शिवराज सिंह बोले-सिर्फ अनाज उगाने से नहीं बढ़ेगी आय
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए एक बड़ा विजन पेश किया है। भोपाल में प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय किसानों, विशेषकर छोटे किसानों की आर्थिक स्थिति केवल गेहूं और धान पैदा करने से नहीं सुधरेगी। आय में क्रांतिकारी बदलाव के लिए किसानों को ‘इंटीग्रेटेड फार्मिंग’ (एकीकृत कृषि) की ओर मुड़ना ही होगा।
“अनाज के साथ शहद और मछली भी पालें किसान”
शिवराज सिंह ने कहा कि भारत में औसतन जोत का आकार मात्र 0.96 हेक्टेयर है। इतने छोटे खेत में पारंपरिक खेती से गुजारा मुश्किल है। उन्होंने समाधान देते हुए कहा, किसान अनाज के साथ-साथ फल, सब्जियां, दूध, और ‘श्री अन्न’ (मोटा अनाज) पर ध्यान दें।
उन्होंने कहा कि, एक ही खेत में फसल के साथ पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मछली पालन और कृषि वानिकी जैसे काम करने होंगे। वहीं, नई तकनीकों और प्राकृतिक खेती के माध्यम से उत्पादन की लागत घटाना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने बताया कि इसी ‘इंटीग्रेटेड मॉडल’ का लाइव प्रदर्शन दिखाने के लिए 11 से 13 अप्रैल तक रायसेन में ‘उन्नत कृषि महोत्सव’ आयोजित किया जा रहा है, जहां देश के दिग्गज वैज्ञानिक किसानों को ट्रेनिंग देंगे।

जीतू पटवारी के धरने पर किया प्रहार
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा बोरियां लेकर उनके बंगले पर धरने को लेकर शिवराज सिंह चौहान ने इसे ‘अपरिपक्व राजनीति’ करार देते हुए कहा,
अगर कृषि सुधार के लिए कोई काम होता है, तो उसका स्वागत है। लेकिन किसी नेता के बंगले पर बिना किसी पूर्व सूचना के बोरे लेकर पहुंच जाना एक बड़े नेता के लिए शोभा नहीं देता। राजनीति गरिमा और तथ्यों के साथ होनी चाहिए।

सब्सिडी पर कहा ग्लोबल संकट का बोझ किसानों पर नहीं
मंत्री ने किसानों को आश्वस्त किया कि ईरान और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर खाद (DAP और यूरिया) की कीमतें बढ़ रही हैं, लेकिन भारत सरकार इसका बोझ किसानों पर नहीं आने देगी।
