यूपीएससी में सिलेक्ट एमपी के 61 युवाओं का सम्मान

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कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में शनिवार को यूपीएससी (UPSC) के चयनित अभ्यर्थियों के लिए ‘सफलता के मंत्र’ सम्मान समारोह आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में हुए इस कार्यक्रम में उन 61 चेहरों की चमक दिखी, जिन्होंने संघर्ष और सीमित संसाधनों के बीच देश की सबसे कठिन परीक्षा क्रैक की।

यहां मुख्यमंत्री ने कहा कि “लोकतंत्र की यही खूबसूरती है कि यहां एक चाय वाला प्रधानमंत्री बनता है और एक गाय वाला मुख्यमंत्री। हमें हर 5 साल में जनता के बीच परीक्षा देनी पड़ती है, नीतियों के आधार पर उनका विश्वास जीतना पड़ता है।”

इस दौरान सीएम ने ‘प्रतिभाओं का परचम’ पुस्तिका का विमोचन किया और अभ्यर्थियों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, अनुपम राजन और हिंदी ग्रंथ अकादमी के डायरेक्टर अशोक कड़ेल भी मौजूद रहे।

37 से 61 तक पहुंचा सफर: 22 बच्चे सरकारी कॉलेजों के

अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने बताया कि यह सिलसिला 2020 में तब शुरू हुआ था जब डॉ. मोहन यादव उच्च शिक्षा मंत्री थे। तब चयनित बच्चों की संख्या केवल 37 थी, जो अब बढ़कर 61 हो गई है। खास बात यह है कि इनमें 20 बेटियां हैं और 22 अभ्यर्थी ऐसे हैं जिन्होंने किसी महंगे प्राइवेट कॉलेज के बजाय सरकारी कॉलेजों से पढ़ाई की है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव।

CM बोले: 2047 में आजादी के अमृतकाल को देखेंगे

सीएम के मंत्र: ‘चाय वाला पीएम और गाय वाला सीएम बन सकता है, यह लोकतंत्र की खूबसूरती’ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आप सौभाग्यशाली हैं जो 2047 के अमृतकाल में भारत को नंबर-1 बनते देखेंगे।

राजनीति में रहते हुए कई डिग्रियां हासिल कीं

सीएम ने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती, उन्होंने खुद राजनीति में रहते हुए कई डिग्रियां हासिल कीं।

‘परीक्षा… चयन और जवाबदेही’

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने जब अपनी तुलना नवनियुक्त अफसरों से की, तो पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा। सीएम ने कहा कि “लोकतंत्र में आप सौभाग्यशाली हैं कि एक बार परीक्षा पास की और आपका चयन पक्का हो गया। लेकिन हम राजनीतिज्ञों की परीक्षा हर पांच साल में होती है। हमें जनता के बीच जाना पड़ता है, अपनी नीतियों का हिसाब देना पड़ता है और फिर से उनका भरोसा जीतना पड़ता है। यह व्यवस्था ही देश को जीवंत रखती है।” उन्होंने संदेश दिया कि पद मिलने के बाद अहंकार नहीं, बल्कि सेवा का भाव होना चाहिए क्योंकि असली परीक्षा ‘मैदान’ (फील्ड) में होती है।

सीएम की अफसरों से 5 अपेक्षाएं

मुख्यमंत्री ने नए अफसरों के सामने पांच मुख्य बिंदु रखे:

  • अंत्योदय: समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के लिए काम करें।
  • नवाचार: आत्मनिर्भर भारत के लिए नए आइडियाज पर काम करें।
  • शुचिता: समय और कार्य की पवित्रता का ध्यान रखें।
  • ईमानदारी: सत्यनिष्ठा के मार्ग को कभी न छोड़ें।
  • शिल्पकार: विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।

‘इतिहास जानने वाला ही भविष्य बना सकता है’

सीएम ने कहा कि अधिकतर युवा आईटी बैकग्राउंड से होने के बावजूद साहित्य और इतिहास विषय लेकर सफल हो रहे हैं, यह अच्छी बात है। जो अपने देश के इतिहास को नकारता है, वह भविष्य में आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस और शहीद भगत सिंह का उदाहरण देते हुए कहा कि आज बलिदान का नहीं, बल्कि देश के लिए जीने और वंचितों के लिए काम करने का समय है।

‘मिथक टूटे’ – न दिल्ली की जरूरत, न अंग्रेजी की अनिवार्यता

समारोह में एसीएस अनुपम राजन ने अपने संबोधन में कहा कि अब यूपीएससी के लिए दिल्ली जाना या बड़े संस्थानों में पढ़ना जरूरी नहीं है। अनूपपुर, डिंडोरी, छतरपुर और सतना जैसे छोटे जिलों के युवाओं ने साबित कर दिया है कि प्रतिभा हर जगह से रास्ता बनाती है। कई चयनित अभ्यर्थी किसान परिवारों से हैं, जिन्होंने आईआईटी या स्टीफेंस जैसे टैग के बिना सफलता पाई।

सरकारी संस्थानों का दबदबा:

इस बार की एक बड़ी उपलब्धि यह भी है कि इन 61 में से 22 अभ्यर्थी जो सरकारी कॉलेजों से सीधे स्नातक हैं ऐसे हैं जिन्होंने अपनी पढ़ाई मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज से की है।

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