे बड़ा फायदा छात्रों को मिलेगा। उन्हें न केवल सैद्धांतिक ज्ञान मिलेगा, बल्कि इंडस्ट्री के साथ सीधे जुड़कर काम करने का अवसर भी मिलेगा। इंटर्नशिप और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से छात्र ऊर्जा क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों और तकनीकों को समझ सकेंगे, जिससे उनकी रोजगार क्षमता भी बढ़ेगी।
इस समझौते को अंतिम रूप देने में मैनिट के निदेशक प्रो. करुणेश कुमार शुक्ला की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके मार्गदर्शन में यह पहल संभव हो पाई। समन्वय टीम ने उनके नेतृत्व और सहयोग के लिए आभार भी व्यक्त किया, जिसने इस साझेदारी को मजबूत आधार दिया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि यह समझौता भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक समाधान विकसित करने में सहायक होगा। एनएचडीसी के औद्योगिक अनुभव और मैनिट की अनुसंधान क्षमता के संयोजन से नई तकनीकों और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
