11 महीने बाद MP में घरेलू LPG सिलेंडर ₹60 महंगा

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केंद्र सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर 60 रुपए महंगा कर दिया है। वहीं, 19 KG वाले कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम में 115 रुपए का इजाफा किया गया है। बढ़ी हुई कीमतें 7 मार्च से लागू हो गई हैं।

मध्य प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 918 रुपए, इंदौर में 941 रुपए, ग्वालियर में 996 रुपए, जबलपुर में 919 रुपए और उज्जैन में 972 रुपए में सिलेंडर मिलेगा।

सबसे महंगी गैस नर्मदापुरम में मिलेगी। यहां अब सिलेंडर की कीमत 1035 रुपए चुकाना पड़ेगी। मुरैना में 937 और भिंड में 936 रुपए चुकाने होंगे। भिंड, मुरैना और निवाड़ी में भी सिलेंडर के रेट 1 हजार रुपए के करीब पहुंच गए हैं।

इससे पहले 8 अप्रैल 2025 को सिलेंडर के रेट बढ़े थे। हालांकि, 8 मार्च 2024 को महिला दिवस पर केंद्र सरकार ने सिलेंडर के दाम में 100 रुपए की कटौती भी की थी।

इसी महीने बढ़े थे कॉमर्शियल गैस के रेट इससे पहले, 1 मार्च 2026 को कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 31 रुपए तक बढ़ाए गए थे। अब घरेलू गैस सिलेंडर के रेट भी बढ़ गए हैं। सरकार ने गैस के दामों में बढ़ोत्तरी ऐसे वक्त की है, जब अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के चलते देश में गैस किल्लत की आशंका जताई गई है।

आधे एमपी में 900 रुपए से ज्यादा कीमत एमपी के आधे जिलों में अब सिलेंडर 900 रुपए से ज्यादा कीमत पर ही मिलेगा। नर्मदापुरम में सबसे ज्यादा 1035 रुपए रहेंगे। वहीं, मुरैना, भिंड, निवाड़ी, टीकमगढ़, झाबुआ, दतिया, श्योपुर, शिवपुरी और रतलाम में 991 रुपए या इससे अधिक कीमत पहुंच गई है।

5 बड़े शहरों में ग्वालियर में सबसे ज्यादा रेट है। अब तक यहां पर सिलेंडर की कीमत 936 रुपए 50 पैसे थी, जो अब 996.50 रुपए हो गई है।

प्रदेश के दो 2 जिले शाजापुर और सीहोर में एलपीजी सिलेंडर की कीमत 918 रुपए 50 पैसे हो गई है। सिवनी, सागर, विदिशा, दमोह, रायसेन, पन्ना, उमरिया, सीधी में भी कीमत कम रहेगी।

सिलेंडर की किल्लत रोकने के लिए LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश बता दें कि केंद्र सरकार ने 5 मार्च को इमरजेंसी पावर इस्तेमाल करते हुए देश की सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया था।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने यह आदेश जारी किया। इसमें कहा गया है कि अब रिफाइनरियां प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल सिर्फ रसोई गैस बनाने के लिए करेंगी।

सभी कंपनियों को प्रोपेन और ब्यूटेन की सप्लाई सरकारी तेल कंपनियों को करनी होगी। सरकारी तेल कंपनियों में इंडियन ऑयल (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) शामिल है। इसका मकसद कंज्यूमर्स को बिना रुकावट गैस सिलेंडर की सप्लाई है।

नॉलेज बॉक्स:

1. कैसे तय होती है गैस सिलेंडर की कीमत

तेल कंपनियां हर महीने पिछले महीने के अंतरराष्ट्रीय मूल्यों, एक्सचेंज रेट और अन्य लागतों के आधार पर LPG की बेस प्राइस तय करती हैं। इसके बाद टैक्स, ट्रांसपोर्ट, और डीलर कमीशन जोड़कर खुदरा मूल्य निकाला जाता है। सब्सिडी वाले सिलेंडर के लिए सरकार अंतर की भरपाई करती है, जबकि गैर-सब्सिडी वाले सिलेंडर की पूरी कीमत ग्राहक चुकाता है।

2. एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 क्या है

सरकार ने यह आदेश आवश्यक वस्तु अधिनियम यानी एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 (ESMA) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करके जारी किया है। इससे पहले सरकार ने यूक्रेन युद्ध के बाद तेल क्षेत्र में ESMA के नियमों को लागू किया था। तब रिफाइनिंग कंपनियों से कहा गया था कि वे देश में फ्यूल की कमी न होने दें और इसे बाहर एक्सपोर्ट न करें, क्योंकि उस समय भारी मार्जिन मिलने की वजह से तेल बाहर बेचना काफी फायदे का सौदा बन गया था।

3. प्रोपेन-ब्यूटेन और LNG के उपयोग जानें

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